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चीन की अब खैर नहीं ! 2022 की शुरुआत तक दो S-400 डिफेंस सिस्टम तैनात करेगा भारत

एस-400 (S-400) को दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है. भारत ने इस मिसाइल सिस्टम को खरीदने के लिए रूस को साल 2019 में 80 करोड़ डॉलर की पहली किस्त का भुगतान किया था.

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम. एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम.
हाइलाइट्स
  • एस-400 दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम

  • जल्द ही लद्दाख और अरुणाचल एलएसी पर होंगे तैनात

रूस (Russia) ने घातक एस-400 ट्रायम्फ सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम (S-400 Triumf surface-to-air missile systems) को भारत पहुंचाना शुरू कर दिया है. 2022 की शुरुआत में भारत में दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम शुरू हो जाएंगे क्योंकि दो रूसी प्रशिक्षित टीमें काम के लिए तैयार हैं. भारतीय सिस्टम लद्दाख और अरुणाचल एलएसी (LAC) में चीनी एस-400 की तैनाती के बाद होने वाले नुकसान का सामना करेगा. 

एस-400 को दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है. भारत ने इस मिसाइल सिस्टम को खरीदने के लिए रूस को साल 2019 में 80 करोड़ डॉलर की पहली किस्त का भुगतान किया था. देश इसे लेकर तैयारियों में जुटा हुआ है, इसी कड़ी में करीब 100 भारतीय सैनिक इस महीने एस-400 के ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए रूस रवाना होंगे. 

मिसाइल को दुश्मन की ही टेरिटरी में कर देता है खत्म 

एस-400 देश की तरफ आ रही मिसाइल को दुश्मन की ही टेरिटरी में खत्म करने का माद्दा रखता है. भारत की बात करें तो हमारे पास S-400 ऑपरेट करने के लिए इंडियन आर्म्ड फोर्स (Indian Armed Forces) की पर्याप्त संख्या है. इसे दिल्ली, पंजाब, नॉर्थ ईस्ट, राजस्थान, गुजरात और साउथ में तैनात किया जाएगा. पड़ोसी देशों से निपटने में ये भारतीय सेना की मदद करेगा.

लद्दाख-अरुणाचल एलएसी पर तैनात होंगे S-400

मॉस्को स्थित राजनयिकों के अनुसार, अगले महीने से एस-400 सिस्टम के एडवांस एलिमेंट भारत में दोनों प्रणालियों के गहरे पैठ वाले राडार (क्रम में) के साथ आने शुरू हो गए हैं. लद्दाख और अरुणाचल एलएसी में एक ही रूसी प्रणाली की चीनी तैनाती से मेल खाने के लिए 2022 की शुरुआत तक दो एस -400 सिस्टम चालू हो जाएंगे. रूस में प्रशिक्षित दो भारतीय सैन्य दल एस-400 प्रणाली को संचालित करने के लिए तैयार हैं, जिसकी पहुंच दुश्मन के इलाके में करीब 400 किलोमीटर तक है. 

जल्द होगी व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात 

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बहुत करीबी रिश्ते के कारण भारत को कम समय में दो एस-400 कॉम्प्लेक्स मिल पाए हैं. यही कारण है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल 6 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले हैं. रूस को 16 जून को जिनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात करनी थी. उन्होंने इस साल जून में केवल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आभासी शिखर सम्मेलन किया है और भारत के साथ दोनों देशों के वार्षिक शिखर सम्मेलन के प्रारूप के बावजूद बीजिंग की यात्रा नहीं करेंगे.

भारतीय धरती पर S-400 सिस्टम को शामिल करने के साथ, मोदी सरकार के पास सबसे खराब स्थिति में चीनी मिसाइलों और वायु सेना का जवाब है. चूंकि एक सिस्टम उत्तर में तैनात किया जाएगा, यह लद्दाख में दो मोर्चों का ख्याल रखेगा क्योंकि एस-400 के गहरे पैठ वाले रडार भारत को लक्षित करने वाले किसी भी लड़ाकू या मिसाइल को लेने में सक्षम होंगे. 

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