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इन 10 शब्दों को जान लीजिए, संसद की पूरी कार्यवाही को समझना हो जाएगा आसान

संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है. लगातार दूसरे दिन भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. संसद में कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल होता है, जो आम लोगों को समझ नहीं आता है. चलिए आपको 10 ऐसे शब्दों के बारे में बताते हैं, जिसको समझकर आप संसद की कार्यवाही को अच्छी तरह से समझ जाएंगे.

Parliament Monsoon Session Parliament Monsoon Session

संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो गया है. पहले दिन विपक्ष  ने जोरदार हंगामा किया. जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा. ज्यादातर लोगों को संसद की कार्यवाही समझ नहीं आती है कि उसमें क्या हो रहा है? कब क्या होता है? उसमें इस्तेमाल होने वाले किस शब्द का मतलब होता है. चलिए आपको 10 ऐसे शब्द को जानकारी देते हैं, जिसका इस्तेमाल सदन की कार्यवाही के दौरान होता है और अगर इन शब्दों क जान लेंगे तो सदन की कार्यवाही समझने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.

प्रश्नकाल-
संसद की कार्यवाही का पहला घंटा प्रश्नकाल होता है. आमतौर पर सुबह 11 बजे से 12 बजे तक प्रश्नकाल होता है. इस दौरान सांसद सरकार की नीतियों, प्रशासनिक कामकाज और विभागों से जुड़े सवाल पूछते हैं. इसका मकसद जनता की समस्याओं को मंत्रियों के सामने लाना होता है. प्रश्नकाल के दौरान 3 तरह के सवाल पूछे जाते हैं. तारांकित प्रश्न, अतारांकित प्रश्न और अल्प सूचना प्रश्न पूछे जाते हैं. 

शून्यकाल-
संसद में शून्याकल वह समय होता है, जब सांसद बिना किसी पूर्व सूचना के तत्काल लोक महत्व के अहम मुद्दा उठाते हैं. शून्यकाल प्रश्नकाल के ठीक बाद शुरू होता है. लोकसभा में शू्न्यकाल दोपहर 12 बजे से शुरू होता है और एक बजे तक चलता है. जबकि राज्यसभा में सुबह 11 बजे से 12 बजे तक होता है.

स्थगन-
संसद में स्थगन का मतलब सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए अस्थाई तौर पर सस्पेंड करना होता है. यह फैसला लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति लेते हैं. साधारण स्थगन और स्थगन प्रस्ताव होते हैं. 

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव-
संसद में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत सदन का कोई सदस्य पीठासीन अधिकारी की इजाजत से किसी जरूरी मुद्दे पर किसी मंत्री का ध्यान आकर्षित करता है. उस मुद्दे पर आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग करता है.

कटौती प्रस्ताव-
संसद में कटौती प्रस्ताव लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सरकार के पेश किए गए अनुदान की मांग में कटौती के लिए लाया जाता है. इसका मकसद सरकार की पॉलिसी का विरोध करना और फिजूलखर्ची को रोकना है.

संयुक्त बैठक-
संसद में संयुक्त बैठक बुलाने का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 108 में किया गया है. इसका मकसद लोकसभा और राज्यसभा के बीच किसी साधारण बिल पर गतिरोध को खत्म करना होता है.

कोरम-
संसद में कोरम सदस्यों की उस न्यूनतम संख्या को कहते हैं, जिनकी मौजूदगी के बिना सदन की कोई भी कार्यवाही शुरू नहीं होती है. लोकसभा और राज्यसभा के लिए यह संख्या 1/10 तय की गई है.

विशेषाधिकार प्रस्ताव-
विशेषाधिकार प्रस्ताव तब लाया जाता है, जब किसी सांसद को लगता है कि किसी मंत्री या सदस्य ने सदन के तथ्यों को छिपाकर सदन के विशेष अधिकारों का उल्लंघन किया है. इसका मकसद संसद और उसके सदस्यों के अधिकारों, शक्तियों और गरिमा की रक्षा करना है.

निंदा प्रस्ताव-
संसद में निंदा प्रस्ताव तब लाया जाता है, जब सरकार या किसी मंत्री की पॉलिसी और कामों की कड़ी आलोचना करना हो. इसका मकसद सरकार की विफलताओं पर जवाबदेह ठहराना होता है.

अविश्वास प्रस्ताव-
संसद में अविश्वास प्रस्ताव तब लाया जाता है, जब विपक्ष सरकार के बहुमत को चुनौती देता है. इसका मकसद होता है कि विपक्ष ये जानना चाहता है कि लोकसभा में सरकार के पास बहुमत है या नहीं है.

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