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Unique Birthday: अनोखा बर्थडे सेलिब्रेशन! बकरियों के जन्मदिन पर 200 लोगों को दावत

उत्तर प्रदेश में हरदोई के गौरा डांडा गांव के रहने वाले लालाराम श्रीवास्तव ने अपनी दो बकरियों का जन्मदिन मनाया. इस दौरान उन्होंने गांव के 200 लोगों को दावत दी. इसके लिए बाकायदा कार्ड भी छपवाए थे. पिछले साल भी उन्होंने अपनी बकरियों को जन्मदिन मनाया था. जिसमें 300 से ज्यादा लोगों को दावत दी थी.

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उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक अनोखा बर्थडे सेलिब्रेट किया गया. इलाके में इस बर्थडे सेलिब्रेशन की खूब चर्चा हो रही है. ये बर्थडे सेलिब्रेशन किसी इंसान का नहीं हुआ, बल्कि बकरियों का हुआ. टड़ियावां थाने के गौरा डांडा गांव के रहने वाले लालाराम श्रीवास्तव ने अपनी दो बकरियों का जन्मदिन मनाया. इसके लिए कार्ड भी छपवाए गए थे. ये कोई छोटा-मोटा आयोजन नहीं था, ये भव्य आयोजन रहा. इसमें 200 से ज्यादा लोगों को दावत दी गई.

2 बकरियों का बर्थडे सेलिब्रेशन-
गौरा डांडा गांव के रहने वाले लालराम पशुपालक हैं. इन दिनों उनकी खूब चर्चा हो रही है. लालाराम ने 14 जनवरी को एक भव्य जन्मदिन समारोह का आयोजन किया. इस बर्थडे सेलिब्रेशन के बारे में सुनकर गांव का हर शख्स हैरान रह गया. लालाराम ने अपनी दो बकरियों का जन्मदिन मनाया. उनकी बकरियों का नाम स्वीटी और मोनिका है. लालाराम ने पिछले साल भी अपनी बकरियों को जन्मदिन मनाया था.

200 लोगों को दावत-
बकरियों के जन्मदिन का कार्यक्रम कोई छोटा-मोटा नहीं था. यह एक भव्य कार्यक्रम था. इसमें गांवभर के लोगों को बुलाया गया था. इसके लिए बाकायदा कार्ड भी छपवाए गए थे. इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान भी कराए गए. रामायण और भागवत पाठ का आयोजन किया गया. बकरियों को नहला-धुलाकर फूलों की मालाएं पहनाई गई. उनको नए कपड़े पहनाए गए.

माहौल तब और रंगीन हो गया, जब डीजे की धुनों पर गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग जमकर थिरके. लालाराम ने इस मौके पर करीब 200 लोगों के लिए शानदार दावत का इंतजाम किया. 

पिछले साल 300 लोगों को दी थी दावत-
खास बात यह है कि पिछले साल भी उन्होंने इसी तरह का जश्न मनाया था और करीब 300 मेहमानों को बुलाया था. इस दौरान उन्होंने 51 कन्याओं को भोज कराया था. ग्रामीणों के लिए यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि लालाराम के अटूट पशु-प्रेम की मिसाल है. लालाराम का कहना है कि स्वीटी और मोनिका उनके परिवार का हिस्सा हैं. आज के दौर में जहां लोग अपनों को भूल जाते हैं, वहीं लालाराम का यह अनोखा कदम समाज को बेजुबानों के प्रति संवेदनशीलता और प्रेम का बड़ा संदेश दे रहा है.

(प्रशांत पाठक की रिपोर्ट)

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