El Niño
El Niño
प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) के ताजा आकलन के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2027 तक इसके मजबूत से बेहद मजबूत स्थिति में बने रहने की संभावना 83% से अधिक है. मौसम वैज्ञानिकों को आशंका है कि यह 1950 के बाद दर्ज सबसे ताकतवर अल नीनो घटनाओं में शामिल हो सकता है. इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है.
समुद्र का तापमान सामान्य से कई डिग्री ज्यादा
CPC की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा दर्ज किया गया. कुछ क्षेत्रों में यह अंतर 4 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक रहा. समुद्र के अलग-अलग हिस्सों में तापमान की बढ़ोतरी को मापने वाले सूचकांकों में भी असामान्य तेजी देखी गई है. वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र की सतह के नीचे भी सामान्य से ज्यादा गर्म पानी जमा है. पूर्वी प्रशांत महासागर में गहराई पर पानी का तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस से अधिक ऊपर दर्ज किया गया. यह संकेत है कि समुद्र के भीतर जमा गर्मी अल नीनो को और ताकत दे सकती है.
हवाओं और बारिश के पैटर्न में भी बदलाव
अल नीनो का असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं है. प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली हवाओं और बादलों की गतिविधियों में भी बदलाव दिखाई दे रहा है. मध्य और पूर्वी प्रशांत में बारिश और बादलों की गतिविधि बढ़ी है, जबकि इंडोनेशिया के आसपास बादल बनने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत कमजोर है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्र के गर्म होने और हवाओं में बदलाव का एक साथ दिखाई देना बताता है कि अल नीनो से जुड़ी मौसमी गतिविधियां मजबूत हो रही हैं. मौसम के कंप्यूटर मॉडल भी संकेत दे रहे हैं कि साल के अंत तक इसकी ताकत और बढ़ सकती है.
CPC के अनुमानों के मुताबिक, सितंबर से नवंबर 2026 के बीच बेहद मजबूत अल नीनो बनने की संभावना 54% है. अक्टूबर से दिसंबर के दौरान यह संभावना बढ़कर 83% और नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच 70% आंकी गई है. यहां बेहद मजबूत या ऐतिहासिक अल नीनो का मतलब ऐसी घटना से है, जिसमें समुद्र के तापमान से जुड़ा तीन महीने का RONI सूचकांक 1950 के बाद के रिकॉर्ड के आधार पर 2.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो.
भारत समेत दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है असर
अल नीनो के मजबूत होने से दुनिया के कई हिस्सों में तापमान, बारिश और मौसम के सामान्य पैटर्न में बदलाव की आशंका बढ़ सकती है. भारत में भी अल नीनो की स्थिति पर नजर रखी जाती है, क्योंकि इसका संबंध मानसून की बारिश से हो सकता है. हालांकि, मजबूत अल नीनो का मतलब यह नहीं है कि भारत में मानसून निश्चित रूप से कमजोर ही रहेगा. बारिश पर हिंद महासागर की स्थिति और दूसरे मौसमी कारकों का भी असर पड़ता है.
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