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28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर रिटायर्ड टीचर से 99 लाख की ठगी, सुप्रीम कोर्ट के फर्जी वारंट भेजकर डराया गया था

साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई और दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताकर महिला को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और सुप्रीम कोर्ट व मुंबई क्राइम ब्रांच के फर्जी दस्तावेज दिखाकर डराया.

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हाइलाइट्स
  • फर्जी वारंट और हर दो घंटे में रिपोर्ट

  • सीबीआई अधिकारी बनकर किया वीडियो कॉल

डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन अपराधियों के हौसले कम होते नजर नहीं आ रहे. ताजा मामला गांधीनगर से सामने आया है, जहां 65 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका को 28 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 99 लाख रुपए की ठगी कर ली गई. साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई और दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताकर महिला को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और सुप्रीम कोर्ट व मुंबई क्राइम ब्रांच के फर्जी दस्तावेज दिखाकर डराया.

ऐसे शुरू हुआ पूरा खेल
सेक्टर-8 निवासी पीड़िता के पति और बड़ा बेटा सिंगापुर में रहते हैं, जबकि छोटा बेटा गांधीनगर में निजी कंपनी में कार्यरत है. 16 जनवरी को महिला को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉलर ने दावा किया कि उनके नाम से एक एक्स्ट्रा सिम कार्ड चल रहा है, जिसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हो रहा है.

कुछ देर बाद वीडियो कॉल के जरिए अजय गुप्ता नाम का व्यक्ति सामने आया, जिसने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया. उसने महिला को धमकाया कि उनका बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी नरेश गोयल से जुड़ा है. यह सुनते ही शिक्षिका घबरा गईं.

फर्जी वारंट और हर दो घंटे में रिपोर्ट
विश्वास दिलाने के लिए ठगों ने व्हाट्सएप पर सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश, गिरफ्तारी वारंट और पूछताछ से जुड़े फर्जी दस्तावेज भेजे. महिला को बताया गया कि वे जांच के दायरे में हैं और उन्हें डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्हें हर दो घंटे में यह मैसेज भेजने के लिए मजबूर किया गया कि वे सुरक्षित हैं और कहीं नहीं जा रहीं. इस तरह 28 दिनों तक उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया.

जांच के नाम पर कराए पैसे ट्रांसफर
ठगों ने बैंक खातों की वेरिफिकेशन के नाम पर महिला से अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाने शुरू कर दिए. डर के कारण शिक्षिका ने 5 फरवरी से 13 फरवरी 2026 के बीच अपने एसबीआई और डाकघर खातों से आरटीजीएस के जरिए कुल 99 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए.

जब बार-बार आश्वासन के बावजूद रकम वापस नहीं मिली तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया और गांधीनगर रेंज साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.

क्या है डिजिटल अरेस्ट?
साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को डराते हैं. फर्जी दस्तावेज और वारंट दिखाकर उन्हें घर में ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर लगातार निगरानी का भ्रम पैदा किया जाता है. इसी दौरान बैंक डिटेल्स और पैसों की ठगी की जाती है.