DMK leader
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तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों शब्दों का तापमान गरम है. मंत्रीजी ने जुबान से कुछ ऐसे शब्द निकाल दिए हैं जिससे न केवल महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंची है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी चोट पहुंची है. इसी को देखते हुए मद्रास हाई कोर्ट, ने स्वत: संज्ञान लेते हुए न सिर्फ मामले को उठाया बल्कि पुलिस को कड़ा आदेश दिया. हाई कोर्ट ने कहा, "मंत्री हो या आम नागरिक, नफरत फैलाने वाले भाषण पर कार्रवाई होनी ही चाहिए."
जी हां, बात हो रही है तमिलनाडु के वन मंत्री ए पोनमुडी की, जिन्होंने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से जो बयान दिया, वो न केवल आपत्तिजनक था, बल्कि कानून की कई धाराओं को भी लांघ गया.
क्या बोले पोनमुडी?
A पोनमुडी ने शैव और वैष्णव परंपराओं को लेकर एक वेश्या का उदाहरण देते हुए अपमानजनक टिप्पणी की थी. उन्होंने कथित रूप से नारी गरिमा और धार्मिक विश्वासों पर कटाक्ष करते हुए जो कुछ कहा, उसे लेकर ना सिर्फ विपक्ष भड़का बल्कि खुद उनकी पार्टी डीएमके के भीतर से भी विरोध की आवाजें उठीं.
डीएमके सांसद कनिमोई ने भी मंत्री के बयान की आलोचना की, जिसके बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पोनमुडी को पार्टी के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी पद से हटा दिया.
हाईकोर्ट का सख्त रुख
मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद वेंकटेश ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "कानून सभी के लिए है. जब सरकार दूसरे लोगों के हेट स्पीच को गंभीरता से लेती है, तो मंत्रियों द्वारा की गई नफरत भरी बातें भी उतनी ही गंभीर हैं."
कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि A पोनमुडी के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को तय की गई है.
क्या है ‘हेट स्पीच’ और क्यों है ये खतरनाक?
‘हेट स्पीच’ यानी ऐसा भाषण, जो किसी जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, या समुदाय के खिलाफ नफरत, हिंसा या भेदभाव को बढ़ावा देता हो. भारत में अब तक हेट स्पीच के लिए कोई स्पष्ट रूप से परिभाषित कानून नहीं है, लेकिन IPC की कई धाराएं इस पर लागू की जा सकती हैं. हेट स्पीच को लेकर लॉ कमीशन, सुप्रीम कोर्ट और संविधान विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि अगर समय रहते कड़ा एक्शन न लिया गया, तो समाज में वैमनस्य फैल सकता है.
FIR दर्ज होगी तो किन धाराओं में?
पोनमुडी के बयान को भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत हेट स्पीच (Hate Speech) की श्रेणी में माना जा सकता है. जानिए वो धाराएं जो इस पर लागू हो सकती हैं:
AIADMK का विरोध, "माफी से कुछ नहीं होगा!"
AIADMK की महिला विंग की नेता गायत्री रघुराम ने पोनमुडी को मंत्री पद से हटाने की मांग करते हुए कहा, "माफी देना उनकी आदत बन चुकी है. डीएमके का डीएनए ही ऐसा है. जब अम्मा (जयललिता) सीएम बनी थीं, तब भी इन्हें अपमान करने में शर्म नहीं आई थी. अब सिर्फ पार्टी पद से हटाना काफी नहीं, मंत्री पद से भी बर्खास्त किया जाए."
गायत्री रघुराम के इस बयान ने मामले में और भी सियासी गर्मी भर दी है. विपक्ष इसे महिलाओं के अपमान का मामला बता रहा है, वहीं डीएमके इस मुद्दे को पार्टी स्तर पर सुलझा देने की कोशिश कर रही है.
पोनमुडी ने क्या कहा अपनी सफाई में?
अपने माफीनामे में पोनमुडी ने कहा, "मैंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह अनुचित था. मुझे तुरंत ही इसका पछतावा हुआ. सार्वजनिक जीवन में रहते हुए ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए थी. मैं उन सभी से माफी मांगता हूं जिनकी भावनाएं आहत हुईं." लेकिन कोर्ट के सामने ये माफी नहीं, जवाबदेही मायने रखती है.
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