बिजली गुल रहने से परेशान लोग सड़क जाम करते हुए.
बिजली गुल रहने से परेशान लोग सड़क जाम करते हुए.
पंजाब गंभीर बिजली संकट की चपेट में है, जो तेजी से बढ़ता जा रहा है और उद्योग, कृषि तथा आम नागरिकों सभी को प्रभावित कर रहा है. पिछले सप्ताह उद्योगों के लिए निर्धारित चार घंटे के कट अब राज्य के कई हिस्सों में 12-14 घंटे तक पहुंच गई है.
श्रेणी 2 और 3 के औद्योगिक इकाइयों को लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, मोहाली, राजपुरा और अन्य क्षेत्रों में शनिवार को लगभग 4:30 बजे शाम से बिजली काट दी गई, जो रविवार सुबह 6 बजे तक बंद रही. घरेलू उपभोक्ता भी रोजाना चार से पांच घंटे के अनिश्चित कट की शिकायत कर रहे हैं.
बिजली की मांग में भारी वृद्धि
यह संकट मांग में भारी वृद्धि के साथ आया है. शनिवार को पीक लोड 16,519 मेगावाट (और एक दिन पहले 16,619 मेगावाट) तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 12,489 मेगावाट से कहीं अधिक है. उत्पादन कोयले की कमी और तकनीकी खराबियों से प्रभावित हुआ है. निजी नाभा पावर (राजपुरा, 700 मेगावाट) और तलवंडी साबो (660 मेगावाट) प्लांट की एक-एक यूनिट बंद है. अन्य थर्मल और हाइडल इकाइयों के साथ कुल लगभग 1,915 मेगावाट उत्पादन क्षमता फिलहाल उपलब्ध नहीं है. पीएसपीसीएल का अपना उत्पादन लगभग 4,162–4,300 मेगावाट रहा, इसलिए राज्य को उत्तरी ग्रिड से 11,000 मेगावाट से अधिक बिजली लेनी पड़ी।कुछ निजी प्लांटों में कोयला स्टॉक चिंताजनक स्तर पर है. राजपुरा और तलवंडी साबो में आपूर्ति अनुशंसित 20 दिन के बफर से काफी कम है. सरकारी प्लांट लहरा मोहब्बत, गोइंदवाल और रोपड़ में अपेक्षाकृत बेहतर स्टॉक है.
बिजली कट की शिकायत
उद्योगपति लंबे कटौती से संचालन ठप होने की शिकायत कर रहे हैं. मोहाली के औद्योगिक क्षेत्र में भारी लोड और निरंतर आपूर्ति की जरूरत वाले मेटल यूनिट अंधेरे में पड़े हैं. उत्पादन रुका है, मजदूर बेकार बैठे हैं और कारखाने महंगे डीजल जनरेटर पर चलने को मजबूर हैं. मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव दिलप्रीत सिंह ने बताया कि उनका मेटल यूनिट ट्रैक्टर फैक्टरियों को सप्लाई करता है, लेकिन समय पर डिलीवरी नहीं दे पा रहा. उन्होंने कहा, हालात और खराब हो रहे हैं. चार-पांच घंटे के निर्धारित कट के अलावा दिन भर अनिश्चित कट लग रहे हैं. फैक्टरी पूरी तरह अंधेरे में है. अमेया इंडस्ट्री के जसविंदर सिंह ने बताया कि जनरेटर चलाने में प्रति घंटा 10 लीटर डीजल लगता है, जिससे लागत बढ़ रही है जबकि उत्पादन और ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं.
इधर, जालंधर के औद्योगिक क्षेत्र में 10-11 घंटे लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया. उन्होंने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के खिलाफ नारेबाजी की. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं, जबकि दूसरे ने बताया कि निर्धारित कट शाम 7 बजे से आधी रात तक हो रहे हैं. भारत का अन्न भंडार कहे जाने वाले पंजाब पर बिजली संकट का असर कृषि पर भी साफ दिख रहा है. खासकर मोगा जिले में जहां धान की फसल को सिंचाई की सख्त जरूरत है. शनिवार को विभिन्न किसान यूनियनों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन कर प्रमुख सड़कों और हाईवे जाम कर दिए. प्रदर्शन बाघापुराना मुख्य चौक, निहाल सिंह वाला मुख्य चौक, अजीतवाल में फिरोजपुर-लुधियाना रोड पर पावर ग्रिड के पास, धर्मकोट क्षेत्र के कडियाल में पावर ग्रिड के बाहर तथा समालसर के पास मोगा-कोटकपूरा रोड पर हुए.
किसानों का आरोप
किसानों का आरोप है कि खेतों के लिए वादा किए गए आठ घंटे की निरंतर बिजली के बजाय आपूर्ति अनियमित है और अक्सर एक घंटे भी नियमित नहीं मिल रही. कई गांवों में नहरी पानी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है. सिंघावाला, तारेवाला और नाहलखोटे जैसे गांवों के किसानों ने बताया कि उनकी फसल सूखने की कगार पर है. 11 एकड़ में धान लगाने वाले जगदीप सिंह ने कहा कि न समय पर बिजली मिल रही है और न नहरी पानी. 20 एकड़ वाले केबल सिंह ने बताया कि प्रति एकड़ बिजाई पर लगभग 25 हजार रुपए और 80 हजार रुपए ठेका खर्च हुआ है. पानी न मिलने से पूरा निवेश डूबने का खतरा है.
केवल 3-4 एकड़ वाले छोटे किसान गुरप्रीत सिंह और बलजीत सिंह ने कहा कि मेहनत और खर्च से तैयार फसल अब मुरझा रही है. भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के इकबाल सिंह ने सरकार पर आठ घंटे बिजली और नहरी पानी के झूठे दावों का आरोप लगाया. उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द समाधान न हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. एक दिन पहले भी मोगा और अजीतवाल में विरोध हुआ था. अधिकारियों ने दो दिन में समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन सुधार न होने पर किसान अब अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं.
कोयला संकट का किया जिक्र
पंजाब बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने भी राष्ट्रीय कोयला संकट का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश के कई निजी प्लांट आधी क्षमता पर चल रहे हैं और उनके पास केवल 3-4 दिन का स्टॉक है. नाभा और तलवंडी साबो प्लांट केंद्र की कोयला आवंटन पर निर्भर हैं. निजी इकाइयों में तकनीकी खराबी दूर करने के लिए टीमें काम कर रही हैं और 24-48 घंटे में दो यूनिट चालू होने की उम्मीद है. मंत्री ने दावा किया कि राज्य की अपनी इकाइयां फुल क्षमता पर चल रही हैं. केंद्रीय बिजली मंत्री को पत्र लिखकर पंजाब का हक (लगभग 1,000 मेगावाट वर्तमान में अनुपलब्ध) मांगा गया है. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हैं.
मान सरकार पर निशाना
भाजपा नेताओं, जिनमें अनिल सरीन शामिल हैं, ने आप मॉडल की आलोचना की और कुछ प्लांटों में पर्याप्त कोयला भंडार के दावों के बावजूद कट लगाने का जिक्र किया. शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने भी चल रहे बिजली संकट को लेकर भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा. भगवंत मान को पंजाब से बताना चाहिए, उन्होंने जिस 12-14 घंटे की कृषि बिजली आपूर्ति का दावा किया था, वह कहां है? कांग्रेस नेताओं गुरमीत राणा सोढ़ी और राज कुमार वेरका ने आप सरकार पर पंजाब को अंधेरे में धकेलने का आरोप लगाया. भाजपा महिला मोर्चा की जय इंदर कौर ने भी संकट की गंभीरता और संबंधित अशांति का जिक्र किया.
कुल मिलाकर असर है व्यापक
कारखानों का उत्पादन और ऑर्डर प्रभावित, किसानों की धान की फसल सूख रही, गांवों और औद्योगिक मजदूरों को लंबे ब्लैकआउट का सामना तथा महंगे डीजल पर निर्भरता बढ़ रही है. पीक मांग ऊंची, उत्पादन सीमित और प्रमुख निजी प्लांटों में कोयला दबाव में होने से संकट जल्द समाप्त होता नहीं दिख रहा. मोगा के किसान खेतों के लिए निरंतर आठ घंटे बिजली सुनिश्चित होने तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का इरादा रखे हुए हैं, जबकि उद्योग अधिक पूर्वानुमानित और कम व्यवधान वाली आपूर्ति की मांग कर रहे हैं. आप पंजाब प्रमुख अमन अरोड़ा ने बिजली समस्या को स्वीकार किया, लेकिन जोर दिया कि मान सरकार ने पहले साढ़े चार साल तक निर्बाध आपूर्ति दी थी. उन्होंने केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि राज्य के अधिकारियों ने केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, लेकिन ज्यादा नतीजा नहीं निकला. उच्च वोल्टेज वाले चुनावों की ओर बढ़ रहे राज्य में यह संकट आप सरकार पर लगा नवीनतम झटका है. हालांकि राज्य ने गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है.