Pali Bangle Industry
Pali Bangle Industry
हरी, गुलाबी, लाल, नीली खिली हुई चूड़ियां अच्छी लगती हैं. गांव के मेले में सजी हुई चूड़ियां अच्छी लगती हैं. गोरी-गोरी कलाइयों में पहनी चूड़ियां अच्छी लगती हैं. चूड़ियां, सिर्फ स्त्रियों की कलाई का गहना नहीं हैं. प्रेम, याद, श्रृंगार और तन्हाई के भावों से जुड़ा एक हसीन अहसास भी है. भारतीय संस्कृति और श्रृंगार का एक अभिन्न हिस्सा है. विवाहित महिलाओं के लिए चूड़ियां पहनना सौभाग्य और समृद्धि से जुड़ा है. राजस्थान के पाली की लाख की चूड़ियां अपने संग 100 साल की विरासत समेटे है.
पाली में चूड़ियों का इतिहास एक सदी पुराना-
पाली की लाख की चूड़ियों की एक सदी पूरी हो गई है. लेकिन चमक अभी भी बरकरार है. यहां चूड़ी इंडस्ट्री की जड़े लगभग एक सदी पुरानी है. यहां चूड़ियां साज सज्जा की निशानी तो हैं, लेकिन साथ ही हजारों सशक्त महिलाओं के चेहरे की चमक भी है.
चूड़ियों की चमक बरकरार-
लगभग 100 साल पहले पाली में एक छोटे पैमाने के शिल्प के रूप में शुरू हुआ ये काम अब एक संगठित उद्योग का रुप ले चुका है. इस व्यापार की शुरुआत लगभग 1938 में बाबू भाई खान ने की थी. शुरुआती सालों में चूड़ियां हाथी दांत और नारियल के खोल से बनाई जाती थीं, बाद में आधुनिक सामग्रियों के जरिए बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरु हुआ.
आज 1000 से ज्यादा कारखाने-
आज यहां लगभग एक हजार कारखाने चूड़ियां और कंगन बनाने के काम में लगे हैं. चूड़ी उद्योग हजारों व्यापारियों को कारोबार के मौके और लाखों लोगों को रोजगार देता है. इस काम से गृहिणियां भी आत्मनिर्भर बन रही हैं. यहां चूड़ी उद्योग घर-घर जाकर सामान पहुंचाने के मॉडल की तरह भी काम करता है, जिससे महिलाओं को घर से ही काम करने में सहायता मिलती है. इस इलाके की कई महिलाओं के लिए चूड़ी इंडस्ट्री आय का एक स्थिर सोर्स भी बन गई है.
विदेशों में भी पसंद की जाती हैं पाली की चूड़ियां-
पाली की चूड़ियां न केवल भारत के अलग-अलग राज्यों में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय है. पाली देश का दूसरा सबसे बड़ा चूड़ी उत्पादक केंद्र बनकर हजारों महिलाओं को रोजगार दे रहा है. नारियल के खोल से शुरू हुआ यह सफर अब आधुनिक प्लास्टिक और फैशन चूड़ियों में बदलकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक अपनी धाक जमा रहा है.
पाली में ये उद्योग सिर्फ एक व्यापार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक विरासत है, जो समय के साथ नई तकनीक अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम कर रहा है.
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