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खामोशी नहीं, विचारों से मजबूत होते लोकतंत्र और न्यूजरूम: कली पुरी

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के समापन सत्र में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने दुनिया के मौजूदा उथल-पुथल भरे दौर पर बात की. उन्होंने चेतावनी दी कि वर्ल्ड ऑर्डर भरभराकर गिर रहा है, क्योंकि युद्ध, बदलते अलायंस और ताकतवर लीडर वैश्विक राजनीति को नया रूप दे रहे हैं.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने वोट ऑफ थैंक्स दिया इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने वोट ऑफ थैंक्स दिया

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के दूसरे दिन दुनिया भर की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत किया. शनिवार 14 मार्च को दूसरे दिन के सेशन में इजरायल, ईरान के राजदूतों ने पश्चिम एशिया की जंग पर अपने अपने पक्ष को इंडिया टुडे के मंच पर पेश किया. वहीं T-20 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा भी इस मंच पर आए और बिग विक्ट्री की यादें शेयर कीं. कार्यक्रम के आखिर में सदाबहार ऑइकन एक्टर अक्षय कुमार ने सिने जगत पर खुलकर बात की.

कार्यक्रम के समापन में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने वोट ऑफ थैंक्स दिया. 

Kalli Purie, Vice Chairperson and Executive Editor-in-Chief, India Today Group
Kalli Purie, Vice Chairperson and Executive Editor-in-Chief, India Today Group

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के समापन सत्र में कली पुरी का पूरा भाषण

गुड इवनिंग 

पिछले साल मैं जब यहां थी और मैंने एक ऐसी दुनिया की बात की थी जो निरंतर बदलाव और लचीलेपन के दौर से गुजर रही थी. आज शाम, ऐसा महसूस होता है कि वही बदलाव और लचीलापन अब कहीं ज़्यादा बड़े पैमाने पर मौजूद है. और हमारा वर्ल्ड ऑर्डर अब भरभराकर गिर रहा है और वैश्विक व्यापार थम सा गया है. 

हम लगभग सम्मोहित होकर देख रहे हैं कि युद्ध की रणनीति चुटकियों में तय की जाती है. 
हर वह चीज जिसे हम पवित्र और अटल मानते थे, उसपर समझौते किए जा रहे हैं. 

सरहदें 
मर्यादाएं 
सुरक्षा 
नैतिकता 
युद्ध के नियम 
नेकी की कीमत 
शांति और समृद्धि का दिखावा.

धर्म-शासित राज्य और राजतंत्र हमेशा ही निरंकुश सत्ता के आवरण में लिपटे रहे हैं. 
अब जिस पर घेरा कसा जा रहा है वो है इस सदी की सबसे सम्मानित राजनीतिक व्यवस्था यानी की लोकतंत्र इसकी संस्थाएं अपने नेताओं के विशाल व्यक्तित्व का वजन संभाल पाने में असमर्थ सिद्ध हो रही हैं.

लोकतांत्रिक नेतृत्व जिन चेक एंड बैलेंस के दायरे में रहकर काम करता था, वे अब टूट चुके हैं. 

अब हमारे सामने जो स्थिति है, उसे मैं 'व्यक्तित्व-तंत्र' (Persona-cracies) कहती हूं. 

ऐसा लगता है कि लोकतंत्र भी निरंकुश सत्ता को वैधता प्रदान कर सकती है. कुछ लोग कह सकते हैं कि यही तो समय की मांग है. 

शनिवार 28 फरवरी को इस युद्ध से एक शाम पहले मैं तेहरान से लौटी थी. 

हम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लेने गए थे, जिनका नाम आज घर-घर में जाना जाता है. 

शीशों से सुसज्जित एक भव्य हॉल में हमारे साथ अपना इंटरव्यू पूरा करने के बाद वे जिनेवा में होने वाली शांति वार्ता के लिए रवाना हो गए. 

हमारी फ़्लाइट एक दिन बाद थी, इसलिए हम तेहरान की सड़कों पर घूमने निकले. ईरान की दुनिया में झांकने के मौके सीमित रहे हैं, इसलिए हम इस सैर को लेकर काफी उत्सुक थे.

जैसा एक पोस्टकार्ड में होना चाहिए तेहरान वैसा सुंदर या ऐतिहासिक नहीं है. 

धूल भरा एक शहर, जो रमजान के मुकद्दस लय में खोया हुआ है, उस 'एपिक फ्यूरी' से पूरी तरह बेखबर जो यहां कोहराम मचाने वाला था. 

यहां के लोग ही असली आकर्षण हैं, बड़े ही मिलनसार और अलंकार से भरे. हमारे सवालों के जवाब कविताओं और किस्सों के रूप में देते हुए. 

हो सकता है आपको लगे कि मैं किसी का पक्ष ले रही हूं.

हां, मैं पक्ष ले रही हूं 
हम सभी का पक्ष 
मानवता का पक्ष, सभी लोगों का पक्ष 
हमारी प्रतिभा का पक्ष
 उस हल्की-सी मुस्कुराहट का पक्ष, जो पूरे कमरे को रोशन कर देती है 
साफ नीले-नीले अंबर का पक्ष 
उन मकानों का पक्ष, जो घर बन जाते हैं 
उस प्रेम का पक्ष, जो परिवारों को आपस में जोड़ता है

उन फूलों का पक्ष, जो खिलते हैं 
उन प्रार्थनाओं का पक्ष, जो पूरी होती हैं 
उन लोगों का पक्ष, जिन्होंने तब भी उम्मीद नहीं छोड़ी जब सब कुछ नाकाम हो गया था 
उन अदृश्य धागों का पक्ष, जो हमें आपस में जोड़ते हैं.
या जिन्हें हमें आपस में जोड़ना चाहिए. 

इस युद्ध के कई सच और पहलू हैं और हमने आप तक कई अलग-अलग दृष्टिकोण पहुंचाने की कोशिश की है.

पिछले दो दिनों में आपने 10 विदेशी राजदूतों का नजरिया सुना हैं, ताकि आप एक सही और जानकारी भरी राय बना सकें. 

दरअसल हमेशा से हमारा प्रयास यही रहा है, चाहे कॉन्क्लेव हो या न्यूज रूम. 

और हर कोई हमारी मेहमानों की सूची से हमेशा सहमत नहीं होता. हमने यासीन मलिक को बुलाया तो एक खास विचारधारा वाले लोगों को आपत्ति हुई, हमने सलमान रुश्दी को बुलाया तो कांग्रेस को आपत्ति हुई, हमने दलाई लामा को बुलाया, तो चीन को आपत्ति हुई. 

इस साल भी कुछ सेक्शन्स ने हमारे वक्ताओं के चयन पर सवाल उठाए हैं. 

हमारा मानना ​​है कि लोकतंत्र और न्यूजरूम विवादित लोगों को चुप कराकर नहीं, बल्कि उन्हें चुनौती देकर और उनके विचारों को बारीकी से स्क्रूटनी कर सामने रखने से मजबूत होते हैं. हम संवेदनशील संवादों से पीछे नहीं हटते. हमारा विश्वास है कि समाधान का रास्ता समावेश है, न कि बहिष्कार. 

और शायद अगर हममें से ज्यादा लोग ऐसा सोचते तो हम इस युद्ध से बच सकते थे. 

इस युद्ध के थोपे जाने से अब कई देश जख्मी हो चुके हैं, और अब यह मौतों की संख्या. हर कोई अपने लोगों की गिनती कर रहा है. 

फिर भी इस युद्ध का राष्ट्रीयताओं से कोई सरोकार नहीं है. यह चाहे आपकी हो या उनकी, हर चीज को मलबे में बदल देती है. प्रधानमंत्री मोदी अक्सर 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की बात करते हैं. दूसरों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए.

पिछले 15 दिनों में हमारे नाज़ुक ग्रह पर दूसरे विश्व युद्ध के परमाणु बमों की तुलना में तीन गुना अधिक विस्फोटक गिराये गए हैं.

आधुनिक इतिहासकार युवाल नोआ हरारी ने चेतावनी दी है, "क्या ऐसा है कि हम पहले से ही तीसरे विश्व युद्ध के बीच में हों और हमें अभी तक इसका एहसास ही न हुआ हो? मान लीजिए आप मई 1941 में लोगों से पूछ रहे होते कि क्या वे दूसरे विश्व युद्ध के बीच जी रहे हैं तो वे ऐसा नहीं मानते. यह बात हमें केवल समय बीत जाने के बाद ही समझ आती है." 

पीछे मुड़कर देखने पर ईरान के खिलाफ इस युद्ध को एक ऐसे युद्ध के तौर पर देखा जा सकता है जिसने पूरी मानवता को बुरे तत्वों, दमन और परमाणु प्रलय से बचाया, या फिर यह तीसरा विश्व युद्ध भी हो सकता है.
 
मैं मशहूर कवि महमूद दरवेश के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहती हूं. 

"युद्ध समाप्त हो जाएगा, नेता हाथ मिलाएंगे 
एक वृद्ध औरत अपने शहीद हो चुके औलाद का इंतजार करेगी 
एक स्त्री करेगी इंतजार अपने शौहर के लौट आने का
और वे बच्चे अपने बहादुर पिता की प्रतीक्षा करेंगे 
मुझे नहीं पता कि मेरे वतन को किसने बेचा 
लेकिन मैंने देखा है 
इसकी कीमत किसने चुकाई है."

कॉन्क्लेव 2026 का समापन करते हुए यह एक विचारपूर्ण संदेश है. 

लेकिन अंत में, हम उसका जश्न मनाते हैं जो हमारे पास है 

क्योंकि यह पल, हमारी ही वजह से जीवंत है. 

और हमें खुलकर जीकर इसका सम्मान करना चाहिए.

और आज आप T20 चैंपियन होने की खुशी, और सदाबहार आइकॉन अक्षय कुमार के साथ बॉलीवुड के जादुई एहसास में डूबे हुए हैं. 

इस पल का पूरा आनंद लें. 

अगली बार तक हम सभी पर शांति बनी रहे. 

धन्यवाद.

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