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जोखिम भरा है स्कूल जाना! रेलवे लाइन पार करके स्कूल जाने के मजबूर इस गांव के बच्चे

महाराष्ट्र में पालघर के बाढ़ीव गांव की 4 हजार की आबादी एक अदद सड़क के लिए संघर्ष कर रही है. बच्चों के रेलवे लाइन पार करके स्कूल जाना पड़ता है. मरीजों को उठाकर रेलवे लाइन पार कराना पड़ता है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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Palghar News Palghar News

महाराष्ट्र के पालघर जिले को ‘चौथी मुंबई’ के रूप में विकसित करने की घोषणाएं हो रही हैं. एक तरफ मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेस-वे और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसे हजारों करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, तो दूसरी तरफ पालघर तालुका के वाढ़ीव गांव के चार हजार से अधिक ग्रामीण आज भी एक सुरक्षित सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

पार करनी पड़ती है रेलवे लाइन-
गांव से बाहर निकलने के लिए ग्रामीणों को रेलवे पटरी पार करनी पड़ती है. सबसे गंभीर स्थिति स्कूली विद्यार्थियों की है, जिन्हें रोजाना जान हथेली पर रखकर रेलवे पटरी पार करके स्कूल जाना पड़ता है.

इसी जानलेवा सफर का वीडियो बढ़ीव गांव के विद्यार्थी सोहिल चौधरी ने खुद बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल किया. वीडियो में विद्यार्थी और ग्रामीण रेलवे पटरी तथा रेलवे पुल के रास्ते जान जोखिम में डालकर सफर करते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद वाढ़ीव गांव की वर्षों पुरानी सड़क की समस्या एक बार फिर सामने आई है.

इस वायरल वीडियो की दखल लेते हुए हमारी टीम ने वाढ़ीव गांव पहुंचकर ग्राउंड रिपोर्ट की. टीम ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को जाना.

वर्षों से रेलवे पटरी पार करते ग्रामीण, रोज जान हथेली पर रखकर स्कूल जाने वाले विद्यार्थी और आपातकालीन स्थिति में मरीज को झोली में लेकर रेलवे पटरी पार करने की मजबूरी वाढ़ीव गांव की यह तस्वीर प्रशासन के विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

स्थाई सड़क बनाने की मांग-
ग्रामीणों और विद्यार्थियों की मांग है कि वैतरणा खाड़ी पर सुरक्षित पुल अथवा वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए, गांव को स्थायी सड़क से जोड़ा जाए और एंबुलेंस सहित आपातकालीन वाहन सीधे गांव तक पहुंच सकें, ऐसी व्यवस्था की जाए.

मतदान बहिष्कार की धमकी-
विद्यार्थी सोहिल चौधरी द्वारा बनाए गए एक वीडियो ने बढ़ीव गांव की वर्षों पुरानी समस्या को सामने ला दिया है. पालघर को ‘चौथी मुंबई’ बनाने की घोषणाओं के बीच चार हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव के विद्यार्थी आज भी जान हथेली पर रखकर स्कूल जाने को मजबूर हैं.

अब ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि आश्वासन नहीं, अब प्रत्यक्ष सड़क चाहिए. सड़क नहीं मिली तो इस बार मतदान नहीं करेंगे.

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