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कुछ सालों में बड़ी संख्या में भारतीय ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ जा रहे हैं, जहां वे शादी के अलावा भी अपनी जरूरतों को किसी और से पूरा कर रहे हैं. फिर चाहे वह इमोशनल सपोर्ट हो या फिजिकल कनेक्शन. कल तक जो बातें सुनकर अजीब लगती थीं, वे अब बड़े शहरों का कल्चर बनती जा रही हैं. अगर आप भी सोचते हैं कि यह सिर्फ सुनने की बात है, तो बिल्कुल ऐसा नहीं है. अब रिसर्च के नंबर इस बात की गवाही दे रहे हैं.
Gleeden ने एक सर्वे किया, जिसमें पता चला कि उनके एक्सट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप पर भारत में कुल 4 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हो चुके हैं. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि रिश्तों के मामले में देश के भीतर एक शांत बदलाव तेजी से जारी है.
रिश्तों में आया 'चुपचाप बदलाव'
हम खुद को भले ही पारंपरिक और परिवार-केंद्रित समाज कहें, लेकिन Gleeden का ताजा सर्वे कुछ और ही तस्वीर दिखा रहा है. भारत में शादी को आज भी पवित्र माना जाता है, पर लोग अब उस ढांचे से बाहर जाकर अपनी मन की जरूरतों को समझने लगे हैं. Gleeden ने 2024 में टियर-1 और टियर-2 शहरों के 1,503 शादीशुदा लोगों, जिनकी उम्र 25 से 50 के बीच है, उन पर एक अध्ययन किया. नतीजा थोड़ा हैरान करने वाला था, लेकिन नतीजे में बदलाव की ओर इशारा कर रहा था. जहां भारत में शादी को सबसे पवित्र माना जाता है, वहीं लोग अब इस पर ही भरोसा नहीं करते. अपना अकेलापन मिटाने के लिए शादी से बाहर पार्टनर तलाश करते हैं.
60% लोग अपना रहे हैं नॉन-ट्रेडिशनल डेटिंग प्रैक्टिस
सर्वे में सामने आया कि 60% से ज्यादा लोग swinging जैसे तरीकों को एक्सप्लोर कर रहे हैं, जिसमें वे अपनी सेक्स लाइफ में फन ऐड करने के लिए दूसरे कपल के साथ शारीरिक संबंध बना रहे हैं. वहीं उन 60% में से कुछ ऐसे हैं, जो open-relating या relationship freedom जैसी अवधारणाओं को अपना रहे हैं, जिसमें कपल शादी के बाद भी दूसरे पार्टनर के साथ इमोशनल सपोर्ट या फिजिकल सपोर्ट के लिए रिश्ता रख सकते हैं.
Ashley Madison का डेटा भी यही कहानी कहता है
ऐसे बदलाव सिर्फ एक ऐप तक सीमित नहीं हैं. Ashley Madison के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में तमिलनाडु का कांचीपुरम, जो मंदिरों और रेशमी साड़ियों के लिए जाना जाता है, वह एक्सट्रा-मैरिटल अफेयर के लिए एक बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है. यह साफ इशारा है कि जो बातें पहले टैबू मानी जाती थीं, वे अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं.
घर वालों को सब पता है लेकिन वे चुप रहते हैं
मुंबई की मार्केटिंग एनालिस्ट स्निग्धा घोष (नाम बदला हुआ) कहती हैं कि अब ये चीजें छिपी नहीं रहतीं. कई मामलों में घर के लोग जानते हैं, पर चुप रहना चुनते हैं. कुछ सालों में ओपन मैरिज का चलन काफी बढ़ा है.
एक अन्य यूजर अनिरुद्ध (नाम बदला हुआ), जो 12 साल से शादीशुदा हैं, वह भी स्वीकार करते हैं कि वे एक्सट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप्स पर एक्टिव हैं. वे कहते हैं, "ये बस थ्रिल और एक्सपेरिमेंट के लिए है."
कौन हैं इन ऐप्स पर? यूजर डेमोग्राफिक्स
Gleeden के सर्वे के मुताबिक, इस ऐप पर 65% पुरुष और 35% महिलाएं हैं. महिलाओं की भागीदारी में बीते 2 साल में 148% की बढ़ोतरी हुई है. यानी महिलाएं भी अब इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने में पहले जैसी झिझक महसूस नहीं कर रहीं.
लोग कब सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं?
औसतन भारतीय यूजर्स रोज 1 से 1.5 घंटा इस ऐप पर बिताते हैं. जिसका सबसे ज्यादा एक्टिव समय है, दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक और फिर रात 10 बजे से लेकर 12 बजे तक का वक्त. इसका मतलब साफ है कि जब भी लोग फ्री होते हैं, तो इन ऐप्स पर समय बिताते हैं.
किसे कौन पसंद करता है?
ज्यादातर पुरुष 25-30 साल की महिलाओं की तलाश में रहते हैं. महिलाएं जिनकी उम्र 30 से 40 साल है, वे आर्थिक रूप से स्थिर पुरुषों को तलाशती हैं, जैसे डॉक्टर, सीनियर एक्जीक्यूटिव, CA. महिलाएं ऐसे पुरुषों को प्राथमिकता देती हैं.
सबसे ज्यादा यूजर वाले शहर
बेंगलुरु- 18%,
हैदराबाद- 17%,
दिल्ली- 11%,
मुंबई- 9%,
और पुणे- 7%.
छोटे शहरों में भी डिमांड खूब
लखनऊ, चंडीगढ़, सूरत, कोयंबटूर, पटना, गुवाहाटी, जैसे शहरों में भी इन ऐप्स की डिमांड बढ़ी है. इससे साफ है कि यह ट्रेंड सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे शहर के लोगों की सोच में भी फर्क आया है.
महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी
इन ऐप्स पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को कई ऐप्स इमपावरमेंट के तौर पर देखते हैं. ऐसे ऐप महिलाओं के लिए फ्री है, जिससे उन्हें सुरक्षित और संतुलित माहौल मिलता है. लेकिन इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी उठता है कि क्या यह वाकई महिलाओं का सशक्त बनना है, या मौजूदा रिश्तों में न पूरी हो पाने वाली भावनात्मक जरूरतों का केवल एक हिस्सा?
Gleeden India का बयान
Gleeden India की काउंट्री मेनेजर सिबिल शिड्डेल कहती हैं 'भारत में शादी को बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन लोग इमोशनल एक्सप्रेशन और सेल्फ ऐप्रिमेशन के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रहे हैं. यह एक चुपचाप चल रही रिलेशनशिप में बदलाव है.
हम सही या गलत पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि रिश्तों की असल तस्वीर अब शब्दों में नहीं, डेटा में दर्ज हो रही है. भारत में रिश्तों का मतलब चुपचाप बदल रहा है, और यह बदलाव लगातार जारी है. जिसको लोग कल तक शर्मनाक मानते थे, आज उसी को ट्रेंड बना चुके हैं.
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