
India Monsoon 2026
India Monsoon 2026
देशभर में लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पिछले करीब दो हफ्तों से लगभग ठहरा हुआ है. जून की शुरुआत में मॉनसून ने उम्मीद से पहले कई हिस्सों में दस्तक दी थी, लेकिन इसके बाद उसकी रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई. नतीजा यह हुआ कि देश के बड़े हिस्से अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि अब मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में परिस्थितियां बदल सकती हैं और मॉनसून फिर से तेजी पकड़ सकता है.
मॉनसून आखिर रुका क्यों?
मॉनसून की प्रगति केवल बादलों पर निर्भर नहीं होती. इसके पीछे कई बड़े मौसमीय तंत्र काम करते हैं. इस बार इनमें से कुछ प्रमुख तंत्र कमजोर पड़ गए, जिसके कारण मॉनसून आगे नहीं बढ़ पाया. जून के पहले पखवाड़े में पश्चिमी और मध्य भारत में लगातार शुष्क यानी सूखी हवाओं का प्रभाव बना रहा. इन हवाओं ने नमी को कम कर दिया और बादलों के बनने की प्रक्रिया को बाधित किया. जब वातावरण में पर्याप्त नमी नहीं होती, तब बड़े पैमाने पर बारिश वाले बादल विकसित नहीं हो पाते. यही वजह रही कि कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गईं और तापमान बढ़ने लगा.
सूखी हवा बनी सबसे बड़ी बाधा
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार मॉनसून के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट सूखी हवा रही. अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं को पश्चिम और मध्य भारत में प्रवेश करते समय लगातार शुष्क वायु का सामना करना पड़ा. इससे बादलों का विकास सीमित रहा और बारिश का दायरा सिकुड़ गया. शुष्क वायु धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है. पश्चिमी तट पर नमी बढ़ने लगी है, जिससे बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं. 20 जून के बाद इस बदलाव का असर और ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकता है.
क्या है सोमाली जेट, जो मॉनसून की जान माना जाता है?
मॉनसून की मजबूती में सबसे अहम भूमिका सोमाली जेट की होती है. यह एक शक्तिशाली निचले स्तर की वायु धारा है, जो पूर्वी अफ्रीका के सोमालिया तट के पास से होकर उत्तर दिशा में बहती है. इसके बाद यह अरब सागर को पार करते हुए भारत की ओर बड़ी मात्रा में नमी लेकर आती है. इसे मॉनसून का मॉइस्चर एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है. जब सोमाली जेट मजबूत होता है, तब अरब सागर से भरपूर नमी भारत पहुंचती है और व्यापक बारिश होती है. लेकिन इस साल यह जेट सामान्य से कमजोर रहा. इसका सीधा असर नमी की आपूर्ति पर पड़ा और कई राज्यों में वर्षा सामान्य से कम रही.

सोमाली जेट कब होगा मजबूत?
20 जून के आसपास सोमाली जेट में मजबूती आ सकती है. अगर ऐसा होता है तो अरब सागर के ऊपर हवाओं की गति बढ़ेगी और नमी का प्रवाह तेजी से भारत की ओर बढ़ेगा. इसका सबसे पहले असर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है. नमी बढ़ने के साथ बादलों का विकास भी तेज होगा और व्यापक बारिश की संभावना बनेगी.
क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो क्यों है जरूरी?
मॉनसून को सक्रिय बनाए रखने के लिए केवल सोमाली जेट ही काफी नहीं होता. एक और महत्वपूर्ण तंत्र है क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो. यह ऐसी हवाएं होती हैं जो दक्षिणी गोलार्ध से भूमध्य रेखा को पार करके हिंद महासागर के रास्ते भारत की ओर आती हैं. ये हवाएं अपने साथ बड़ी मात्रा में गर्म और नम वायु लेकर चलती हैं. जब यह प्रवाह मजबूत होता है, तब मॉनसून को लगातार नमी मिलती रहती है और वह देश के अंदरूनी हिस्सों तक आसानी से आगे बढ़ पाता है. इस समय मौसम विभाग और वैश्विक मॉडल इस प्रवाह के भी मजबूत होने का संकेत दे रहे हैं.

तीनों फैक्टर साथ आए तभी मानसून पकड़ेगा रफ्तार
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर सूखी हवा का प्रभाव और कमजोर होता है, सोमाली जेट मजबूत होता है और क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो अपेक्षित स्तर तक पहुंचता है, तो मॉनसून का पूरा सिस्टम दोबारा सक्रिय हो सकता है. यानी पिछले दो सप्ताह से जो रुकावट बनी हुई है, वह जल्द खत्म हो सकती है. ऐसी स्थिति में बारिश की गतिविधियां वीकेंड से बढ़ने लगेंगी और मॉनसून महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश समेत उत्तर भारत की ओर तेजी से आगे बढ़ सकता है.
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