तलवार रास में शामिल महिलाएं
तलवार रास में शामिल महिलाएं
राजकोट में नवरात्रि के दूसरे दिन राज पेलेस में राजपूत महिलाओं ने शौर्य का प्रदर्शन किया. वह खुली विंटेज जीप और टू व्हीलर पर सवार होकर किया हैरतअंगेज़ तलवार रास किया. राजकोट रॉयल परिवार की महारानी कादम्बरी देवी के नेतृत्व में भगिनी सेवा फाउंडेशन ने प्राचीन परंपरा का बेजोड़ वारसा संरक्षित रखा है. क्षत्रिय समाज की महिलाओं ने शौर्यदर्शन किया और नवरात्रि के अवसर में मां जगदंबा की अनोखे तरीके से आराधना की. भगिनी सेवा फाउंडेशन संस्था द्वारा हर साल राजवी पैलेस में तलवार रास आयोजित किया जाता है.
19 सालों से चल रही तलवार रास की तालीम
पिछले 19 वर्षों से भगिनी सेवा फाउंडेशन युवतियों और महिलाओं को नवरात्रि से पहले तलवार रास की तालीम देती है. उसके बाद नवरात्रि के दौरान यह तलवार रास आयोजित किया जाता है. जिसमें 10 वर्ष की नन्ही लड़कियों से लेकर 60 वर्ष तक की महिलाएं भाग लेती हैं और पारंपरिक तलवार रास खेलती हैं.
राजकोट के राजवी परिवार द्वारा संचालित भगिनी सेवा फाउंडेशन द्वारा अब तक 500 से अधिक लड़कियों और महिलाओं को तलवार बाजी की ट्रेनिंग दी जा चुकी है. तलवार बाजी एक मुश्किल कसरत है जो अधिकतर पुरुषों द्वारा की जाती है, लेकिन राजकोट की युवतियों और महिलाओं को तलवार रास की ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे वे भविष्य में अपनी आत्मरक्षा भी कर सकें.
सनातन में शस्त्र का भूमिका है अहम
क्षत्रिय समाज की पारंपरिक संस्कृति और सभ्यता के वारसे का भगिनी सेवा फाउंडेशन ख्याल रख रहा है. रानी साहेबा कादम्बरी देवी ने बताया कि पारंपरिक प्राचीन रस्म का आयोजन राजपेलेस में पिछले 19 वर्षों से किया जा रहा है. तलवार रास में हर साल नया ग्रुप भाग लेता है, जिसके लिए दो महीने की प्रैक्टिस करनी पड़ती है.
क्षत्रिय बहनें-बेटियाँ हर साल कुछ नया करना चाहती हैं, जिससे उन्हें सुरक्षा के साथ छूट भी मिलती है और उनकी प्रतिभाएं भी बाहर आती हैं. सनातन धर्म में शस्त्र की महत्वपूर्ण भूमिका है. पहले शस्त्र की कला युद्ध में काम आती थी, लेकिन अब यह कला लुप्त न हो, इसके लिए भगिनी सेवा फाउंडेशन प्रयत्न कर रहा है.