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गरम मसाला को बताया ड्रग्स, 57 दिन रखा जेल में, अब देना होगा 10 लाख का मुआवजा

मध्य प्रदेश में एक 16 साल पुराने मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. भोपाल एयरपोर्ट पर गरम मसाला बताकर सुरक्षा एजेंसियों ने एक निर्दोष शख्स को गिरफ्तार किया था. उस शख्स को 57 दिन तक जेल में रहना पड़ा था. अब इस लड़ाई में पीड़ित की जीत हुई है. कोर्ट ने 10 लाख रुपए मुआवजा देने का फैसला सुनाया है.

Bhopal News (Photo/AI) Bhopal News (Photo/AI)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एयरपोर्ट पर गरम मसाला को ड्रग्स बताने वाले मामले में 16 साल बाद जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला आया है. हाईकोर्ट ने ग्वालियर के इंजीनियर अजय सिंह के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने माना कि तकनीकी खामी और जांच में देरी की वजह से एक निर्दोष व्यक्ति को डेढ़ दशक तक मानसिक, सामाजिक और पेशेवर नुकसान झेलना पड़ा. जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए अजय सिंह को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है.

16 साल पहले गरम मसाला को बताया गया था ड्रग्स-
दरअसल यह पूरा मामला वर्ष 2010 का है. ग्वालियर निवासी इंजीनियर अजय सिंह भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट से दिल्ली जाने के लिए पहुंचे थे. एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान उनके बैग को स्कैनिंग मशीन से जांचा गया. इसी दौरान एक्सप्लोसिव डिटेक्टर मशीन ने अलर्ट दिखाया. सुरक्षा में तैनात अधिकारियों ने संदेह के आधार पर बैग की गहन तलाशी ली, जिसमें एक पाउडर जैसा पदार्थ मिला. शुरुआती जांच में उसे मादक पदार्थ समझ लिया गया और बिना पर्याप्त पुष्टि के अजय सिंह को हिरासत में ले लिया गया.

जेल में 75 दिन तक रहना पड़ा-
बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ ड्रग्स तस्करी से जुड़े गंभीर प्रकरण दर्ज कर दिए और उन्हें जेल भेज दिया गया. जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई के चलते एक शिक्षित और पेशेवर व्यक्ति को अपराधियों के बीच 57 दिनों तक जेल में रहना पड़ा. जिस पदार्थ को नशीला माना गया था, वह वास्तव में आमतौर पर रसोई में इस्तेमाल होने वाला अमचूर पाउडर निकला. फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट आने में लगभग दो महीने लग गए, जिसके बाद स्पष्ट हुआ कि मामला पूरी तरह गलतफहमी और तकनीकी त्रुटि का परिणाम था.

रिपोर्ट सामने आने के बाद अजय सिंह को जमानत मिल गई, लेकिन इस घटना ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा. उन्होंने इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और व्यवस्था की लापरवाही के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखी. लंबे समय बाद जबलपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की.

याचिकाकर्ता की क्षति की भरपाई संभव नहीं- कोर्ट
न्यायालय ने कहा कि केवल तकनीकी खराबी या संसाधनों की कमी के कारण किसी निर्दोष नागरिक की स्वतंत्रता छीनी नहीं जा सकती. अदालत ने माना कि जांच एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले तथ्यों की पूरी पुष्टि करनी चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस घटना से याचिकाकर्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा, करियर और मानसिक स्थिति को गंभीर क्षति पहुंची है, जिसकी भरपाई पूरी तरह संभव नहीं है.

10 लाख रुपए मुआवजा देने का फैसला-
जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए अजय सिंह को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. अदालत का यह फैसला न केवल पीड़ित को राहत देने वाला है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों और फॉरेंसिक विभागों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है. यह निर्णय स्पष्ट करता है कि वैज्ञानिक जांच और सुरक्षा प्रक्रिया के नाम पर किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती.

(धीरज साहू की रिपोर्ट)

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