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Marital Rape: मैरिटल रेप पर लगातार दायर हुईं याचिकाएं, कल सुप्रीम कोर्ट कर सकता है सुनवाई, क्या पूरी होंगी महिलाओं की उम्मीदें

14 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट Marital Rape पर दायर याचिकाओं को सुनेगा और इसके बाद फैसला सुनाएगा. अब देखना यह है कि क्या इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कोई मिसाल कायम कर पाता है या नहीं.

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हाइलाइट्स
  • लगभग 32 प्रतिशत महिलाएं हैं मैरिटल रेप का शिकार

  • कई देशों में है इसके खिलाफ कानून

मैरिटल रेप को लेकर भारत में लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं. हर किसी के पास यह सवाल है कि आखिर मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाया जाए या नहीं. मैरिटल रेप से मतलब है कि दंपति के बीच वैवाहिक रिश्तों में अपनी पत्नी की मर्जी के खिलाफ जबरन संबंध बनाना. ज्यादातर इस बारे में यही दलील दी जाती है कि शादीशुदा दंपति के बीच बनाए गए शारीरिक संबंध रेप नहीं हो सकते हैं. 

क्योंकि शादी करने का मतलब है पति-पत्नी का एक-दूसरे पर अधिकार होना. इसलिए अगर पति अपनी पत्नी से शारीरिक सुख चाहता है तो इसे जबरदस्ती या रेप नहीं कहा जा सकता है. लेकिन बहुत से ऐसे मामले सामने आए हैं जहां वैवाहिक संबंधों में एक महिला के अधिकारों का हनन होता है और इसलिए शादी में जबरन शारीरिक संबंध को अपराध की श्रेणी में लाने की लेकर बहुत सी याचिकाएं हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दायर हैं. 

आपको बता दें कि मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाया जाए या नहीं, इस बारे में सुप्रीम कोर्ट 14 मार्च 2023 को सभी याचिकाएं सुनने के बाद सुनवाई कर सकता है. इस सुनवाई से देश की हर महिला को बहुत उम्मीदें हैं क्योंकि मैरिटल रेप को अपराध करार देने से बहुत सी महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी. 

भारत में क्या है स्थिति
आउटलुक इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस-5) के अनुसार, भारत में लगभग 32 प्रतिशत महिलाओं, अपनी शादी में अपने पति से शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा का अनुभव किया है. वहीं, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 18-49 वर्ष आयु वर्ग में 25 प्रतिशत विवाहित महिलाएं, जिन्होंने वैवाहिक शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया है, उन्हें शारीरिक चोटें आई हैं. 

आपको बता दें कि वैवाहिक बलात्कार के मामले में, भारत पुराने औपनिवेशिक कानून का पालन करता है जहां पति और पत्नी के बीच अनिच्छा से शारीरिक संबंध को अपराध के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है. 

मैरिटल रेप पर भारतीय कानून 
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के अनुसार, रेप के अंतर्गत, एक महिला के साथ गैर-सहमति वाले यौन उत्पीड़न के सभी प्रकार शामिल हैं. हालांकि, धारा 375 के अपवाद 2 के तहत, अगर पत्नी या पति की उम्र 15 साल से ज्यादा है तो उनके बीच अनिच्छा से संभोग "बलात्कार" नहीं होता है और यही अपवाद,  मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में आने से रोकता है. 

अभी भी देश में मैरिटल रेप या वैवाहिक बलात्कार को आपराधिक श्रेणी में लाने का संघर्ष जारी है. आपको याद दिला दें कि 29 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने फैसला सुनाया था कि महिला की वैवाहिक स्थिति जो कुछ भी हो, उसे सुरक्षित और कानूनी तरीके से अबॉर्शन कराने का अधिकार है. इससे अविवाहित महिलाओं को भी 24 हफ्ते तक अबॉर्शन कराने का अधिकार मिल गया. 

इस फैसले के दौरान कोर्ट ने मैरिटल रेप का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि अगर पति ने महिला के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और इससे महिला प्रेग्नेंट हो गई तो उन्हें भी अबॉर्शन का हक है. कोर्ट के मुताबिक, रेप की परिभाषा में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 'मैरिटल रेप' शामिल होना चाहिए. इस तरह से एक कानून में कोर्ट ने मैरिटल रेप को मान्यता दी है. 

कई बार मैरिटल रेप को माना गया अपराध 
आपको बता दें कि देश में कई मामलों में मैरिटल रेप को खारिज करने की बजाय अपराध माना गया है. दिसंबर 2012 के बलात्कार मामले के बाद स्थापित की गई जेएस वर्मा समिति ने भी वैवाहिक बलात्कार को एक अपराध बनाने के लिए बलात्कार कानूनों में बदलाव की सिफारिश की थी. 

अगस्त 2021 में, केरल हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में वैवाहिक बलात्कार को क्रूरता का एक रूप और तलाक के लिए एक वैध आधार माना था. वहीं, कर्नाटक हाई कोर्ट ने 23 मार्च, 2022 को अपने फैसले में एक पति की याचिका को खारिज कर दिया. याचिका में पति ने अपने खिलाफ पत्नी द्वारा लगाए गए बलात्कार के आरोपों को वापस लेने की मांग की थी. न्यायालय ने कहा कि "बलात्कार एक बलात्कार है", चाहे वह पुरुष 'पति' ने महिला "पत्नी" पर किया हो.

दूसरे देशों में क्या है स्थिति
भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, अल्जीरिया और बोत्सवाना सहित उन 36 देशों में से एक है, जहां मैरिटल रेप अभी भी अपराध नहीं है. जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने 50 राज्यों में मैरिटल रेप को क्रिमिनिलाइज किया है. हालांकि, कानून अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है.

ब्रिटेन में वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित कर दिया गया है और यहां आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हो सकती है. यौन हिंसा कानूनों से वैवाहिक छूट को हटाने वाला और मैरिटल रेप को क्रिमिनिलाइज करने वाला रूस पहला देश बना था. वहीं, चीन में वैवाहिक बलात्कार न तो अपराध है और न ही सिविल ऑफेंस. अब देखना यह है कि क्या भारत इस मामले में मिसाल कायम कर पाता है या नहीं.