Chief Minister Yogi Adityanath (File Photo: PTI)
Chief Minister Yogi Adityanath (File Photo: PTI)
योगी 2.0 के तीसरे मंत्रिमंडल विस्तार को एक हफ्ते पूरे हो चुके हैं लेकिन नए मंत्री सिर्फ अपने चेंबर और सरकारी गाड़ियों तक ही सीमित है. उनके विभागों का अब तक कोई अता-पता नहीं है. नए मंत्रियों को अभी तक कोई विभाग नहीं मिला है. सूत्रों के मुताबिक नए मंत्रियों को विभाग के लिए अभी दो दिन और इंतजार करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं किन विभागों को लेकर दिल्ली और यूपी में ठन गई है.
इन विभागों को लेकर दिल्ली और लखनऊ में ठनी
उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के तुरंत बाद विभाग बंटवारा हो जाएगा लेकिन विभागों के बंटवारे में डेडलॉक के हालात दिखाई दे रहे हैं. माना जा रहा है PWD यानी पथ निर्माण विभाग, नगर विकास, स्वास्थ्य और सूचना जैसे विभागों को लेकर दिल्ली और लखनऊ में ठनी हुई है. ऐसे में अभी तक विभाग बंटवारे का कोई फार्मूला नहीं निकल पा रहा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कुछ मंत्रालयों को लेकर अड़े हुए हैं. आपको मालूम हो कि साल 2022 में सरकार बनने के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग जितिन प्रसाद को दिया गया था, लेकिन 2024 में केंद्र की सरकार में मंत्री बन जाने के बाद से इस विभाग का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है. अब देखना है कि क्या योगी के पास यह विभाग रहेगा या फिर नए बनाए गए कैबिनेट मंत्रियों में यह मंत्रालय जाएगा.
यहां भी फंसा है पेंच
सिर्फ विभागों की बात नहीं बल्कि डिप्टी सीएम के विभागों को बदलने को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है. सूत्रों की माने तो डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक के विभाग बदलने और बड़ा विभाग सौंपने साथ ही भूपेंद्र चौधरी को भी बड़ा विभाग देने को लेकर पूरा पेंच फंस गया है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी इच्छा से सीएम को अवगत करा दिया है. अब फैसला मुख्यमंत्री को लेना है. सीएम योगी भी लखनऊ के बजाए गोरखपुर में है और माना जा रहा है रविवार शाम या सोमवार को हो इसपर कोई फैसला लेंगे.
अखिलेश यादव ने कसा तंज
उधर अखिलेश यादव अब हर दिन मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे की देरी पर लेकर चुटकी ले रहे हैं. विभाग बंटवारे में हो रही देरी पर अखिलेश यादव ने इसे डबल इंजन के डब्बों का टकराव करार दिया है और तंज कसते हुए कहा है कि दिल्ली की पर्ची अभी आई नहीं है तो मंत्री इंतजार करें. बरहाल पहले मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हुई और अब विभागों के बटवारे में देरी ने लखनऊ और दिल्ली के टकराव को एक बार फिर उजागर कर दिया है.