letter written to the Prime Minister in blood
letter written to the Prime Minister in blood
यह खबर गुजरात के सूरत की है, जहां गौ-भक्तों और व्यापारियों ने गाय को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग को लेकर एक अनोखा और विशाल प्रदर्शन किया है. सूरत के व्यापारियों और गौ-भक्तों ने केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए एक बेहद भावुक और कड़ा रास्ता अपनाया है. अपनी अटूट आस्था का परिचय देते हुए, 10 प्रमुख व्यापारियों ने सीरिंज से अपना खून निकालकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पत्र लिखा है.
खून से लिखे इस प्रार्थना पत्र में मुख्य रूप से चार मांगें रखी गई हैं. गौ-हत्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए. गौ-रक्षा के लिए एक सशक्त केंद्रीय कानून बनाया जाए. गौमाता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देकर सम्मानित किया जाए और केंद्र में एक अलग 'गौ संवर्धन मंत्रालय' की स्थापना की जाए. इस अभियान के समर्थन में सूरत में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जो अठवागेट स्थित वनिता विश्राम ग्राउंड से कलेक्टर कचहरी तक निकाली गई. रैली में बुलडोजर शामिल किए गए, जो गौ-हत्या करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रतीक थे. गौ-भक्ति के प्रतीक के रूप में 8 से 10 बैलगाड़ियां रैली का हिस्सा बनीं. इस ऐतिहासिक रैली में बड़ी संख्या में साधु-संतों और महंतों ने भाग लिया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि अब सभी गौ-भक्तों का संकल्प है.
गो-वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग
देशभर में चल रहे 'राष्ट्रीय गौ सम्मान आवाहन अभियान' के तहत आज सूरत में आस्था, परंपरा और गौ रक्षा को लेकर एक बड़ा जनसैलाब देखने को मिला. शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में गौ भक्त, संत समर्थक, महिलाएं और गौ सेवा से जुड़े लोग हाथों में भगवा ध्वज, गौ माता के पोस्टर और बैनर लेकर उतरे. इस दौरान केंद्र सरकार से देशभर में गो-वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, गौ तस्करी रोकने और अलग से गौ संवर्धन मंत्रालय बनाने की मांग की गई. यह अभियान किसी राजनीतिक दल या संस्था का नहीं बल्कि संतों की प्रेरणा से शुरू हुआ.
हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया
सूरत में निकाली गई इस गौ सम्मान रैली में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया. रैली के दौरान गौ भक्तों ने गौ माता के समर्थन में नारे लगाए और सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए जनजागरण अभियान चलाया. अभियान से जुड़े ललित शर्मा ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं बल्कि 'गौ भूमि' है, जहां गाय को सदियों से माता का दर्जा दिया जाता रहा है. उन्होंने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आस्था का केंद्र है और आज जरूरत इस बात की है कि गौ माता को संवैधानिक रूप से 'राष्ट्र माता' का सम्मान दिया जाए.
5 लाख सूरत के निवासियों के हस्ताक्षर
यह आंदोलन केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहा. इस अभियान के तहत अब तक लगभग 5 लाख सूरत के निवासियों के हस्ताक्षर एकत्रित किए जा चुके हैं. व्यापारियों का मानना है कि जब देश हिंदू राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो ऐसे समय में गौमाता को 'राष्ट्रमाता' का उचित सम्मान मिलना अनिवार्य है. इन हस्ताक्षरों के साथ एक औपचारिक आवेदन पत्र जिला कलेक्टर को सौंपा गया है, जिसे आगे दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया जाएगा. व्यापारियों का दावा है कि यह पत्र और लाखों लोगों का समर्थन दिल्ली तक गौ-भक्तों की गूंज पहुंचाने का काम करेगा.
गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग
खून से पत्र लिखने वाले कपड़ा व्यापारी एवं गौ भक्त ललित शर्मा ने बताया कि गौ सम्मान आवाहन अभियान पूरे भारतवर्ष में 27 अप्रैल के दिन चालू हुआ. स्थानीय निकाय चुनाव होने के कारण गुजरात के अंदर ये आज 7 मई को हो रहा है, जिसके तहत 5 लाख से अधिक हस्ताक्षर सूरत के अंदर सौंपे जा रहे हैं. जब चारों तरफ भगवा ध्वज की सरकार हैं, चारों तरफ हिंदूवादी सरकार हैं, तो ये अभी हो जाना चाहिए. क्योंकि भगवा की आन-बान और शान हमारी गौ माता है, हमारे राष्ट्र का प्राण गौ माता है, तो उस प्राण की रक्षा के लिए हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिल जाए. 1945 से महात्मा गांधी जी ने बोला था, और आज देश आजाद है. देश के अंदर आजादी के बाद में हिंदूवादी सरकार आ गई हैं, सनातन धर्म की रक्षा करने वाली सरकार मानी जा रही हैं.
रिपोर्टर: संजय सिंह राठौड़
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