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सोने-चांदी में गिरावट का बड़ा झटका... निवेशकों ने बदली रणनीति, क्रूड ऑयल में बढ़ा पैसा, बाजार में हलचल

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही युद्ध की शुरुआत हुई थी, उम्मीद की जा रही थी कि सोने और चांदी की कीमतें और ऊंचाई छुएंगी. शुरुआत में ऐसा हुआ भी, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता गया, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने लगी.

Surat Gold Silver Rate Surat Gold Silver Rate

पिछले कुछ समय से लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे सोने और चांदी के दामों में अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. बाजार के जानकारों के मुताबिक इस गिरावट के पीछे मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और उससे जुड़ी कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल प्रमुख कारण है. निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी से पैसा निकालकर अब क्रूड ऑयल की ओर रुख कर लिया है, जिसका सीधा असर बुलियन मार्केट पर पड़ा है.

निवेशकों की बदली रणनीति से दबाव में गोल्ड-सिल्वर
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही युद्ध की शुरुआत हुई थी, उम्मीद की जा रही थी कि सोने और चांदी की कीमतें और ऊंचाई छुएंगी. शुरुआत में ऐसा हुआ भी, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता गया, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने लगी. यही वजह रही कि निवेशकों ने अपनी रणनीति बदलते हुए गोल्ड और सिल्वर से दूरी बनाकर क्रूड ऑयल में निवेश बढ़ा दिया. जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में रोजाना 5% से 10% तक की बढ़ोतरी ने निवेशकों को आकर्षित किया. इसके चलते सोने-चांदी में बिकवाली बढ़ी और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई. माना जा रहा है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो सोने में अभी और करीब 5% तक गिरावट देखने को मिल सकती है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखा असर
वैश्विक स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. सोना जो कुछ समय पहले 5000 डॉलर के करीब पहुंच गया था, वह अब घटकर लगभग 4400 से 4600 डॉलर के बीच आ गया है. वहीं चांदी, जिसने 110 डॉलर का स्तर पार किया था, अब गिरकर करीब 74 डॉलर पर आ गई है. भारतीय बाजार में भी इसका असर साफ दिख रहा है. सोने की कीमतें जो करीब 20 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई थीं, अब घटकर लगभग 15.27 लाख रुपये तक आ गई हैं. वहीं चांदी भी करीब 2.20 लाख रुपये के स्तर पर कारोबार कर रही है.

ज्वेलर्स के लिए चुनौती और अवसर दोनों
कीमतों में इस उतार-चढ़ाव का असर ज्वेलरी कारोबार पर भी पड़ा है. ज्वेलर्स का मानना है कि चाहे कीमतें बढ़ें या घटें, दोनों ही स्थितियों में उन्हें कुछ न कुछ नुकसान उठाना पड़ता है. हालांकि, वे इस गिरावट को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं. कम कीमतों की वजह से अब वे ग्राहक बाजार में लौट सकते हैं, जो लंबे समय से खरीदारी का इंतजार कर रहे थे. ऊंचे दामों के कारण पहले मांग में लगभग 40% तक गिरावट आ गई थी, जिससे कारीगरों के पास काम भी कम हो गया था. अब उम्मीद है कि बाजार में फिर से रौनक लौटेगी और कामकाज बढ़ेगा.

शेयर बाजार पर भी पड़ा असर
युद्ध की स्थिति का असर केवल कमोडिटी बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि शेयर बाजार भी इससे प्रभावित हुआ है. युद्ध की खबर आने के बाद से बाजार में लगातार गिरावट देखी जा रही है और सूचकांक में 500 से 1000 अंकों तक की कमजोरी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो बाजार में और गिरावट आ सकती है.

आगे क्या रह सकता है रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और युद्ध की स्थिति बनी रहेगी, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, भारत जैसे देश में जहां सोना-चांदी केवल निवेश ही नहीं बल्कि भावनाओं से भी जुड़ा है, वहां शादी और त्योहारों के सीजन में मांग फिर से बढ़ने की पूरी संभावना है.

रिपोर्टर: संजय सिंह राठौड़

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