scorecardresearch

दिल्ली के स्मॉग में एयर प्यूरीफायर कितना कारगर? प्यूरीफायर कमरे की हवा कैसे साफ करता है? खरीदते समय कीमत नहीं, इन फीचर्स पर दें ध्यान

जब बाहर प्रदूषण ज्यादा हो, तब खिड़की-दरवाजे बंद रखें. लेकिन जब बाहर की हवा अपेक्षाकृत साफ हो, तो उचित वेंटिलेशन के लिए खिड़कियां खोल सकते हैं. सफाई करते समय सूखी झाड़ू के बजाय गीले कपड़े या पोछे का इस्तेमाल करें, ताकि धूल दोबारा हवा में न उड़े.

Advertisement
Air Purifiers Air Purifiers
हाइलाइट्स
  • कमरे की हवा कैसे साफ करता है एयर प्यूरीफायर

  • खरीदने से पहले जानें जरूरी बातें

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियां शुरू होते ही हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगती है. सुबह घर से निकलते समय धुंध की मोटी परत दिखती है, आंखों में जलन होती है और सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है. ऐसे में कई लोग घर के अंदर की हवा साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर खरीदते हैं. लेकिन क्या कमरे में एक मशीन चलाने से प्रदूषण से पूरी तरह बचा जा सकता है? इसका जवाब है- नहीं, लेकिन सही एयर प्यूरीफायर घर के अंदर मौजूद प्रदूषण के महीन कणों को काफी हद तक कम कर सकता है. इसके लिए यह समझना जरूरी है कि मशीन कैसे काम करती है, कमरे के हिसाब से कौन-सा मॉडल चुनना चाहिए और खरीदते समय किन फीचर्स पर ध्यान देना चाहिए.

एयर प्यूरीफायर कमरे की हवा कैसे साफ करता है?
एयर प्यूरीफायर में एक पंखा लगा होता है, जो कमरे की हवा को मशीन के अंदर खींचता है. यह हवा अलग-अलग फिल्टर से होकर गुजरती है. फिल्टर हवा में मौजूद धूल, धुएं और प्रदूषण के महीन कणों को रोक लेते हैं. इसके बाद मशीन साफ की गई हवा को वापस कमरे में छोड़ देती है.

यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, जिससे कमरे में हवा में तैर रहे प्रदूषक कणों की मात्रा कम हो सकती है. हालांकि, मशीन बाहर से आने वाले प्रदूषण को पूरी तरह रोक नहीं सकती. अगर खिड़कियां खुली हैं या घर में धुआं पैदा हो रहा है, तो हवा दोबारा प्रदूषित हो सकती है.

दिल्ली के स्मॉग में कितना कारगर है एयर प्यूरीफायर?
दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में PM2.5 और PM10 जैसे महीन कण बड़ी परेशानी हैं. PM2.5 इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं. सही क्षमता वाला एयर प्यूरीफायर, जिसमें अच्छी गुणवत्ता का HEPA फिल्टर हो, कमरे में इन कणों की मात्रा कम करने में मदद कर सकता है. लेकिन इसका फायदा तभी मिलेगा, जब मशीन कमरे के आकार के मुताबिक हो, सही तरीके से चलाई जाए और उसके फिल्टर समय पर बदले जाएं. एयर प्यूरीफायर बाहर की हवा को साफ नहीं करता और न ही प्रदूषण के हर सोर्स को खत्म करता है. इसलिए इसे प्रदूषण से बचाव का एक उपाय समझें, पूरा समाधान नहीं.

Air Purifiers

हर फिल्टर एक ही तरह के प्रदूषक को नहीं हटाता. इसलिए मशीन खरीदने से पहले फिल्टर का काम समझना जरूरी है.

1. HEPA फिल्टर: यह हवा में मौजूद धूल, परागकण, धुएं के महीन कण और पालतू जानवरों की रूसी जैसे प्रदूषकों को पकड़ने में मदद करता है. अच्छी गुणवत्ता वाला HEPA फिल्टर 0.3 माइक्रोन आकार के कम से कम 99.97% कणों को तय परीक्षण परिस्थितियों में रोक सकता है. यह आंकड़ा हर तरह के फिल्टर या हर प्रदूषक पर लागू नहीं होता.

2. एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर: यह खाना पकाने की गंध, धुएं और कुछ गैसों व वाष्पशील रसायनों को कम करने में मदद करता है. इसकी क्षमता कार्बन की मात्रा और गुणवत्ता पर निर्भर करती है.

3. प्री-फिल्टर: यह बड़े धूलकण, बाल और रोएं रोकता है. इससे मुख्य फिल्टर पर गंदगी का बोझ कम होता है. इसे नियमित साफ करना जरूरी है.

4. UV तकनीक: कुछ मशीनों में पराबैंगनी रोशनी का इस्तेमाल सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है. लेकिन UV होने का मतलब यह नहीं कि मशीन कमरे की पूरी हवा को संक्रमण-मुक्त कर देगी.

5. आयोनाइजर: यह हवा में मौजूद कणों को चार्ज करके उन्हें सतहों पर जमाने में मदद कर सकता है. कुछ आयोनाइजर ओजोन भी पैदा कर सकते हैं, जो सांस के लिए हानिकारक है. इसलिए ओजोन बनाने वाली मशीनों से बचना बेहतर है.

एयर प्यूरीफायर खरीदते समय इन 5 फीचर्स पर दें ध्यान

सिर्फ मशीन की कीमत या उसके लुक को देखकर खरीदारी न करें. सबसे जरूरी है कि वह आपके कमरे की हवा साफ करने के लिए पर्याप्त क्षमता रखती हो.

1. CADR रेटिंग जरूर देखें: CADR यानी क्लीन एयर डिलीवरी रेट बताती है कि मशीन कितनी तेजी से साफ हवा दे सकती है. आम तौर पर CADR जितनी ज्यादा होगी, मशीन उतनी तेजी से हवा साफ कर सकती है. कमरे के आकार के हिसाब से सही रेटिंग चुनें.

2. कमरे का आकार चेक करें: छोटे कमरे के लिए बनी मशीन बड़े हॉल में उतनी कारगर नहीं होगी. निर्माता ने जिस कमरे के आकार के लिए मशीन की क्षमता बताई है, उसे जरूर जांचें. दिल्ली के प्रदूषण के दौरान जरूरत से छोटी मशीन खरीदने से बचें.

3. फिल्टर की गुणवत्ता देखें: PM2.5 जैसे महीन कणों को कम करने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला HEPA फिल्टर उपयोगी है. कार्बन फिल्टर भी हो तो गंध और कुछ गैसों को कम करने में मदद मिल सकती है.

4. फिल्टर बदलने का खर्च जानें: मशीन खरीदने से पहले पता करें कि उसके नए फिल्टर की कीमत कितनी है और कितने समय बाद उसे बदलना होगा. प्रदूषण वाले मौसम में फिल्टर जल्दी गंदा हो सकता है. फिल्टर बदलने का खर्च भी कुल बजट में शामिल करें.

5. शोर और बिजली की खपत पर ध्यान दें: मशीन को लंबे समय तक चलाना पड़ सकता है. इसलिए देखें कि कम गति पर उसका शोर कितना है और बिजली की खपत कितनी होती है. रात में इस्तेमाल करना है तो स्लीप मोड वाला मॉडल सुविधाजनक हो सकता है.

घर के अंदर प्रदूषण कम करने के लिए क्या करें?
एयर प्यूरीफायर के साथ घर में प्रदूषण के स्रोतों को कम करना भी जरूरी है. खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन या बाहर हवा निकालने की उचित व्यवस्था का इस्तेमाल करें. घर के अंदर लकड़ी, कोयला या अन्य ईंधन जलाने से बचें.

जब बाहर प्रदूषण ज्यादा हो, तब खिड़की-दरवाजे बंद रखें. लेकिन जब बाहर की हवा अपेक्षाकृत साफ हो, तो उचित वेंटिलेशन के लिए खिड़कियां खोल सकते हैं. सफाई करते समय सूखी झाड़ू के बजाय गीले कपड़े या पोछे का इस्तेमाल करें, ताकि धूल दोबारा हवा में न उड़े.

तेज खुशबू वाले स्प्रे, अगरबत्ती, सिगरेट का धुआं और कुछ सफाई उत्पाद भी घर के अंदर की हवा को खराब कर सकते हैं. इनका इस्तेमाल सीमित रखें. एयर प्यूरीफायर को दीवार या पर्दों से चिपकाकर न रखें, ताकि हवा आने-जाने में रुकावट न हो.

ये भी पढ़ें: