Monsoon Revival Begins
Monsoon Revival Begins
करीब एक महीने तक भीषण गर्मी, उमस के बाद अब राहत की खबर है. दक्षिण-पश्चिम मानसून फिर से सक्रिय हो गया है और अगले कुछ दिन उत्तर भारत के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं. अगर मौजूदा मौसमीय परिस्थितियां बनी रहीं तो 3 या 4 जुलाई तक दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में मानसून की औपचारिक एंट्री हो सकती है. मौसम विभाग (IMD) और निजी एजेंसी स्काईमेट दोनों का मानना है कि जुलाई के पहले पखवाड़े में देश के बड़े हिस्से में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है.
क्यों बदल रहा है मौसम?
इस बार मानसून की रफ्तार बढ़ाने के पीछे एक नहीं, बल्कि कई मौसमीय सिस्टम एक साथ काम कर रहे हैं. सबसे अहम है कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area). मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एक कम दबाव का क्षेत्र मध्य भारत और दूसरा बंगाल की खाड़ी के ऊपर विकसित हो सकता है. ये दोनों सिस्टम बड़ी मात्रा में नमी को देश के अंदर तक खींचेंगे. इसके साथ ही मानसूनी ट्रफ भी अब अपने सामान्य स्थान की ओर बढ़ रही है. यही ट्रफ मानसून की रीढ़ मानी जाती है. यह पंजाब से लेकर उत्तरी बंगाल की खाड़ी तक फैला कम दबाव वाला लंबा क्षेत्र होता है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं को उत्तर और मध्य भारत तक पहुंचाता है. जैसे-जैसे यह ट्रफ मजबूत होगी, वैसे-वैसे बारिश का दायरा भी बढ़ता जाएगा.
दिल्ली में कब पहुंचेगा मानसून?
फिलहाल मानसून उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है. बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में चक्रवाती हवाओं का घेरा भी बना हुआ है. इसके प्रभाव से बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र पश्चिम की ओर बढ़ेगा और बिहार, उत्तर प्रदेश होते हुए पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक नमी पहुंचाएगा.
इसी वजह से 2-3 जुलाई से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तरी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है, जबकि 3-4 जुलाई के आसपास दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक एंट्री हो सकती है. तब तक राजधानी में कहीं-कहीं हल्की या छिटपुट बारिश हो सकती है, लेकिन मानसून आने के बाद बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ने की उम्मीद है.
पहले पश्चिमी तट, फिर पूरे देश में फैलेगी बारिश
मानसून की सक्रियता सबसे पहले पश्चिमी तट पर बढ़ी है. केरल, तटीय कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में बारिश तेज हो चुकी है. पश्चिमी घाट के इलाकों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इसके बाद बारिश का दायरा तेजी से देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचेगा. 1 और 2 जुलाई के दौरान ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई इलाकों में व्यापक बारिश का अनुमान है. कुछ जगहों पर भारी बारिश के कारण जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है.
उत्तर भारत को गर्मी और उमस से मिलेगी राहत
दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत पिछले कई दिनों से तेज गर्मी और उमस से परेशान है. मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे दिल्ली में लोगों ने लगभग 53.5 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस होने वाली गर्मी (फील्स लाइक टेम्परेचर) का अनुभव किया. बुधवार की सुबह कई इलाकों में छिटपुट बारिश होने से मौसम सुहाना हो गयाहै. अब जैसे-जैसे पूर्वी नमी वाली हवाएं दिल्ली तक पहुंचेंगी और मानसूनी ट्रफ मजबूत होगी, वैसे-वैसे तापमान में गिरावट आएगी और उमस से भी राहत मिलने लगेगी. 3 से 6 जुलाई के बीच मध्यम से भारी बारिश के कई दौर देखने को मिल सकते हैं.
खेती के लिए क्यों बेहद अहम है जुलाई?
इस साल जून महीने में देश में सामान्य से करीब 40% कम बारिश दर्ज की गई. यह वर्ष 1901 के बाद सबसे सूखे जून महीनों में शामिल रहा. कम बारिश की वजह से कई राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार भी धीमी पड़ गई, क्योंकि खेतों में पर्याप्त नमी नहीं थी. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर जुलाई के पहले 15 दिनों में अच्छी और लगातार बारिश होती है तो इससे खेतों में नमी बढ़ेगी, धान, मक्का, सोयाबीन और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई तेज होगी.
भारी बारिश के साथ चुनौतियां भी रहेंगी
बारिश राहत लेकर आएगी, लेकिन कुछ मुश्किलें भी पैदा कर सकती है. जिन इलाकों में कम समय में ज्यादा बारिश होगी, वहां जलभराव, ट्रैफिक जाम और स्थानीय बाढ़ जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और अनावश्यक यात्रा से बचना जरूरी होगा.
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