जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला
जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला
मध्यप्रदेश में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसले में नियमितीकरण से पहले की सेवा अवधि को भी पेंशन की गणना में शामिल करने का आदेश दिया है. इस फैसले से उन कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है, जिन्होंने नियमित होने से पहले कई वर्षों तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम किया था. अदालत ने पहले के आदेश में बदलाव करते हुए शुरुआती सेवा के केवल 15 साल गिनने की सीमा हटा दी है.
दैनिक वेतनभोगियों की याचिका पर आया फैसला
मामला मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से जुड़ा है. ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल ने 26 अक्टूबर को मुन्नीद प्रसाद और अन्य कर्मचारियों की अपील स्वीकार करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि दैनिक वेतनभोगी होने के बावजूद कर्मचारियों को मासिक आधार पर भुगतान किया जाता था. इसलिए नियमितीकरण से पहले की उनकी सेवा अवधि को पेंशन की गणना से अलग नहीं किया जाना चाहिए.
फैसले का क्या होगा असर?
पहले के आदेश के अनुसार, नियमितीकरण से पहले की 17 साल की नौकरी में से शुरुआती 15 साल छोड़कर केवल दो साल की सेवा को ही पेंशन की गणना में शामिल किया जा रहा था. अब हाईकोर्ट के नए फैसले के अनुसार, पात्र कर्मचारियों की नियमितीकरण से पहले की पूरी 17 साल की सेवा को पेंशन की गणना में जोड़ा जाएगा. इसके बाद की नियमित सेवा भी नियमानुसार गिनी जाएगी. इससे संबंधित कर्मचारियों की पेंशन-योग्य सेवा अवधि बढ़ सकती है. हालांकि, वास्तविक पेंशन लाभ कर्मचारी की पात्रता और लागू सेवा नियमों के आधार पर तय किया जाएगा.
हाईकोर्ट के इस फैसले को लंबे समय से सेवा दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस फैसले के अनुपालन में पात्र कर्मचारियों को किस तरह लाभ प्रदान करता है.
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