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तरबूज और मैगी बना जान का जंजाल, एक ही गांव के नौ लोग पड़े बीमार, कैसे पहचाने कि फल असली है या केमिकल युक्त

मैगी और तरबूज खाना एक गांव के लिए इतना खतरनाक हो जाएगा कि किसी ने सोचा भी नहीं था. एक ही गांव के 9 लोग बीमार हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भरती करवाना पड़ा.

पीड़िता पीड़िता

संक्रामक रोगों के मौसम के बीच उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. गोरखपुर के एक गांव में एक ही परिवार के 9 लोगों की तबीयत तरबूज और मैगी खाने के बाद अचानक बिगड़ गई. सभी को उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. फिलहाल सभी का इलाज चल रहा है और डॉक्टरों की निगरानी में उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

तरबूज खाने के डेढ़ घंटे बाद खाई थी मैगी
जानकारी के मुताबिक, यह मामला गोरखपुर के बेलीपार ब्लॉक के मलांव गांव का है. परिवार की एक महिला ने बताया कि उसने बुधवार शाम करीब 4 बजे तरबूज खाया था. इसके करीब डेढ़ घंटे बाद मैगी खाई गई, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. उसे उल्टी-दस्त की शिकायत हुई और धीरे-धीरे परिवार के अन्य सदस्य भी बीमार पड़ने लगे. परिवार के सभी लोगों को पहले गांव के पास स्थित अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ. इसके बाद उन्हें गुरुवार 14 मई की रात गोरखपुर जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया.

बुजुर्ग से लेकर बच्ची तक हुए बीमार
बीमार होने वालों में 70 साल के बुजुर्ग से लेकर 8 साल की बच्ची तक शामिल है. हालांकि इलाज के बाद एक बच्ची की हालत में सुधार होने पर उसे घर भेज दिया गया, जबकि बाकी लोगों का अस्पताल में इलाज जारी है. परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उनके बुजुर्ग नाना ने भी पहले तरबूज खाया था और बाद में मैगी खाई थी. इसके कुछ समय बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी. उन्होंने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि बीमारी की वजह तरबूज है या मैगी, क्योंकि जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा खुलासा
गोरखपुर जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीके सुमन ने बताया कि मलांव गांव के नौ लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया है. फिलहाल सभी की हालत स्थिर है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है. उन्होंने बताया कि इन लोगों ने पहले तरबूज और बाद में मैगी का सेवन किया था, लेकिन बीमारी की असली वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी.

लोगों को दी गई सावधानी बरतने की सलाह
डॉ. सुमन ने कहा कि गर्मी और संक्रामक रोगों के मौसम में तरबूज को जल्दी पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले हानिकारक केमिकल या एक्सपायरी पैकेट बंद खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं. ऐसे में लोगों को फल और पैक्ड सामान हमेशा विश्वसनीय जगह से खरीदना चाहिए और खरीदते समय एक्सपायरी डेट जरूर जांचनी चाहिए. साथ ही, खानपान को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है.

क्या गर्मियों में बिकने वाला तरबूज केमिकल से पकाया जा रहा है? जिसके कारण लोगों की तबीयत बिगाड़ने लगी है? ये हर गर्मियों में उठना वाला सबसे बड़ा सवाल है. 

1. क्या पानी में रंग छोड़ता है केमिकल वाला तरबूज?
अगर आपको शक है कि तरबूज में रंग मिलाया गया है, तो घर पर एक आसान तरीका अपनाया जा सकता है. तरबूज का छोटा सा टुकड़ा साफ पानी में डालिए. अगर कुछ देर बाद पानी गुलाबी या लाल होने लगे, तो समझिए मामला गड़बड़ हो सकता है. आमतौर पर असली तरबूज अपना रंग पानी में नहीं छोड़ता.

2. क्या हाथों पर केमिकल वाले तरबूज का रंग लग सकता है?
जी हां, इसके लिए एक साफ कॉटन या रुई लें और तरबूज के लाल हिस्से पर रगड़ें.अगर रुई पर लाल या गुलाबी रंग लग जाए, तो माना जाता है कि तरबूज को ऊपर से रंग देकर ज्यादा लाल दिखाने की कोशिश की गई हो सकती है. साफ और प्राकृतिक पके तरबूज में ऐसा नहीं होता.

3. क्या केमिकल वाला तरबूज देखने में अलग लगता है?
कई बार मिलावटी तरबूज जरूरत से ज्यादा चमकदार और हद से ज्यादा लाल दिखाई दे सकता है. असली तरबूज में रंग थोड़ा कम लाल दिख सकता है. बीजों के पास अलग शेड या रेसे जैसी बनावट भी नजर आती है .हर चीज अगर जरूरत से ज्यादा चमकीली लगे, तो थोड़ा सतर्क रहना बेहतर है.

4. क्या खुशबू से भी मिलावट का अंदाजा लगाया जा सकता है?
तरबूज काटने के बाद उसकी महक पर ध्यान दें. ताजा और अच्छा तरबूज मीठी खुशबू देता है, जिससे फ्रेशनेस महसूस होती है. वहीं अगर कोई अजीब सी गंध आए या बिल्कुल खुशबू ही न हो, तो यह संकेत हो सकता है कि फल प्राकृतिक तरीके से पका हुआ नहीं है.

5. क्या स्वाद बता सकता है कि तरबूज सही है या नहीं?
असली तरबूज का स्वाद मीठा, रसदार और फ्रेश होता है. लेकिन अगर स्वाद जरूरत से ज्यादा मीठा, अजीब या नकली लगे, तो सावधान हो जाइए.कई बार मिठास बढ़ाने के लिए भी केमिकल मिलाया जाता है. जो सेहत के लिए ठीक नहीं मानी जाती.

(रिपोर्ट- गजेंद्र त्रिपाठी)

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