Litchi brings economic sweetness
Litchi brings economic sweetness
मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची सिर्फ अपने स्वाद और खुशबू के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यह हजारों ग्रामीण परिवारों, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक सहारा भी बन रही है. लीची सीजन शुरू होते ही जिले के गांवों में तुड़ाई, छंटाई, पैकिंग और बिक्री का काम तेज हो जाता है, जिससे बड़ी संख्या में महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल जाता है.
सीजन के दौरान महिलाएं रोजाना 300 से 1000 रुपये तक की कमाई कर लेती हैं. कई बागानों में काम करने वाली महिलाओं को भोजन और नाश्ता भी दिया जाता है. खास बात यह है कि इस काम में सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्य और बच्चे भी जुड़ जाते हैं. इससे कई परिवारों को सालभर के कर्ज से राहत मिलती है.
दिन में हजार रुपये तक की कमाई
बोचहां प्रखंड की प्रमिला देवी बताती हैं कि उन्हें पूरे साल लीची सीजन का इंतजार रहता है. गांव में रोजगार की कमी के बीच ये मौसम उनकी आमदनी बढ़ाने का सबसे बड़ा जरिया बनता है. प्रमिला अपने बच्चों के साथ लीची तोड़ने और बेचने का काम करती हैं. उनका कहना है कि सीजन में एक दिन में हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है, जबकि बाकी समय 100 रुपये कमाना भी मुश्किल होता है.
वहीं सीमा देवी बताती हैं कि लीची सीजन आने पर गांव में ही रोजगार मिल जाता है, जिससे परिवार का खर्च आसानी से चलने लगता है. एक हाथ से दिव्यांग होने के बावजूद वह मेहनत से काम करती हैं. उनका कहना है कि सीजन खत्म होने के बाद उन्हें शहर में नाश्ते की दुकान पर काम करना पड़ता है.
फूलों देवी भी लीची तुड़वाई कर कमाई करती हैं और उसी पैसे से लीची खरीदकर शहर में बेचती हैं. उनका कहना है कि लीची सीजन खत्म होने के बाद गांव में रोजगार की समस्या फिर बढ़ जाती है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची जहां देश-विदेश में अपनी मिठास के लिए मशहूर है, वहीं यह ग्रामीण महिलाओं और मजदूर परिवारों की जिंदगी में भी आर्थिक मिठास घोल रही है.
रिपोर्टर: मनीभूषण शर्मा
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