Reunite with Father: AI Generated Image
Reunite with Father: AI Generated Image
एक पल की नाराजगी कभी-कभी जिंदगी भर का फासला बना देती है. करीब 40 साल पहले पत्नी से कहासुनी के बाद घर छोड़कर निकले चतुरी गुप्ता उर्फ काका हलवाई को अंदेशा भी नहीं था कि यह कदम उन्हें अपने ही परिवार से इतना दूर कर देगा कि एक दिन उनके बेटे भी उन्हें नहीं पहचानेंगे. उधर पत्नी इंतजार में उम्र बिताती रही, बच्चे बिना पिता के साए के बड़े हुए और इधर चतुरी अपनों के होते हुए भी गुमनाम जिंदगी जीते रहे.
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने से बदली किस्मत
हाल ही में तबीयत बिगड़ने पर चतुरी को पनकी स्थित नारायणा मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के ICU में भर्ती कराया गया. जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे इस शख्स की कहानी ने यहीं से नया मोड़ लिया.
सामाजिक कार्यकर्ता ने ढूंढ निकाला परिवार
चतुरी की हालत देखकर सामाजिक कार्यकर्ता मुन्ना चौहान ने उनके परिवार को खोजने की जिम्मेदारी उठाई. स्थानीय लोगों की मदद से वे मुंबई में रहने वाले रिश्तेदार तक पहुंचे, जहां से मऊ में बसे परिवार का संपर्क मिला. शुरुआत में परिवार ने दूरी बनाए रखी, लेकिन जब हालत की गंभीरता का पता चला तो बेटे राजमंगल और राजू कानपुर पहुंच गए.
आमने-सामने आए, लेकिन पहचान नहीं पाए
अस्पताल में पहली मुलाकात बेहद दर्दनाक रही. न पिता अपने बेटों को पहचान सके, न बेटे अपने पिता को. 40 साल का फासला दोनों के बीच साफ नजर आ रहा था. ऐसे में मां की दी हुई एक पुरानी, धुंधली तस्वीर ही सहारा बनी. तस्वीर से चेहरे का मिलान होते ही सच्चाई सामने आ गई.
जैसे ही बेटों को यकीन हुआ कि यही उनके पिता हैं, वे खुद को रोक नहीं पाए और फूट-फूटकर रो पड़े. अस्पताल का माहौल इस दृश्य से बेहद भावुक हो उठा.
एक पल में मिट गई 40 साल की दूरी
यह मिलन सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि वक्त, दूरी और हालात से जूझते रिश्तों की जीत का प्रतीक बन गया. 40 साल का दर्द, इंतजार और दूरी एक ही पल में सिमट गई.
-सिमर चावला की रिपोर्ट
ये भी पढ़ें: