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वडोदरा में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी लोगों को अंग्रेजी बोलकर ठगते थे, वेब सीरीज देखकर सीखी ठगी

आरोपी धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलकर अमेरिका के लोगों को लोन मंजूर होने का झांसा देते थे और उनसे प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 150 से 200 डॉलर तक वसूलते थे.

Fake International Call Centre Fake International Call Centre

गुजरात के वडोदरा में पुलिस ने एक ऐसे फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो भारत में बैठकर अमेरिकी नागरिकों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बना रहा था. अकोटा इलाके के एक अपार्टमेंट से संचालित इस अवैध कॉल सेंटर से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. आरोपी धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलकर अमेरिका के लोगों को लोन मंजूर होने का झांसा देते थे और उनसे प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 150 से 200 डॉलर तक वसूलते थे. पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इस तरह की ठगी का तरीका वेब सीरीज देखकर सीखा था और पिछले दो महीनों से इस फर्जी कारोबार को चला रहे थे.

गुप्त सूचना पर पुलिस ने मारा छापा
एलसीबी जोन-2 की टीम को सूचना मिली थी कि अकोटा क्षेत्र के प्रधानजी की चाल स्थित बेरील अपार्टमेंट में अवैध रूप से इंटरनेशनल कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है. इसके बाद पुलिस ने फ्लैट नंबर 101 पर छापा मारा. जांच के दौरान पता चला कि करण लोकवानी अपने साथियों के साथ बिना किसी लाइसेंस या वैधानिक अनुमति के विदेशी नागरिकों को कॉल कर रहा था. आरोपी खुद को वित्तीय सेवा कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे और उन्हें लोन स्वीकृत होने की जानकारी देकर जाल में फंसाते थे.

डेबिट कार्ड की जानकारी लेकर वसूलते थे डॉलर
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर बताते थे कि उनका लोन "सिटी क्रेडिट्स" के माध्यम से मंजूर हो गया है. इसके बाद प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर पीड़ितों से डेबिट कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट और सीवीवी जैसी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे. आरोपी प्रत्येक व्यक्ति से 150 से 200 डॉलर तक की राशि वसूलते थे. पुलिस को आशंका है कि इस तरीके से कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है.

35 लाख रुपये का सामान जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कॉल सेंटर में इस्तेमाल होने वाले 7 मोबाइल फोन, 8 लैपटॉप, एक फाइबर वाई-फाई राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं. बरामद सामग्री और नकदी की कुल कीमत करीब 35 लाख रुपये बताई जा रही है.

दो मास्टरमाइंड, दो को दिया था प्रशिक्षण
डीसीपी जोन-2 मंजिता वंजारा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में एक शेयर बाजार विशेषज्ञ है, जबकि दूसरा पहले कॉल सेंटर में काम कर चुका है. अन्य दो युवक कॉलिंग एक्सपर्ट हैं और अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ रखते हैं. पुलिस के मुताबिक करण लोकवानी और जोनाथन दास इस पूरे रैकेट के मुख्य साजिशकर्ता हैं. दोनों ने अपने साथियों को प्रशिक्षण देकर इस फर्जी कॉल सेंटर में काम पर लगाया था. आरोपी डार्क वेब से विदेशी नागरिकों के संपर्क नंबर हासिल करते थे और उन्हें कॉल कर ठगी को अंजाम देते थे.

कितने लोग बने शिकार, जांच जारी
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी से कितनी रकम जुटाई. चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है.

-ब्रिजेश दोषी की रिपोर्ट

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