भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2026 के NEET विवाद और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के कमजोर प्रबंधन को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा है. हालांकि, वह अपने मौजूदा मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे.
कितनी पढ़ाई की है प्रह्लाद जोशी ने?
प्रह्लाद जोशी ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की है. उन्होंने हुब्बल्ली के के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक किया, जो कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है.
स्कूली शिक्षा की शुरुआत उन्होंने रेलवे स्कूल से की थी. इसके बाद उन्होंने हुब्बल्ली के न्यू इंग्लिश स्कूल में पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने कला संकाय से स्नातक की डिग्री हासिल की.
साधारण परिवार से निकलकर पहुंचे राष्ट्रीय राजनीति तक
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (पूर्व में बीजापुर) में हुआ था. उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा. उनके पिता भारतीय रेलवे में कार्यरत थे. शुरुआती शिक्षा और उच्च शिक्षा का अधिकांश हिस्सा उन्होंने कर्नाटक में ही पूरा किया.
कम उम्र में ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से हो गया था. बाद में उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और फिर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया.
लगातार पांच बार बने लोकसभा सांसद
प्रह्लाद जोशी 2004 से धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. वह इस सीट से लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं. इसी के साथ वह कर्नाटक भाजपा के सबसे अनुभवी सांसदों में गिने जाते हैं.
कई अहम मंत्रालयों की संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
अपने लंबे राजनीतिक सफर में प्रह्लाद जोशी कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया. इसके अलावा वे केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं, जिनमें-
शिक्षा मंत्रालय संभालने के बाद क्या बोले प्रह्लाद जोशी?
शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे. उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे.
अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि वह शिक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और सुधारों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और पेपर लीक जैसे जटिल समस्या से कैसे निपटते हैं.
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