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3 पौधों से शुरू हुई कहानी... अब छत पर बसता है मिनी जंगल, 100 तरह की चिड़ियां और 25 प्रजाति की तितलियां लगाने लगीं डेरा

अमन की छत पर आज 500 से ज्यादा देशी पौधे लगे हैं. इन पौधों का चुनाव सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच के आधार पर किया गया है. उन्होंने ऐसे पौधे लगाए जो पक्षियों को भोजन, तितलियों को आकर्षित करने वाले फूल और छोटे जीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करते हैं.

 Rooftop Forest Rooftop Forest

दिल्ली को अक्सर कंक्रीट का जंगल कहा जाता है. ऊंची-ऊंची इमारतों और भागती जिंदगी के बीच हरियाली लगातार कम होती जा रही है. ऐसे माहौल में अगर किसी घर की छत पर सुबह पक्षियों की चहचहाहट सुनाई दे, रंग-बिरंगी तितलियां उड़ती नजर आएं और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली हो, तो यह किसी सपने जैसा लगता है. लेकिन दिल्ली के 23 वर्षीय अमन शर्मा ने इस सपने को सच कर दिखाया है. उन्होंने अपनी छत को ऐसा प्राकृतिक ठिकाना बना दिया है, जहां अब 100 से ज्यादा पक्षियों और 25 तरह की तितलियों की आवाजाही रहती है.

कोविड में सूझा आइडिया, तीन पौधों से हुई शुरुआत
दिल्ली के वसंत विहार में रहने वाले अमन शर्मा बचपन से ही पक्षियों और वन्यजीवों के शौकीन रहे हैं. छुट्टियों में उनके माता-पिता उन्हें राष्ट्रीय उद्यानों और पक्षी अभयारण्यों में घुमाने ले जाते थे. कोविड के दौरान जब यात्रा पूरी तरह बंद हो गई, तो उन्होंने सोचा कि अगर वह जंगल नहीं जा सकते, तो जंगल को अपने घर क्यों न ले आएं. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी छत पर सिर्फ तीन पौधे लगाए. आज वही कोशिश 1500 वर्गफुट की छत पर फैले मिनी जंगल में बदल चुकी है.

500 देसी पौधों ने बनाया पूरा इकोसिस्टम
अमन की छत पर आज 500 से ज्यादा देसी पौधे लगे हैं. इन पौधों का चुनाव सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच के आधार पर किया गया है. उन्होंने ऐसे पौधे लगाए जो पक्षियों को भोजन, तितलियों को आकर्षित करने वाले फूल और छोटे जीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करते हैं. इसी वजह से उनकी छत अब 100 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों और करीब 25 तरह की तितलियों का ठिकाना बन गई है.

14 साल की उम्र में बनाया था नेचर क्लब
अमन का प्रकृति प्रेम बचपन से ही दिखने लगा था. 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी बालकनी से बर्ड वॉचिंग शुरू कर दी थी. सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने अपने दोस्तों के साथ 'कुकू अबाउट नेचर क्लब' की शुरुआत की. यह युवाओं द्वारा युवाओं के लिए बनाया गया बर्डिंग क्लब है, जो लोगों को प्रकृति और पक्षियों के प्रति जागरूक करता है.

अमेरिका से पढ़ाई, लेकिन लौट आए भारत
अमन ने अमेरिका से एनवायरमेंटल साइंस में पढ़ाई की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक साल नौकरी भी की, लेकिन उनका सपना कुछ और था. इसलिए वह भारत लौट आए. उनका लक्ष्य भारत को वाइल्डलाइफ टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनाने का है. उनका मानना है कि भारत की जैव विविधता दुनिया में सबसे खास है और इसे सही तरीके से दुनिया के सामने लाने की जरूरत है.

घर से शुरू करें हरियाली
अमन का कहना है कि हर किसी के पास बड़ा बगीचा होना जरूरी नहीं है. अगर लोग अपनी छत, बालकनी या घर के आसपास देशी, फलदार और फूलदार पौधे लगाएं, तो शहरों में भी पक्षियों और तितलियों के लिए सुरक्षित जगह बनाई जा सकती है. उनका मानना है कि पर्यावरण बचाने की शुरुआत किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि अपने घर से होनी चाहिए.

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