Supreme Court.
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सुप्रीम कोर्ट ने कचरा प्रबंधन पर कड़ा आदेश देते हुए साफ कहा है कि हर एक नागरिक को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी समझनी होगी. देश के ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वाले 'कचरे के बड़े उत्पादकों' जैसे कि बड़े मॉल, होटल, अस्पताल, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और बड़ी आवासीय सोसायटियों के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
कचरा प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त-
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन वी अंजरिया की पीठ ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम कानून 2026 के कड़े क्रियान्वयन को लेकर देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट के आदेश में जिला कलेक्टरों (DM) को अपनी विशेष शक्ति का प्रयोग करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत देश भर के जिला कलेक्टरों को विशेष शक्तियां सौंपें. इसके तहत कलेक्टरों को नियमों का उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है. कोर्ट ने इस बाबत विशेष सेल भी गठन करने को कहा है.
हर जिले में स्पेशल सेल बनाई जाएगी- SC
कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक जिले में एक 'स्पेशल सेल' बनाई जाएगी. उसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भी शामिल होंगे. यह स्पेशल सेल उन बल्क वेस्ट जनरेटर्स यानी कचरे के बड़े उत्पादकों के मनमानी करने पर उनके बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश जारी कर सकता है, जो ठोस कचरा प्रबंधन नियमों की अवहेलना करते हैं और कचरे का समुचित निष्पादन यानी Processing और Segregation नहीं करते हैं.
अब बड़ा सवाल ये है कि कचरे के बड़े उत्पादक यानी बल्क वेस्ट जनरेटर कौन हैं? यानी वे संस्थाएं जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा पैदा करती हैं, जिनका निर्मित क्षेत्र 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है, या जहां दैनिक पानी की खपत 40,000 लीटर से अधिक है. मसलन बड़े होटल, मॉल, अस्पताल और बड़ी सोसायटियां).
नियम के पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जा सकती है- SC
कचरे का 4 श्रेणियों में वर्गीकरण होता है. नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार श्रेणियों गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल/घरेलू खतरनाक कचरा में अलग-अलग करना अनिवार्य है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण को स्वच्छ रखना नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हिस्सा है और नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना व आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है.
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