तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव
क्रिकेट के मैदान में फ्लॉप होने के बाद राजनीति की पिच पर कम समय में ही सफल बल्लेबाजी करने वाले तेजस्वी यादव आज 32 साल के हो गए हैं. क्रिकेट में भले तेजस्वी ने लंबी पारी न खेली हो लेकिन राजद के शून्य पर जाने के बाद अपने बलबूते ही उन्होंने न सिर्फ पार्टी को दोबारा खड़ा किया बल्कि एक बार फिर राजद को बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बना दी.
2010 से शुरू हुआ था राजनीतिक करियर
दरअसल, तेजस्वी के राजनीतिक करियर की कहानी की शुरुआत 2010 से होती है. 2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राजद 22 सीटों पर सिमट गया था. राजद की इतनी करारी हार से लालू काफी चिंतित थे. उस वक्त तेजस्वी अपने क्रिकेट करियर को संवारने में जुटे थे. लेकिन, राजद की बुरी हार से बौखलाए लालू ने तेजस्वी को वापस बुला लिया. तेजस्वी के राजनीतिक करियर की शुरूआत ठीक यहीं से होती है.
ऐसे हुई तेजस्वी की राजनीति में लॉन्चिंग
तेजस्वी यादव जब बिहार लौटे तब आलोक मेहता और शिवचंद्र राम को तेजस्वी के राजनीति में लॉन्चिंग की जिम्मेवारी मिली. वरिष्ठ पत्रकार इंद्रभूषण कुमार बताते हैं कि सबसे पहले तेजस्वी को बिहार का सभी विधानसभा क्षेत्र घूमाया गया. खासकर वैसे क्षेत्र जहां लालू यादव की पकड़ मजबूत थी, वहां तेजस्वी लगातार लोगों के मिले. इस दौरान उन्होंने राघोपुर में काफी वक्त बिताया. इस बीच जदयू के साथ गठबंधन ने राजद को संजीवनी दे दी और 2015 में विधानसभा चुनाव में राजद बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बन गई. बिहार में महागठबंधन की सरकार भले डेढ़ साल चली लेकिन इस बीच लालू ने तेजस्वी को राजनीति के सारे दांव पेंच सीखा दिए.
नीतीश से अलग होने के बाद ही नेता बने तेजस्वी
राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि जब राजद सत्ता से अलग हो गया तब तेजस्वी के नेता बनने की कहानी शुरू हुई. 4 महीने बाद चारा घोटाले में लालू जेल चले गए और तेजस्वी को फ्री हैंड मिल गया. तेजस्वी ने अपने हिसाब से संगठन चलाया और पार्टी को चलाने की सारी बारीकियां सीखी. 2019 का लोकसभा चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ा गया लेकिन पार्टी शून्य पर सिमट गई. राजनीति जानकारों का कहना है कि तेजस्वी महागठबंधन के सभी दलों को मैनेज नहीं कर पाए और बिना किसी बड़े एजेंडे के पार्टी चुनाव में उतरी.
एटूजेड समीकरण से मिली सफलता
2019 के चुनाव के बाद तेजस्वी ने संगठन पर पूरा ध्यान दिया. लालू के एमवाय समीकरण को तोड़ तेजस्वी ने ए टू जेड का समीकरण तैयार किया. तेजस्वी ने सभी वर्गों को साधने की कोशिश की. तेजस्वी ने पार्टी को लालू वाली छवि से निकालने की पूरी कोशिश की. इसका राजद को बहुत लाभ मिला और 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी एक बार फिर बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. तेजस्वी भले मुख्यमंत्री नहीं बन पाए लेकिन, राजद के जनाधार को एक बार फिर पार्टी के साथ लाने में सफल रहे.
शादी के लिए तेजस्वी को मिले हजारों प्रपोजल
डेढ़ साल तक बिहार में चली महागठबंधन की सरकार में जब तेजस्वी मंत्री थे तब उन्होंने रोड मेंटेनेंस के लिए टॉल फ्री नंबर जारी किया था जिस पर हर दिन हजारों कॉल आते थे. इस नंबर पर कुछ लोग तो सड़क खराब की शिकायत करते थे लेकिन, ज्यादातर कॉल तेजस्वी को शादी के लिए आने लगे. हजारों लड़कियों ने तेजस्वी को शादी के लिए प्रपोजल भेजा. हालांकि, जब एक बार तेजस्वी से इसको लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कह दिया था कि माता-पिता की मर्जी या लालू और राबड़ी की मर्जी से ही उनकी शादी होगी. लालू और राबड़ी ही बहू चुनेंगे.