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कोई फिल्मी हीरो नहीं 'रॉ एजेंट'.. साधारण जिंदगी के पीछे का गहरा सच.. जानें कैसे कोई बनता जासूस, कैसे कर सकते हैं आवेदन?

जैसा फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है, एक रॉ एजेंट वैसा बिलकुल नहीं होता. वो तो वह होता है, जो समाज में रह कर भी एक अलग दुनिया का हिस्सा होता है. लेकिन कैसे कोई एजेंट बन सकता है.

How RAW recruits its spies: Did Dhurandhar get it right? (File Image) How RAW recruits its spies: Did Dhurandhar get it right? (File Image)

पॉप-कल्चर और फिल्मों ने जासूसी की दुनिया को बेहद ग्लैमरस और रोमांचक बना दिया है. 'धुरंधर' जैसे ट्रेंड्स ने इस इमेज को और मजबूत किया है. लेकिन असल जिंदगी में जासूसी की दुनिया कहीं ज्यादा मुश्किल, मानसिक रूप से कठिन और कई बार बेहद साधारण दिखने वाली होती है. इसमें न कोई फिल्मी डायलॉग होते हैं और न ही हर वक्त एक्शन, बल्कि यह दुनिया चुप्पी वाली होती है.

रॉ क्या है और क्या करता है?
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) भारत की प्बाहरी खुफिया एजेंसी है, जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के अंडर काम करती है. इसका काम देश के बाहर से आने वाले खतरों पर नजर रखना और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर नज़र रखना रहता है. चाहे सीमा पार आतंकवाद हो या वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरण, RAW हर स्तर पर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भूमिका निभाता है. इसके एजेंट अक्सर आम जिंदगी जीते हुए, गुप्त रूप से देश की सेवा करते हैं.

क्या आप रॉ में शामिल हो सकते हैं?
RAW में शामिल होने का कोई सीधा रास्ता नहीं है. यहां न तो कोई जॉब पोर्टल है और न ही एप्लीकेशन विंडो. आमतौर पर एजेंसी खुद ही उन लोगों को चुनती है. यह चुनाव उनकी पिछली सरकारी सेवाओं, प्रदर्शन के आधार पर होता है. सीधा कहें तो, आप RAW को नहीं ढूंढते, RAW आपको ढूंढता है.

एजेंट बनने के लिए जरूरी स्किल्स
RAW के लिए कुछ रिक्वायमेंट होते हैं. उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है और आमतौर पर उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच होती है. किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, अंतरराष्ट्रीय संबंध, कानून, इंजीनियरिंग या विदेशी भाषाओं जैसे विषयों में. 

शारीरिक और मानसिक फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह काम तनाव वाली स्थिति में भी बैलेंस बनाए रखने का है. इसके अलावा, साफ-सुथरा रिकॉर्ड और मजबूत नैतिकता बेहद जरूरी है. विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी काफी जरूरी होता है.

रॉ की चयन प्रक्रिया
RAW की चयन प्रक्रिया किसी नॉर्मल इंटरव्यू की तरह नहीं होती. यह पूरी तरह मनोवैज्ञानिक होती है.उम्मीदवारों से अजीब सवाल पूछे जाते हैं,  गुस्से पर नियंत्रण, निजी जीवन के फैसले या रोजमर्रा की पसंद. न सवालों का मकसद सही जवाब पाना नहीं बल्कि आपकी सोच औऱ व्यवहार  को समझना होता है. अगर आपके जवाबों में कुछ अजीब दिखता है, तो यह तुरंत नोटिस किया जाता है.

रॉ तक पहुंचने का रास्ता
RAW तक पहुंचने का सबसे आम रास्ता भारतीय सेना, पैरामिलिट्री फोर्स या इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी एजेंसियों के जरिए होता है. इन संस्थाओं में काम करते हुए कुछ चुनिंदा लोगों को उनकी क्षमता के आधार पर आगे के लिए चुना जाता है. सीधे तौर पर RAW में प्रवेश बेहद अजीब होता है और इसकी प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रहती है.

अगर फिल्मों की चमक-धमक को हटा दिया जाए, तो जासूसी की दुनिया एक ऐसा सिस्टम है जो अजीब स्थिति में भी व्यक्ति की स्थिरता और भरोसे को परखती है. यहां कोई दिखावा नहीं, सिर्फ धैर्य, अनुशासन और निरंतर निगरानी होती है. असली हीरो वही है, जो बिना पहचाने, चुपचाप अपना काम करता रहता है.