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जब खेती के लिए पैसे नहीं होते, तब सहारा बनती हैं ये योजनाएं, किसानों ने बताई दिल की बात

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और नमो शेतकरी महासम्मान योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है. कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार जिले के करीब 1 लाख 54 हजार किसान इन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं.

Gadchiroli PM Kisan Success Gadchiroli PM Kisan Success

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित किसान कल्याण योजनाओं का असर अब गडचिरोली जिले के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और नमो शेतकरी महासम्मान योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है. कृषि विभाग की जानकारी के अनुसार जिले के करीब 1 लाख 54 हजार किसान इन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं.

गडचिरोली तहसील के मुडझा गांव की महिला किसान प्रतिभा प्रभाकर चौधरी और किसान गोविंद तुकाराम सुरपाम भी इन योजनाओं के लाभार्थियों में शामिल हैं. प्रतिभा चौधरी के पास लगभग साढ़े तीन एकड़ और गोविंद सुरपाम के पास तीन एकड़ कृषि भूमि है. दोनों किसान पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं.

किसानों का कहना है कि गडचिरोली एक आदिवासी, दुर्गम और नक्सल प्रभावित जिला है, जहां सालभर नियमित रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं होते. ऐसे में खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है. जब खेती के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है, तब सरकार की ओर से मिलने वाली यह आर्थिक सहायता उनके लिए काफी उपयोगी साबित होती है.

खेती के खर्च में मिल रही मदद
प्रतिभा चौधरी और गोविंद सुरपाम बताते हैं कि उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत हर साल लगभग 11 हजार से 12 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में प्राप्त होते हैं. जरूरत पड़ने पर वे इस राशि का उपयोग बीज खरीदने, फसलों के लिए दवाइयां लेने और खेतों में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी देने में करते हैं.

किसानों ने कहा कि आर्थिक तंगी के समय यह राशि खेती के कार्यों को प्रभावित होने से बचाती है. इससे उन्हें कर्ज लेने की जरूरत भी कम पड़ती है. किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे छोटे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और वे अपनी खेती को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा पा रहे हैं.

रिपोर्टर: व्येंकटेश दुडमवार

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