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Medal for Excellence in Investigation: दृश्यम टाइप केस से लेकर गेहूं के दाने से मर्डर मिस्ट्री सॉल्व करने तक...इन अफसरों को मिला बेस्ट इनवेस्टिगेशन के लिए एक्सीलेंस मेडल

गृह मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों, संघ शासित प्रदेशों, केन्द्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों (CAPFs) और केन्द्रीय पुलिस संगठनों (CPOs) के 463 कर्मियों को वर्ष 2024 के लिए 'केन्द्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक' से सम्मानित करने के लिए चुना है.

DSP Lokayukt Anil Bajpayi, Bhopal (Right) and TI Chandrakant Patel, Indore (Left) DSP Lokayukt Anil Bajpayi, Bhopal (Right) and TI Chandrakant Patel, Indore (Left)
हाइलाइट्स
  • बेहतरीन इन्वेस्टिगेशन में 107 पुलिसकर्मियों को अवॉर्ड

  • पांच साल से दिए जा रहे हैं 'केन्द्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक'

दृश्यम फिल्म में अजय देवगन का किरदार, विजय फिल्मों से प्रेरणा लेता नजर आता है कि कैसे वह अपने परिवार के क्राइम को छिपा सकता है. और वह ऐसा करने में कामयाब भी होता है. हालांकि, वह फिल्म थी और असल जिंदगी कुछ अलग होती है. दृश्यम जैसा ही एक मामला मध्य प्रदेश में भोपाल के कोलार का है. लेकिन फर्क यह है कि इस मामले की गुत्थी को एक काबिल अफसर ने सुलझा लिया और अब उन्हें इस काम के लिए मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन 2024 से सम्मानित किया गया है. 

मामला कुछ ऐसा है कि एक महिला ने पहले अपने देवर के साथ मिलकर पति का कत्ल किया और फिर देवर की भी हत्या कर दी. पुलिस ने पूछताछ की तो दृश्यम फिल्म की तरह महिला और बच्चों ने रटी-रटाई कहानी सुनाई. पर उस समय कोलार के थाना प्रभारी रहे चंद्रकांत पटेल ने अपनी सूझबूझ से महिला का जूर्म कबूल करा लिया. इस मामले को हल करने के लिए ही उन्हें अवॉर्ड दिया गया है. चंद्रकांत पटेल के अलावा मध्य प्रदेश से और छह इनवेस्टिगेशन अफसरों को सम्मानित किया गया है. 

महिला ने की पति और देवर की हत्या  
वर्तमान में इंदौर के थाना इंचार्ज के रूप में तैनात चंद्रकांत पटेल साल 2021 में कोलार के थाना इंचार्ज थे, जब 28 मई 2021 को उन्हें शहर के दामखेड़ा ए सेक्टर में मोहन मीना नामक एक शख्स की बॉडी मिली. चंद्रकांत पटेल ने अपनी टीम के साथ मामले की छानबीन शुरू की और मोहन के घर पहुंचे. घर में मोहन की भाभी उर्मिला और उनके बच्चे थे. परिवार से शुरुआती पूछताछ में उन्हें कुछ नहीं खास नहीं पता चला. लेकिन जांच में सामने आया कि मोहन का बड़ा भाई यानी उर्मिला का पति रंजीत भी पिछले पांच साल से लापता है. 

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केस की छानबीन में पुलिस ने पता लगा लिया कि उर्मिला ने ही अपने पति और देवर की हत्या की है. हालांकि, जब पूरा मामला खुला तो हर कोई दंग रह गया. दरअसल, उर्मिला के पति रंजीत विकलांग थे और इस कारण उर्मिला को पसंद नहीं थे. ऐसे में, उर्मिला के अपने देवर मोहन के साथ अवैध संबंध बन गए, लेकिन एक दिन रंजीत ने उर्मिला और मोहन को साथ में पकड़ लिया. इसके बाद उर्मिला ने मोहन के साथ मिलकर रंजीत को मारने का प्लान बनाया ताकि उनका राज किसी के सामने न खुले. 

उर्मिला और मोहन ने तार से गला घोटकर रंजीत की हत्या कर दी और उसके शव को उस समय बन रहे उनके घर के सेप्टिक टैंक में डाल दिया. इसके बाद, उन्होंने सेप्टिक टैंक के ऊपर कमरा बनवा लिया और वहीं रहने लगी. उर्मिला को लगा था कि अब उसकी परेशानी खत्म हो गई है. लेकिन फिर उसके देवर मोहन ने उसे ब्लैकमल करना शुरू कर दिया. तब उसने अपने नाबालिग बेटे के साथ मिलकर मोहन को रास्ते से हटाने का फैसला किया और उसकी हत्या कर दी. 

इस तरह सुलझा मामला
पुलिस के मुताबिक, उनका शक उर्मिला पर तब गहराया जब उर्मिला और उसके बच्चों ने सवालों के रटे रटाए जवाब दिए. बार-बार पूछताछ करने पर भी उन्होंने यही जवाब दिया- ‘5 साल पहले रंजीत ने बेटे को गोद में उठाकर पुचकारा, बेटी को गले लगाया, फिर ऑटो रिक्शा की चाबी रखकर घर से निकल गए. इसके बाद नहीं लौटे.’ जबकि ऐसा संभव ही नहीं है कि आप एक सवाल को बार-बार पूछें और जवाब में थोड़ा-बहुत भी अंतर न आए. यह ह्यूमैन व्यवहार के एकदम उलट था. 

इसलिए चंद्रकांत की टीम ने उर्मिला के साथ एक ब्लफ खेला और कहा कि उसके पति रंजीत का कंकाल मिला है. पुलिस ने उर्मिला और बच्चों को एक जगह पुछताछ के लिए बिठाया. बीच में एक पुलिस अफसर साइड में जाकर फोन पर बात करने लगा और उसने बातों में कहा कि खुदाई में रंजीत का कंकाल मिला है. यह सुनकर उर्मिला डर गई. जब पुलिस ने थोड़ा और दवाब बनाया तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि पांच साल पहले उसने ही मोहन की मदद से रंजीत की हत्या की थी और फिर राज खुलने के डर से मोहन को भी मार डाला. 

गेहूं के दाने ने सुलझाई मर्डर मिस्ट्री 
चंद्रकांत पटेल के अलावा भोपाल से अनिल वाजपेयी को भी अवॉर्ड के लिए चुना गया है. वर्तमान में भोपाल के डीएसपी लोकायुक्त, अनिल वाजपेयी साल 2019 में कोलार के थाना इंचार्ज थे जब उन्होंने एक 4 साल के बच्चे की हत्या का मामला सुलझाया था. 16 जुलाई 2019 को कोलार में एक चार साल का बच्चा वरुण मीणा अपने घर के बाहर खेल रहा था और यहां से वह लापता हो गया. पुलिस जांच में जुटी तो उन्हें वरुण के पड़ोसी अमर सिंह के खाली पड़े मकान से बदबू आई. यहां का ताला तोड़कर देखा गया तो यहां वरुण का अधजला शव पड़ा हुआ था. साथ ही, यहां पुलिस को महिला के बाल भी मिले. 

इसके अलावा, पुलिस ने गौर किया कि घटनास्थल पर गेहूं के दाने पड़े हैं. इस गेहूं के दानों पर पुलिस की नजर गई तो उन्होंने देखा कि गेहूं के दाने अमर सिंह के घर से पड़ोस में दूसरे एक घर तक के बीच में पड़े हैं. यह दूसरा घर सुनीता सोलंकी का था. पुलिस को शक हुआ तो उन्होंने सुनीता से पूछताछ की और तब सुनीता का सच बाहर आया. सुनीता ने वरुण का अपहरण किया और उसे खाने में कीटनाशक देकर मार डाला. बाद में शव को गेहूं की टंकी में छिपा दिया और फिर मौका देखकर वरुण के शव को अमर सिंह के घर में ले जाकर जला दिया. लेकिन वरुण के शरीर में गेहूं के दाने चिपके रह गए, जिनके सहारे पुलिस सुनीता तक पहुंच गई. 

बच्चे के परिवार से लेना था बदला 
सबसे पहले सुनीता ने वरुण को खाना देने के बहाने कीटनाशक देकर बेहोश किया और फिर उसे एक खाली कंटेनर में रख दिया. इसके बाद वह गांववालों के साथ वरुण को तलाशने भी गई. फिर वापस आकर वरुण को अनाज की टंकी में छिपा दिया ताकि वह किसी को न मिले. सुबह सुनीता ने वरुण को गेहूं की टंकी से निकाला. तब तक वरुण की मौत हो चुकी थी. उसने शव को पड़ोस की गली में फेंका और फिर खुद ही उसे पड़ोस के मकान में ले आई. यहां आकर उसने वरुण के शव को कपड़ों में लपेट दिया और आग लगा दी. लेकिन जब आग बढ़ने लगी तो पकड़े जाने के डर से पानी डाल दिया. इससे शव पूरा नहीं जल पाया. 

पुलिस को जब वरुण का शव मिला तो शव पर गेहूं के दाने थे और इन दानों के पीछे-पीछे वे सुनीता के घर तक पहुंचे. यहां आकर देखा तो उन्हें अनाज सूखता मिला. तब पुलिस का शक गहराया और उन्होंने सुनीता के घर की तलाशी ली. पुलिस ने बताया कि उसके घर में भी बदबू थी तब सुनीता ने कहा कि टॉयलेट की बदबू है. तलाशी में अनाज की टंकी खोली गई तो यहां से किसी शव के सड़ने जैसी बदबू आ रही थी. सुनीता ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने जांच में उसका जुर्म कबूल करा लिया. 

अब सवाल है कि आखिर सुनीता की एक बच्चे से क्या दुश्मनी की उसने उसकी जान ले ली. सुनीता ने पुलिस की जांच में बताया कि इस घटना से एक महीने पहले उसके घर से चोरी हुई थी. उसके घर से डेढ़ किलो चांदी, सोने के दो बूंदे और 30 हजार रु. चोरी हो गए थे. सुनीता का कहना था कि उसके घर में चोरी होने के बाद से ही वरुण का परिवार हर दूसरे दिन पार्टी करता नजर आ रहा था. इसलिए उसे लगा कि उन्होंने ही उसके घर में चोरी की है और इसका बदला लेने के लिए ही उसने वरुण के अपहरण और फिर मर्डर का प्लान बनाया. 

पुलिसकर्मियों को मिलता है केन्द्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक
आपको बता दें कि पुलिस फोर्स में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अफसरों को सम्मानित करने के लिए गृह मंत्रालय 'केन्द्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक' देता है. हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर 'केन्द्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक' की घोषणा की जाती है. इस साल अलग-अलग राज्यों, संघ शासित प्रदेशों, केन्द्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों (CAPFs) और केन्द्रीय पुलिस संगठनों (CPOs) के 463 कर्मियों को इस पदक से सम्मानिक किया जाएगा. 'केन्द्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक' के तहत इनवेस्टिगेशन में भी मेडल दिया जाता है. इस साल स्पेशल ऑपरेशन कैटेगरी में 348 अवार्ड, बेहतरीन इन्वेस्टिगेशन में 107 और फॉरेंसिक कैटेगरी में 8 पुलिस अफसरों-कर्मचारियों को पुरस्कार दिए गए हैं. चौथी कैटेगरी इंटेलिजेंस फील्ड है.