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बीजेपी से नाराज हुए कोर वोटर, कांग्रेस नहीं निर्दलीयों पर जताया भरोसा, राजस्थान निकाय चुनाव ने बढ़ाई चिंता

इस चुनाव में जेन जी और सीजेपी के स्कूल जैसे मुद्दों के बजाय यूजीसी के प्रस्तावित जाति आधारित कानून का मुद्दा बीजेपी के कोर वोटरों के बीच चर्चा में रहा. बीजेपी के समर्थन में माने जाने वाले राजपूत समाज के एक हिस्से ने पार्टी को वोट देने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवारों और NOTA का विकल्प चुना.

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राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों ने बीजेपी के लिए राहत के साथ एक बड़ी चिंता भी सामने रख दी है. चुनाव में बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन पार्टी के पारंपरिक और कोर वोटर माने जाने वाले अगड़ी जातियों के बीच नाराजगी के संकेत जरूर मिले हैं. खासतौर पर राजपूत बहुल इलाकों में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन बीजेपी के लिए चेतावनी माना जा रहा है.

यूजीसी के प्रस्तावित कानून को लेकर नाराजगी
इस चुनाव में जेन जी और सीजेपी के स्कूल जैसे मुद्दों के बजाय यूजीसी के प्रस्तावित जाति आधारित कानून का मुद्दा बीजेपी के कोर वोटरों के बीच चर्चा में रहा. बीजेपी के समर्थन में माने जाने वाले राजपूत समाज के एक हिस्से ने पार्टी को वोट देने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवारों और NOTA का विकल्प चुना. हालांकि, राहत की बात यह रही कि नाराज वोटर बड़े पैमाने पर कांग्रेस की तरफ नहीं गया. यूजीसी के मुद्दे को लेकर राज्य में आंदोलन कर रही करणी सेना का कहना है कि निकाय चुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए चेतावनी हैं. संगठन ने कहा है कि अगर प्रस्तावित कानून को वापस नहीं लिया गया तो आने वाले चुनावों में बीजेपी को गंभीर राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बीजेपी के बड़े नेताओं के गढ़ में भी असर
बीजेपी के बड़े राजपूत नेताओं के इलाकों में भी पार्टी के प्रदर्शन में बदलाव देखने को मिला है. वसुंधरा राजे के झालावाड़ में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है, जबकि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर में मुकाबला बराबरी पर अटक गया है. यहां आगे की तस्वीर निर्दलीय उम्मीदवारों के रुख पर निर्भर है. उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के विद्याधर नगर में बीजेपी की हिस्सेदारी 64.3 फीसदी से घटकर करीब 60 फीसदी रह गई. यहां निर्दलीयों ने करीब 20 फीसदी वार्ड जीते. वहीं मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के झोटवाड़ा में बीजेपी की हिस्सेदारी 63 फीसदी से घटकर 53 फीसदी रह गई, जबकि निर्दलीयों ने करीब 23 फीसदी वार्ड अपने नाम किए.

कांग्रेस के राजपूत नेता ने उठाया मुद्दा
जयपुर की सिविल लाइंस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी को करीब 50-50 फीसदी वोट मिले, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार जीत नहीं सके. कांग्रेस के राजपूत नेता प्रताप सिंह खाचरियावास यूजीसी के प्रस्तावित कानून के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं. चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी के कुछ नेता भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करने लगे हैं. कुल मिलाकर निकाय चुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए तत्काल राहत जरूर हैं, लेकिन कोर वोटर की नाराजगी और निर्दलीयों के बढ़ते प्रभाव ने पार्टी के सामने आने वाले चुनावों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है.

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