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40 करोड़ का पैकेज छोड़ टीचर का बेटा बना IFS, हासिल की 142 वीं रैंक

कोयला के रहने वाले शिक्षक रामप्रकाश मीणा के दो पुत्र और एक बेटी हैं. शिक्षक रामप्रकाश ने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए काफी संघर्ष किया. शिक्षक रामप्रकाश के परिवार की स्थिति दयनीय होने के बावजूद उन्होंने अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूलों में पढ़ाया.

गजेंद्र सिंह मीणा गजेंद्र सिंह मीणा

राजस्थान के धौलपुर जिले के छोटे से गांव कोयला के रहने वाले टीचर के बेटे गजेंद्र सिंह मीणा ने यूपीएससी द्वारा आयोजित की गई भारतीय वन सेवा परीक्षा 2022 को क्लियर कर सफलता हासिल की. यूपीएससी द्वारा आयोजित की गई आईएफएस की परीक्षा में गजेंद्र सिंह ने ऑल इंडिया में 142 वीं रैंक हासिल किया. गजेंद्र सिंह को सफलता पाने के लिए कठिन संघर्ष और मेहनत करनी पड़ी है. गजेंद्र सिंह धौलपुर जिले से भारतीय वन सेवा परीक्षा पास करने वाले पहले युवा हैं. आईएफएस की परीक्षा क्लियर करने के बाद गजेंद्र सिंह जब अपने गांव कोयला पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया.

कोयला के रहने वाले शिक्षक रामप्रकाश मीणा के दो पुत्र और एक बेटी हैं. शिक्षक रामप्रकाश ने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए काफी संघर्ष किया. शिक्षक रामप्रकाश के परिवार की स्थिति दयनीय होने के बावजूद उन्होंने अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूलों में पढ़ाया. उसी मेहनत का फल हैं कि शिक्षक रामप्रकाश के तीनों बच्चे सरकारी नौकरी में हैं. शिक्षक की बेटी राजेश्वरी डॉक्टर हैं और दूसरा बेटा लवकुश मीणा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड रक्षा मंत्रालय में उप प्रबंधक के पद पर तैनात हैं. शिक्षक रामप्रकाश मीणा का सपना था कि वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दें. आज उसका यह सपना पूरा हो गया हैं. शिक्षक रामप्रकाश के बड़े बेटे गजेंद्र सिंह ने यूपीएससी द्वारा आयोजित की गई आईएफएस की परीक्षा में ऑल इंडिया में 142 वीं रैंक हासिल कर अपने पिता के सपने को पूरा कर दिया हैं.

गजेंद्र सिंह ने साल 2016 में आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था और उसके बाद जापान से 40 करोड़ रुपये का पैकेज मिला था लेकिन गजेंद्र सिंह ने जापान का पैकेज स्वीकार नहीं किया और यूपीएससी परीक्षा क्लियर करने के बाद समाज सेवा करने का संकल्प लिया. इसके बाद गजेंद्र सिंह को यूपीएससी द्वारा आयोजित भारतीय इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा 2017 में उन्हें ऑल इंडिया में 49 वीं रैंक हासिल की और वर्तमान में गजेंद्र सिंह केंद्रीय जल आयोग जल शक्ति मंत्रालय नई दिल्ली में उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. गजेंद्र सिंह को यह सर्विस जनता से जुड़ी नहीं होने के कारण उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और आईएएस की चार बार परीक्षा दी, जिसमें से तीन बार परीक्षा पास कर वह इंटरव्यू में पहुंचे और आईएफएस की परीक्षा पहले टर्म में क्लियर किया है.  

आईएफएस परीक्षा क्लियर करने पर गजेंद्र सिंह मीणा ने बताया कि अधिकारी बनने की प्रेरणा उन्हें बचपन में अपने दादाजी से मिली थी और वह दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी टॉपर्स रहे थे. उन्होंने साल 2016 में आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था और वहां भी टॉपर्स रहे थे. उन्हें आईआईटी कानपुर में बीज बोने की मशीन का पेटेंट भी मिला है,जो छोटे और सीमांत किसानों को आसानी से बीज बोने में मदद कर सकती है. यूपीएससी द्वारा आयोजित भारतीय इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा 2017 में उन्हें ऑल इंडिया में 49 वीं रैंक हासिल की थी और वर्तमान में गजेंद्र सिंह केंद्रीय जल आयोग जल शक्ति मंत्रालय नई दिल्ली में उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं.

आईएफएस के लिए चयनित अभ्यर्थी गजेंद्र सिंह मीणा ने बताया कि वह साधारण परिवार से हैं. साल 2016 में आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था और उसके बाद जापान से 40 करोड़ रूपये का पैकेज मिला था लेकिन गजेंद्र सिंह ने जापान का पैकेज स्वीकार नहीं किया और यूपीएससी परीक्षा क्लियर करने के बाद समाज सेवा करने का संकल्प लिया. इसके बाद गजेंद्र सिंह को यूपीएससी द्वारा आयोजित भारतीय इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा 2017 में उन्हें ऑल इंडिया में 49 वीं रैंक हासिल की और वर्तमान में गजेंद्र सिंह केंद्रीय जल आयोग जल शक्ति मंत्रालय नई दिल्ली में उप निदेशक के पद पर कार्यरत हूं. गजेंद्र सिंह ने बताया कि यह सर्विस जनता से जुड़ी नहीं होने के कारण उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और आईएएस की चार बार परीक्षा दी,जिसमे से तीन बार परीक्षा पास कर वह इंटरव्यू में पहुंचे और आईएफएस की परीक्षा पहले टर्म में क्लियर किया है.

-उमेश मिश्रा की रिपोर्ट