Lok Sabha (File Photo: PTI)
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Parliament Session: आपने संसद के विभिन्न सत्रों के बारे में तो कभी न कभी जरूर सुना होगा. अभी टीवी से लेकर अखबार तक में संसद के मॉनसून सत्र को लेकर चर्चा हो रही है. इस साल संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर जो 13 अगस्त 2026 तक चलेगा.
आपको मालूम हो कि संसद सत्र को बुलाने को लेकर एक प्रक्रिया होती है. इसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल, संसदीय कार्य मंत्रालय और राष्ट्रपति की अहम भूमिका होती है. कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स संसद सत्र शुरू करने से पहले एक कैलेंडर तैयार करती है. इसमें तिथियों का निर्धारण किया जाता है कि सत्र कब से कब तक चलेगा. फिर राष्ट्रपति के पास इस कैलेंडर को मंजूरी के लिए भेजा जाता है. इसके बाद राष्ट्रपति आर्टिकल 85 के तहत संसद सत्र को बुलाने को लेकर अहम फैसला लेते हैं. राष्ट्रपति की ओर से सांसदों को सत्र की सूचना एक समन के जरिए भेजी जाती है ताकि सांसद उन तिथियों के अनुसार अपनी कार्यसूची तय कर सकें. सत्र के दौरान संसद में सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य होती है. सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही सुबह 11:00 बजे से शुरू होकर शाम 6:00 बजे तक चलती है. दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक का समय लंच का होता है. आइए जानते हैं संसद के सत्र कितने तरह से होते हैं और उनमें क्या अंतर होता है?
क्या होता है संसद का सत्र
संसद का एक सत्र अवधि होती है. लोक सभा व राज्यसभा के सदस्यों के प्रस्ताव को पारित करना, प्रस्ताव पारित करने के लिए समर्थन देना, विधेयक पर चर्चा करना और विधेयक को पास करने के लिए मतदान करना यह सभी संसदीय प्रक्रिया को जिस समय के लिए निश्चित किया जाता है, उसे संसद सत्र कहा जाता है. आपको मालूम हो कि संसद सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होता है.
कितने तरह का होता है संसद सत्र
ससंद में तीन सत्र बजट सत्र, मॉनसून सत्र और शीतकालीन सत्र होते हैं. नियम के मुताबिक हर सत्र में 6 महीने का गैप होना चाहिए. आपको मालूम हो कि विशेष परिस्थिति में चार बार भी सत्र बुलाया जाता है, जिसे विशेष सत्र कहा जाता है. विशेष सत्र आपातकालीन स्थिति या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा होता है तो बुलाया जाता है. विशेष सत्र राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल की सलाह पर आयोजित किया जाता है.
1. बजट सत्र (Budget Session)
आपको मालूम हो कि हर साल संसद में सबसे पहले बजट सत्र आता है. यह सदन का सबसे जरूरी और लंबा सत्र होता है. बजट सत्र आमतौर पर फरवरी से मई तक चलता है. बजट सत्र दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होता है. बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार वित्तीय वर्ष का बजट पेश करती है. बजट सत्र के दौरान संसद में सरकार बताती है कि एक वित्तीय वर्ष में कितनी आमदनी होगी, कितना खर्च होगा और बचत कितनी होगी. आपको मालूम हो कि बजट सत्र दो चरणों में होता है. पहला चरण बजट प्रस्तुति और सामान्य चरण का होता है. दूसरा चरण विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर चर्चा का होता है.
2. मॉनसून सत्र (Monsoon Session)
मॉनसून सत्र को हर साल आमतौर पर जुलाई से अगस्त या सितंबर तक आयोजित किया जाता है. आपको मालूम हो कि इस सत्र के दौरान देश में मॉनसूनी बारिश हो रही होती है इसीलिए इसे मॉनसून सत्र कहा जाता है. मॉनसून सत्र में विधायी कार्यों और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा की जाती है. इस सत्र के दौरान सरकार की ओर से संसद में विभिन्न विधेयक पेश किए जाते हैं. संसद के मॉनसून सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाती है.
3. शीतकालीन सत्र (Winter Session)
संसद का शीतकालीन सत्र हर साल नवंबर से दिसंबर तक चलता है. यह सत्र संसद का साल का अंतिम और प्रमुख सत्र होता है. इस सत्र के दौरान जनहित के मुद्दे, नीति समीक्षा और विधायी कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है. शीतकालीन सत्र में भी महत्वपूर्ण विधेयक पारित और पास किए जाते हैं. इस सत्र में भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाती है. शीतकालीन सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान विपक्षी पार्टियां विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरती हैं और सरकार से जवाब मांगती हैं.