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14 साल के बच्चे ने बनाया टच फ्री पोर्टेबल ऑटोमेटिक हैंड सैनिटइजर, बिना हाथ लगाए कर सकेंगे इस्तेमाल

कोरोना वायरस महामारी के दौरान सभी के साथ यह समस्या हो गई थी कि उन्हें मास्क और सेनिटाइजर हर समय अपने पास रखना होता था. ऐसे में कई नई कंपनी जो हैंड सैनिटाइजर नहीं भी बनाती थीं उन्होंने इसका उत्पादन शुरू कर दिया. वहीं अभिज्ञान ने इससे एक और कदम आगे जाते हुए एक नया ही अविष्कार कर डाला.

Abhigyan Das Abhigyan Das
हाइलाइट्स
  • वैज्ञानिक संस्थान में रिसर्च करना चाहते हैं अभिज्ञान

  • 14 साल के बच्चे ने बनाया टच फ्री सैनिटाइजर 

हिंदी में एक कहावत है -  "होनहार बिरवान के होत चिकने पात " यानी विरल प्रतिभा के धनी जो लोग होते हैं , उसकी झलक उनके बचपन से ही देखने को मिलती है . ऐसा ही एक विरल कारनामा कर दिखाया है मात्र 14 वर्ष अभिज्ञान  किशोर दास ने. अभिज्ञान हुगली कॉलेजिएट स्कूल में कक्षा नौ के छात्र हैं.
 
14 साल के बच्चे ने बनाया टच फ्री सैनिटाइजर 
कोरोना वायरस महामारी के दौरान सभी के साथ यह समस्या हो गई थी कि उन्हें मास्क और सेनिटाइजर हर समय अपने पास रखना होता था. ऐसे में कई नई कंपनी जो हैंड सैनिटाइजर नहीं भी बनाती थीं उन्होंने इसका उत्पादन शुरू कर दिया. वहीं अभिज्ञान ने इससे एक और कदम आगे जाते हुए एक नया ही अविष्कार कर डाला.अभियान ने एक " टच फ्री पोर्टेबल ऑटोमेटिक हैंड सैनिटाइजर सिस्टम " तैयार किया है, जिसने देश और दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं. यह टच फ्री पोर्टेबल ऑटोमेटिक हैंड सैनिटइजर सिस्टम पूरी तरह से यूजर फ्रेंडली है.

अभिज्ञान के पास है अपनी खोज का पेटेंट राइट
यह साथ में किसी भी स्थान पर ले जाने के लिए उपर्युक्त सैनिटाइजर सिस्टम है. ऑटोमेटिक होने के कारण इसको ऑपरेट करने के लिए हमें किसी भी तरीके से टच करने की कोई जरूरत नहीं होती है.इसके उपयोग से महामारी कोरोना के प्रतिरोध में काफी मदद मिलेगी.  बाकायदा भारत सरकार ने इस नन्हें वैज्ञानिक के अभूतपूर्व अविष्कार के लिए पेटेंट राइट भी प्रदान किया है. 

अभिज्ञान का नाम ही अपने आप में यह दर्शाता है कि अभिज्ञान के साथ विज्ञान का चोली दामन का रिश्ता है . अपनी प्रतिभा का लोहा अभिज्ञान ने बचपन से देश और दुनिया को मनवाया है.

वैज्ञानिक संस्थान में रिसर्च करना चाहते हैं अभिज्ञान
इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में प्रथम स्थान प्राप्त करके अभिज्ञान ने पहली बार अपनी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जोरदार रूप से प्रस्तुत किया.  इससे पहले अभिज्ञान ने वायुप्रदूषण को रोकने के लिए जीरो वायुप्रदूषण एक विरल जंत्र का आविष्कार करके सभी को चौंका दिया था. अभिज्ञान की सफलता पर उनके परिवार, आस पड़ोस के लोग फूले नहीं समा रहे हैं. अभिज्ञान  के माता-पिता को अपने बेटे की सफलता पर गर्व है. उन्हें दृढ़ विश्वास है कि अभिज्ञान आगे चलकर अपने आविष्कारों से हुगली बंगाल और भारत का नाम पूरे दुनिया में रोशन करेगा.

अभिज्ञान की मां प्रियंका दास ने कहा कि वो चाहती हैं कि उनका बेटा देश और समाज की तरक्की के लिए काम करें. दूसरी तरफ अभिज्ञान किशोर दास ने बताया कि विज्ञान पर रिसर्च करने के अलावा अभिज्ञान अपनी पढ़ाई पूरी करके देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक संस्थान में रिसर्च करना चाहते हैं.

(हुगली से भोलानाथ शाहा की रिपोर्ट)