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लिफ्ट में 3 घंटे तक फंसी रही 14 जिंदगियां, फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

मुंबई के नेहरू नगर की एक बिल्डिंग में उस समय हादसा हुआ, जब लोग लिफ्ट से नीचे उतर रहे थे. इस दौरान लिफ्ट तेजी से नीचे गिरने लगी और 6 फ्लोर नीचे चली गई. ग्राउंड फ्लोर से ठीक पहले अचानक लिफ्ट रुक गई. लिफ्ट में चीख-पुकार मच गई.

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हंसी-ठिठोली, बच्चों की किलकारियां और जन्मदिन के जश्न की गर्मजोशी... चंद सेकंडों में यह खुशनुमा माहौल रूह कंपा देने वाली चीखों में तब्दील हो जाएगा, इसका अंदाजा नेहरू नगर स्थित ‘मास मेट्रोपोलिस’ इमारत में मौजूद 14 लोगों को कतई नहीं था.

14वें फ्लोर पर चल रही एक जन्मदिन की पार्टी खत्म हुई थी. रिश्तेदार और मेहमान अपनों से विदा लेकर नीचे उतरने के लिए लिफ्ट में सवार हुए. बटन दबा, लिफ्ट सामान्य गति से नीचे की ओर सरकने लगी, लेकिन जैसे ही यह छठे माले पर पहुंची, एक भयानक झटके के साथ केबल की पकड़ छूटी और लिफ्ट बेकाबू होकर सीधे पाताल की ओर गिरने लगी.

अंधेरे में 6 फ्लोर का ‘फ्री-फॉल’ और गूंजती चीखें-
उस पल लिफ्ट के भीतर जो हुआ, वह किसी खौफनाक बुरे सपने से कम नहीं था. 6 फ्लोर तक लिफ्ट बेतहाशा नीचे गिरी. पैरों तले से फर्श खिसक चुका था, लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे, बच्चों की सांसें अटक गई थीं और बड़े मौत को बिल्कुल सामने देख रहे थे. लोहे के बक्से में बंद 14 जिंदगियों के लिए वह चंद सेकंड सदियों जैसे भारी थे. तभी एक जोरदार झटके और चिंगारियों के साथ लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर से ठीक पहले अचानक थम गई. मौत छूकर निकल चुकी थी, लेकिन खौफ अभी शुरू ही हुआ था.

3 घंटे, 14 सांसें और घुटता हुआ दम-
लिफ्ट तो रुक गई, लेकिन बाहर निकलने का हर रास्ता बंद था. भीतर घुप अंधेरा था, हवा में ऑक्सीजन कम होने लगी और घबराहट के मारे लोगों की धड़कनें बेकाबू हो गईं. पसीने से तर-बतर बदहवास लोगों ने कांपते हाथों से इमरजेंसी अलार्म बजाना शुरू किया.

अलार्म की तीखी आवाज सुनकर इमारत के लोग दौड़े. बाहर खड़े लोगों ने लोहे के बंद दरवाजों को अपने हाथों से खींचकर खोलने की पागलों जैसी कोशिश की, लेकिन दरवाजे टस से मस नहीं हुए. अंदर से आ रही औरतों और बच्चों की घुटी-घुटी चीखें बाहर खड़े लोगों का कलेजा छलनी कर रही थीं. हालात बेकाबू होते देख तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को इत्तला दी गई.

जब जिंदगी और मौत के बीच खिंच गई जंग-
मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड और नेहरू नगर पुलिस ने कटर और हाइड्रोलिक जैक की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. अंदर बंद 14 लोगों के लिए हर एक बीतता मिनट भारी पड़ रहा था, उन्हें लग रहा था कि अगर लिफ्ट का सिस्टम फिर फेल हुआ, तो वे सीधे बेसमेंट के कंक्रीट में समा जाएंगे.
दमकल कर्मियों ने करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लिफ्ट के हिस्से को काटकर सभी 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. जब लोग बाहर आए, तो कई बोलने की स्थिति में नहीं थे, उनके चेहरे खौफ से सफेद पड़ चुके थे और पैर कांप रहे थे.

ओवरलोडिंग या मेंटेनेंस में चूक?
फिलहाल नेहरू नगर पुलिस ने इस पूरे मामले की तफ्तीश तेज कर दी है. पुलिस इस बिंदु पर भी गहन जांच कर रही है कि लिफ्ट में लोगों के आने-जाने की अधिकतम क्षमता (Weight/Passenger Capacity) कितनी थी. हादसे के वक्त लिफ्ट में कुल 14 लोग सवार थे, जिनमें 4 मासूम बच्चे भी शामिल थे. क्या लिफ्ट इतने लोगों को लेकर नीचे आ सकती थी,पुलिस अब लिफ्ट के मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट, सेफ्टी ऑडिट, ओवरलोडिंग और तकनीकी खराबी के तमाम पहलुओं पर पूछताछ कर रही है. सवाल यह है कि जश्न की एक रात को मौत के इतने करीब धकेलने वाली इस गंभीर लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है?

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