Ghaziabad Jail Rakhi story
Ghaziabad Jail Rakhi story
रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्यार का त्योहार नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में भरोसे और अपनापन का भी प्रतीक है. इस बार गाजियाबाद से रक्षाबंधन की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इस त्योहार को एक अलग मायने दे रही है. गाजियाबाद की जेल में बंद कैदियों ने अपने हाथों से हजारों राखियां तैयार की हैं. इन राखियों से करीब 15 हजार बहनें रक्षाबंधन पर अपने भाइयों की कलाई सजाएंगी.
कैदियों ने अपने हाथों से तैयार की राखियां
गाजियाबाद जेल में कैदी रक्षाबंधन को लेकर राखियां तैयार करने में जुटे हुए हैं. राखी बनाने से लेकर उसकी सजावट और अंतिम रूप देने तक का काम कैदी खुद कर रहे हैं. इसके लिए उन्हें जरूरी सामग्री और काम करने का मौका दिया गया है. कैदी पूरे मन और मेहनत के साथ इन राखियों को तैयार कर रहे हैं. इन राखियों की खास बात यह है कि इन्हें बनाने वाले वे लोग हैं, जो फिलहाल जेल में अपनी सजा काट रहे हैं. जेल की चारदीवारी के भीतर उनके हाथ अब एक ऐसा काम कर रहे हैं, जो हजारों भाई-बहनों के रिश्ते को जोड़ने वाला है.
हुनर सीख कर नई शुरुआत की ओर बढ़ रहे कैदी
जेल प्रशासन की इस पहल का मकसद सिर्फ रक्षाबंधन के लिए राखियां तैयार करवाना नहीं है. इसके जरिए कैदियों को हुनर सीखने और अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करने का मौका भी दिया जा रहा है. ऐसे काम उन्हें जेल से बाहर निकलने के बाद बेहतर जिंदगी की शुरुआत करने में मदद कर सकते हैं.
राखियों के साथ बाहर जाएगा बदलाव का संदेश
कभी जिन हाथों पर अपराध का आरोप लगा था, आज वही हाथ भाई-बहन के प्यार का प्रतीक तैयार कर रहे हैं. गाजियाबाद जेल से तैयार होकर निकलने वाली ये करीब 15 हजार राखियां सिर्फ त्योहार की खुशियां नहीं बांटेंगी, बल्कि समाज को बदलाव और सुधार का संदेश भी देंगी. यह पहल बताती है कि इंसान को उसकी एक गलती से ही नहीं, बल्कि खुद को बदलने की कोशिश से भी देखा जाना चाहिए. सही मौका और दिशा मिले तो वही हाथ समाज के लिए कुछ अच्छा करने का जरिया बन सकते हैं.
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