Nepal Flood 2026
Nepal Flood 2026
नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई भीषण बाढ़ ने पूरे नेपाल में तबाही मचा दी है. रसुवा जिले के टिमुरे और आसपास के इलाकों में बाढ़ ने बाजार, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है. इस भयंकर तबाही में करीब 400 से ज्यादा पर्यटकों के लापता होने की खबर सामने आ रही है, जिसमें से 133 भारतीय पर्यटक हैं. भारत नेपाल से सटा इलाका है और नहीं का बहाव नीचे की ओर होता है, जिसके कारण अब इसका असर नेपाल से निकलकर भारत की तरफ आने वाली नदियों पर भी नजर आ रहा है. खास चिंता इसलिए है क्योंकि भोटेकोशी नदी आगे चलकर त्रिशूली और फिर भारत में गंडक नदी का रूप लेती है, जो बिहार और यूपी से होकर बहती है. हालांकि दोनों राज्यों की सरकार इसके लिए हाई लेवल की मीटिंग कर रही है और राहत सहकर्मी अलर्ट पर हैं.
भारत की ओर बढ़ रहा जल प्रलय
भौगोलिक तौर पर इस पूरे घटनाक्रम को समझें तो बाढ़ का पानी नेपाल के पहाड़ी इलाकों से नीचे की ओर बढ़ता है. भोटेकोशी नदी का उद्गम तिब्बत में है और यह नेपाल में त्रिशूली नदी से मिलती है. यही त्रिशूली आगे भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है. इसलिए नेपाल में नदी के जलस्तर और बहाव में अचानक बढ़ोतरी का असर निचले इलाकों में भी पड़ सकता है.
नेपाल में भोटेकोशी के बाद त्रिशूली नदी का रास्ता भारत की ओर आता है और गंडक के जरिए बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंचता है. इसी वजह से उत्तर प्रदेश और बिहार में नदी किनारे के इलाकों को सतर्क रहने को कहा गया है.
यूपी के इन जिलों में खतरा
उत्तर प्रदेश में सबसे पहले महराजगंज और कुशीनगर पर नजर है, क्योंकि गंडक नदी नेपाल से होकर इन जिलों के रास्ते बिहार की तरफ जाती है. हालांकि उम्मीद गंडक के खतरे के निशान से नीचे रहने की उम्मीद है. फिर भी सभी सुरक्षाकर्मी पूरे इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं.
बिहार के ये इलाके हो सकते हैं प्रभावित
गंडक नदी के आगे बढ़ने के साथ बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे गंडक किनारे के इलाकों पर नजर रखी जा रही है. बिहार में गंडक नदी से जुड़े छह जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की तैनाती की गई है. गंडक बैराज और नहरों को सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं.
मैप से ऐसे समझें बाढ़ का रास्ता
तिब्बत → भोटेकोशी नदी → नेपाल का रसुवा → त्रिशूली नदी → भारत में गंडक नदी → उत्तर प्रदेश का महराजगंज-कुशीनगर → बिहार के गंडक किनारे के इलाके
यही वह भौगोलिक रास्ता है, जिसकी वजह से नेपाल की इस अचानक आई बाढ़ को लेकर भारत में भी निगरानी बढ़ाई गई है. फिलहाल सबसे जरूरी बात नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा और जलस्तर पर लगातार नजर रखना है.
रेस्क्यू के लिए हेलीकॉप्टर भी लगाए गए
बाढ़ से प्रभावित पहाड़ी इलाकों में कई जगह सड़क और दूसरे रास्ते प्रभावित हुए हैं. ऐसे में राहत और बचाव दलों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचाने और लोगों को बाहर निकालने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है. रेस्क्यू टीमों की प्राथमिकता फंसे हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है.
राहत कार्य तेज
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, सुबह करीब 8:30 बजे भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था. इसकी चपेट में नदी किनारे मौजूद पर्यटक और ट्रेकर्स भी आ गए. इसके अलावा 40 किलोमीटर की सड़क और 19 पुल भी नदी के बहाव में बह गए.
हादसे के बाद लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू कर दिया गया है. नेपाल सेना, स्पेशल ऑपरेशन्स टीम और मेडिकल टीम बड़े पैमाने सहायता कार्य में जुट गई हैं. ये टीमें स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं. नेपाल सेना की ओर से भी राहत और बचाव अभियान बड़े स्तर पर चलाए जाने की जानकारी दी गई है.
ये भी पढ़ें