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गुजरात हाईकोर्ट को क्यों कहना पड़ा- 'शेर को शांति से जीने दो'!

गुजरात उच्च न्यायालय ने शेर सफारी के लिए गिर जंगलों में पर्यटकों की भीड़ जुटने पर चिंता जताते हुए कहा है कि एशियाई शेरों को शांति से रहने दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि इंसानों और जानवरों के बीच इस संपर्क को घटाना चाहिए. कोर्ट ने यह बात गिर अभयारण्य में पर्यटक वाहनों से घिरी एक शेरनी की वायरल हुई तस्वीर के बाद ये प्रतिक्रिया दी है.

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Viral picture from Gir Sanctuary Viral picture from Gir Sanctuary
हाइलाइट्स
  • जानवरों को शांति से जीन दो - कोर्ट

  • दिसंबर में होगी अगली सुनवाई

गुजरात उच्च न्यायालय ने शेर सफारी के लिए गिर जंगलों में पर्यटकों की भीड़ जुटने पर चिंता जताते हुए कहा है कि एशियाई शेरों को शांति से रहने दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि इंसानों और जानवरों के बीच इस संपर्क को घटाना चाहिए. कोर्ट ने यह बात गिर अभयारण्य में पर्यटक वाहनों से घिरी एक शेरनी की वायरल हुई तस्वीर के बाद ये प्रतिक्रिया दी है. गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा कि सफारी की गतिविधि कम से कम होनी चाहिए और लोगों को शेरों और शेरनी को शांति से रहने देना चाहिए. प्रकृति के साथ कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.
 
जानवरों को शांति से जीन दो - कोर्ट
न्यायमूर्ति जे पी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर मेहता की खंडपीठ ने इस संबंध में दूसरे देशों द्वारा अपनाए गए कदमों का अध्ययन करने के बाद इस मामले में सरकार से नीति बनाने के लिए कहा है. एडवोकेट हृदय बुच ने न्यायमूर्ती के सामने एक तस्वीर रखी, जिसमें एक शेरनी लोगों से घिरी बैठी हुई है. न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति निराल मेहता की पीठ ने एशियाई शेरों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इंसानों को जंगली जानवरों को शांति से जीने देना चाहिए.  यह तस्वीर हाल ही में वायरल हुई थी. 

एडवोकेट बुच एक एनजीओ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिसने गिरनार अभयारण्य में एक पर्यटन क्षेत्र के प्रस्ताव का विरोध करते हुए एक जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने कहा कि प्रजातियों की रुचि और शेरों में उनके द्वारा दिखाई गई रुचि के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है. इसके लिए कहीं न कहीं कुछ जांच की आवश्यकता है." 

एक शेरनी को देख क्यों उत्साहित होते हैं लोग?
इस बात पर जस्टिस पारदीवाल ने कहा, अगर आप मुझसे पर्सनली पूछे तो इंसान को जानवरों के साम्राज्य में दखल नहीं देना चाहिए. इसमें तो कोई शक ही नहीं है. लेकिन हमारे पास मासाई मारा और क्रूगर नेशनल पार्क (अफ्रीका का) जैसी सुविधाएं नहीं हैं. उस जगह तक पहुंचना आसान नहीं है. एक शेरनी को देख लोग इतने उत्साहित हो जाते हैं. ओह गॉड."

अखबार में तस्वीर आने के बाद उठा मामला
इस चर्चा ने जल्द ही अवैध शेर के मुद्दे को जन्म लाइमलाइट में ला दिया, जिसकी एक छवि अखबारों में प्रकाशित हुई थी. इस मसले पर कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा, 'आप कुछ लेकर आएं. शेरों और शेरनियों को चैन से रहने दो. आप उन्हें क्यों परेशान करते हैं? अगर किसी को देखना है तो चिड़ियाघर जाइए. प्रकृति के साथ खिलवाड़ न करें. अब वे नगरों में घूमने लगे हैं.”जस्टिस मेहता ने कहा कि इन लायंस शो की वजह से आशंका है कि शेरों में शिकार करने की क्षमता दिन-ब-दिन कम होती जाएगी. यह मनुष्यों के लिए एक और समस्या होगी क्योंकि वे मनुष्यों पर हमला करेंगे.

अगली सुनवाई दिसंबर में होगी 
न्यायाधीशों ने सरकार से अगले सप्ताह तक पर्यटक गतिविधियों को विनियमित करने की योजना के साथ आने के लिए कहा है. अदालत ने कहा, "वरना हम सुझाव देंगे कि क्या करना है?" सरकार ने दलील दी कि सफारी में इस्तेमाल किए जाने वाले शेर अनिवार्य रूप से पिंजरे में बंद जानवर होते हैं, जो पहले ही अपना शिकार कौशल खो चुके होते हैं. मामले में अगली सुनवाई तीन दिसंबर को तय की गई है.

गुजरात से गोपी घांघर की रिपोर्ट