Kailash Mansarovar Yatra
Kailash Mansarovar Yatra
नेपाल में फ्लैश फ्लड में करीब 165 लोगों की मौत हुई है. जबकि 750 से अधिक लोग अभी लापता हैं. बाढ़ की वजह से कई इलाकों में तबाही मची है. बचाव दल रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटा है. सैकड़ों लोगों का रेस्क्यू किया गया है. अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. फ्लैश फ्लड कैलाश मानसरोवर जाने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ है. बाढ़ की वजह से सैकड़ों भारतीय तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए कितने रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है और इस फ्लैश फ्लड में कौन सा रास्ते को नुकसान हुआ है.
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 3 रास्ते-
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र तीर्थयात्रा है. यह तीर्थयात्रा भक्तों को तिब्बत, चीन में स्थिति कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक ले जाती है. भगवान शिव और देवी पार्वती के स्थान तक जाने के लिए श्रद्धालु तीन रास्तों का इस्तेमाल करते हैं. चलिए आपको उन रास्तों के बारे में बताते हैं.
काठमांडू से होकर तीर्थ यात्रा-
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए नेपाल की राजधानी काठमांडू से होकर एक रास्ता जाता है. इसके तहत काठमांडू से नेपालगंज या सिमिकोट तक हवाई जहाज या गाड़ी से जाते हैं. उसके बाद हिल्सा होते हुए तिब्बत की यात्रा की जाती है. इस रूट का इस्तेमाल प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स ज्यादा करते हैं. जो श्रद्धालु कठिन ट्रेकिंग से बचना चाहते हैं और हेलिकॉप्टर का विकल्प अपनाना चाहते हैं, उनके लिए ये रास्ता सबसे आसान है. लेकिन नेपाल में फ्लैश फ्लड ने इस रास्ते को नुकसान पहुंचाया है. कैलाश मानसरोवर के लिए जाने वाले कई श्रद्धालु बाढ़ आने के बाद से लापता हैं.
उत्तराखंड होकर जाने वाला रास्ता-
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक रास्ता उत्तराखंड होकर जाता है. यह यात्रा दिल्ली से शुरू होता है और अल्मोड़ा और धारचूला होते हुए गुंजी और लिपुलेख दर्रे से तिब्बत तक ट्रेक के तौर पर आगे बढ़ता है. इसका आयोजन विदेश मंत्रालय कुमाऊं मंडल विकास निगम की मदद से करता है. इस रूट में ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग शामिल है. हालांकि सड़क निर्माण की वजह से यह रास्ता करीब-करीब सीमा तक पहुंच गया है.
सिक्किम होकर जाने वाला रास्ता-
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए एक रास्ता सिक्किम होकर जाता है. यह रास्ता दिल्ली से गंगटोक होते हुए नाथू ला दर्रे को पार करता है और तिब्बत की तरफ बढ़ता है. इस रूट पर पैदल यात्रा कम होती है, गाड़ियों से सफर ज्यादा होता है. सीनियर सिटीजन के लिए ये रूट सबसे बेहतर है.
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