यूपी में संपत्ति खरीदने-बेचने पर सख्ती. (Photo: Representational)
यूपी में संपत्ति खरीदने-बेचने पर सख्ती. (Photo: Representational)
उत्तर प्रदेश के इंडो-नेपाल बॉर्डर पर विदेशी फंडिंग से खरीदी जा रही बेनामी संपत्तियों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. बॉर्डर क्षेत्रों में टेरर फंडिंग से बढ़ रही गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से अब नेपाल सीमा से जुड़े सात जिलों सहित पूरे उत्तर प्रदेश में संपत्ति की खरीद-फरोख्त के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है.
अब किसी भी संपत्ति लेनदेन में क्रेता और विक्रेता दोनों को पैन कार्ड देना जरूरी होगा. इस संबंध में राज्य सरकार ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं. इस फैसले के पीछे सरकार की मंशा अवैध फंडिंग पर रोक लगाना और संपत्ति लेनदेन को पारदर्शी बनाना है.
एटीएस जांच में सामने आया मामला
बीते साल यूपी एटीएस की एक जांच में पता चला कि संत कबीर नगर निवासी मौलाना शमशुल हुदा खान कई वर्षों से लंदन में रह रहा था. ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बावजूद वह 2007 से 2017 तक आजमगढ़ के एक मदरसे से तनख्वाह लेता रहा.
एटीएस की रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना ने लंदन में रहते हुए कई बार पाकिस्तान की यात्रा की और संदिग्ध संगठनों की बैठकों में हिस्सा लिया. आशंका जताई गई कि वह विदेश यात्राओं के दौरान कई संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में आया.
जांच के बाद आजमगढ़ और श्रावस्ती जिले में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. मामला विदेशी फंडिंग से जुड़ा होने के कारण प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जांच शुरू की. पड़ताल में सामने आया कि उसके विभिन्न खातों में लगभग 4 करोड़ रुपये विदेशी फंडिंग के जरिए भेजे गए. इसी रकम से संत कबीर नगर में मदरसा खोला गया और परिजनों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं. ईडी ने उससे जुड़े 18 खातों में जमा लगभग 94 लाख रुपये फ्रीज कर दिए और संपत्तियों को अटैच कर लिया.
नए नियम का दायरा और उद्देश्य
इन घटनाओं को देखते हुए सरकार ने अचल संपत्ति के हर अनुबंध में पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है. यह नियम इंडो-नेपाल बॉर्डर के सात जिलों गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में लागू होगा.
ऑनलाइन रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर में भी बदलाव किया गया है, जिससे पैन कार्ड की जानकारी दर्ज करना जरूरी हो गया है.
अवैध गतिविधियों पर निगरानी मजबूत
सरकार को उम्मीद है कि इस नियम से बेनामी संपत्ति और अवैध फंडिंग पर प्रभावी रोक लगेगी. पैन कार्ड अनिवार्य होने से आयकर विभाग और प्रशासन यह निगरानी कर सकेंगे कि कहीं कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से संपत्तियां तो नहीं खरीद रहा.
इसके अलावा, विदेशी फंडिंग से जुड़े संभावित मामलों की जांच एटीएस, ईडी और आयकर विभाग के लिए आसान हो जाएगी, जिससे सीमा क्षेत्रों में देश विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत होगा.
(रिपोर्ट- संतोष कुमार)
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