Indian Railways Mock Drill
Indian Railways Mock Drill
भारतीय रेलवे यात्री सुविधाओं को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए एक तरफ जहां तरह-तरह के इंतजाम करता है, वहीं दूसरी तरफ दुर्घटना और आपात स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भी लगातार तैयारी करता रहता है. रेलवे अपनी तैयारी की जांच के लिए मॉक ड्रिल भी किया करता है. इसी क्रम में दिल्ली हावड़ा रेलवे ग्रुप के सर्वाधिक व्यस्त एवं रेलवे स्टेशनों में शुमार पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन के रेलवे यार्ड में पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल की ओर से मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. इसमें रेल अधिकारियों ने दुर्घटना और आपात स्थिति में ऑपरेशन चलाने की अपनी तैयारी को परखा.
पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल स्टेशन के रेलवे यार्ड में मॉक ड्रिल
पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल स्टेशन के रेलवे यार्ड में ट्रेन का डिब्बा पलटा दिखा. रेस्क्यू ऑपरेशन में तमाम रेलवे के अधिकारी और एनडीआरएफ की टीम ने हिस्सा लिया. दरअसल, यहां पर किसी ट्रेन का एक्सीडेंट नहीं हुआ था बल्कि एक्सीडेंट की स्थिति क्रिएट की गई. इसके पीछे वजह यह है कि इस मॉक ड्रिल के माध्यम से रेलवे अपनी उन तैयारी को परख सके. जिसकी जरूरत किसी रेल दुर्घटना या आपात स्थिति में होती है. रेलवे के इस मॉक ड्रिल में रेल कर्मचारी और अधिकारियों के साथ-साथ एनडीआरएफ की टीम, लोकल पुलिस की टीम, मेडिकल टीम स्काउट गाइड आदि तमाम टीम शामिल होती हैं.
बोगी को पलटा गया और फिर...
रेल दुर्घटना या आपात स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए अपनी तैयारी को परखने लेने के लिए प्लान के तहत एक ट्रेन की बोगी को पलट दिया गया. इसके बाद रेलवे का सायरन बजाया गया. खतरे का सायरन सुनने के साथ ही रेलवे की एक्सीडेंटल रिलीफ ट्रेन रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए दुर्घटना स्थल की तरफ दौड़ पड़ी. इसके बाद रेलवे के डीआरएम सहित तमाम छोटे-बड़े अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. हालात को देखते हुए एनडीआरएफ को बुलाया गया. इसके साथ ही साथ मेडिकल की टीम स्काउट गाइड की टीम, आरपीएफ के जवान और लोकल पुलिस भी मौके पर पहुंच गई.
इस दौरान रेल दुर्घटना के समय चलने वाली रेस्क्यू ऑपरेशन को क्रिएट किया गया. ट्रेन की बोगी में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए बोगी काटकर रास्ता बनाया गया और उन्हें बाहर निकाला गया. इस दुर्घटना में जो लोग घायल हुए थे, उन्हें मेडिकल कैंप पहुंचाया गया और उनका इलाज किया गया. कुल मिलाकर इस मॉक ड्रिल के माध्यम से रेलवे ने दुर्घटना के समय रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अपनी तमाम तैयारियां को परखा. इसके साथ ही साथ यह भी परखा गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में जो मशीन इस्तेमाल में लाई जाती हैं. वह प्रॉपर तरीके से चल रही हैं या नहीं चल रही हैं.
कैसी है हमारी तैयारी, हम कितने हैं तैयार
इस मॉक ड्रिल के संदर्भ में जानकारी देते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना ने बताया कि आज हमने रेल आपदा राहत बचाव के लिए मॉक ड्रिल का कार्यक्रम रखा है. इसमें हम यह समीक्षा करते हैं कि किसी भी एक्सीडेंट के समय रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए हमारी तैयारी कैसी है और हम कितने तैयार हैं. इसमें रेलवे के साथ-साथ जो हमारे राज्य सरकार और एनडीआरएफ की टीम और सिविल डिफेंस की टीम पूरी तरह से तैयार हैं या नहीं, इसको भी देखा जाता है.
इसी के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है. इसमें देखा जाता है की सूचना मिलने के बाद किस तरह से क्विक रिस्पांस मिल रहा है. हम यह चेक करते हैं कि किसी भी आपातकालीन सिचुएशन में हम जल्द से जल्द मौके पर कितनी देर में पहुंच पाते हैं और बचाव कर पाते हैं, जिसकी वजह से जान माल का नुकसान कम से कम हो और जान बचाई जा सके. इसी के लिए हम यह मॉक ड्रिल करते हैं. इसमें हम हमारे इक्विपमेंट की को भी परखते हैं कि वह ठीक से कम कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं. मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस, मेडिकल और स्टेट गवर्नमेंट की तमाम टीम आई हुई हैं. हमें इस बात की खुशी है कि हमारी टीम पूरी तरह तैयार है और हम जल्द से जल्द इस काम को कर ले रहे हैं.