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हवा में घुल रही हैं खतरनाक गैसें, CO2 समेत तीन ग्रीनहाउस गैसों का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर

जिस हवा में हम सांस लेते हैं, उसमें गर्मी को रोकने वाली गैसें पहले कभी इतनी ज्यादा नहीं थीं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के मुताबिक, साल 2025 में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड, तीनों प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों का स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.

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 CO2 levels climb to 426.8 ppm CO2 levels climb to 426.8 ppm

जिस हवा में हम हर दिन सांस लेते हैं, उसमें अब गर्मी बढ़ाने वाली गैसों की मात्रा पहले से कहीं ज्यादा हो गई है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. इन गैसों की बढ़ती मात्रा धरती का तापमान बढ़ा रही है और मौसम को तेजी से बदल रही है. इसका असर आने वाले वर्षों में भी देखने को मिल सकता है.

औद्योगिक युग से पहले के मुकाबले 53% ज्यादा CO2
WMO की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का औसत स्तर 426.8 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) दर्ज किया गया. यह औद्योगिक युग से पहले के स्तर का करीब 153 प्रतिशत है. यानी उस समय के मुकाबले हवा में CO2 की मात्रा लगभग 53 प्रतिशत ज्यादा हो चुकी है. साल 2004 में जब WMO ने पहली बार यह रिपोर्ट जारी की थी, तब यह आंकड़ा 377.5 ppm था.

तीन गुना तेज हुई कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ोतरी
कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने की रफ्तार भी चिंता बढ़ा रही है. 1960 के दशक में हर साल इसमें करीब 0.8 ppm की बढ़ोतरी होती थी, जो 2011 से 2020 के बीच औसतन 2.4 ppm सालाना हो गई. 2024 से 2025 के बीच इसमें 2.8 ppm की वृद्धि दर्ज की गई. पिछले साल सूखे और जंगलों में लगी आग ने भी इस बढ़ोतरी को तेज किया था. जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल और जंगलों का नुकसान इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं.

मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड भी बढ़ा रहीं चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में मीथेन का स्तर 1,948 पार्ट्स पर बिलियन (ppb) तक पहुंच गया. इसका बड़ा हिस्सा पशुपालन, धान की खेती, जीवाश्म ईंधन और कचरे से निकलता है. वहीं, नाइट्रस ऑक्साइड का स्तर 339.1 ppb दर्ज किया गया. इसके बढ़ने में रासायनिक उर्वरकों और औद्योगिक गतिविधियों की बड़ी भूमिका है.

स्वच्छ ऊर्जा के साथ गैसों के रिसाव पर भी नजर जरूरी
WMO ने सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF6) जैसी गैसों को लेकर भी चिंता जताई है. इसका इस्तेमाल बिजली वितरण में होता है और इसकी गर्मी रोकने की क्षमता CO2 से करीब 24,300 गुना ज्यादा है. हाइड्रोजन खुद ग्रीनहाउस गैस नहीं है, लेकिन इसके रिसाव से अप्रत्यक्ष रूप से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ सकती है.

COP31 से पहले दुनिया के सामने बड़ी चुनौती
9 से 20 नवंबर तक तुर्किये के अंताल्या में होने वाले जलवायु सम्मेलन COP31 से पहले आई यह रिपोर्ट देशों के लिए चेतावनी है. WMO के मुताबिक, पिछले 11 साल अब तक के सबसे गर्म साल रहे हैं. ऐसे में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना बेहद जरूरी हो गया है.

रिपोर्टर: विस्वजीत

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