हमीरपुर में बेल गाड़ी से निकली बारात
हमीरपुर में बेल गाड़ी से निकली बारात
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को एक बार फिर जीवित किया गया. करीब 50 वर्षों से बंद पड़ी बैलगाड़ी से बारात निकालने की परंपरा को दोबारा शुरू किया गया. 25 बैलगाड़ियों में सवार होकर दूल्हा और करीब 200 बराती खेतों के रास्ते लगभग तीन किलोमीटर का सफर तय कर फार्म हाउस पहुंचे, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सादगीपूर्ण विवाह संपन्न हुआ. इस अनोखी बारात को देखने के लिए आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और बैलगाड़ियों में सजी बारात को देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए.
मौदहा क्षेत्र के गुड़ा गांव का मामला
यह मामला हमीरपुर जिले के मौदहा थाना क्षेत्र के अंतिम गांव गुड़ा का है. यहां रहने वाले जागेंद्र द्विवेदी अपने परिवार के साथ रहते हैं. उनके पुत्र मोहित द्विवेदी मोबाइल की दुकान चलाते हैं. मोहित की शादी भेड़ी जलालपुर निवासी विवेक पाठक की पुत्री मोहिनी पाठक के साथ 25 फरवरी को तय हुई थी. दोनों परिवारों की इच्छा थी कि बारात बैलगाड़ियों से निकाली जाए, जिसके लिए 25 बैलगाड़ियां बुक की गईं. बुधवार दोपहर देसी अंदाज में धूमधाम से बारात निकाली गई, जिसमें लगभग 200 लोग शामिल हुए. बारात गुड़ा गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित द्विवेदी परिवार के फार्म हाउस तक पहुंची.
पारंपरिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई रौनक
विवाह समारोह पूरी तरह पारंपरिक तरीके से आयोजित किया गया. कार्यक्रम में कठघोड़वा नृत्य और लौंडा नाच का आयोजन किया गया. दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर बरातियों के साथ विवाह स्थल पहुंचा. बारात का मुख्य आकर्षण तमूरा भजन, महिलाओं द्वारा गाए गए पारंपरिक बुंदेलखंडी गीत और पत्तल में परोसा गया देशी भोजन रहा. मेन्यू में कद्दू, आलू-बैंगन की सब्जी सहित कई पारंपरिक व्यंजन शामिल थे. सभी मेहमानों को बैठाकर सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया. पूरे विवाह में बिना शोर-शराबे और आडंबर के सादगी और परंपरा का विशेष ध्यान रखा गया.
तीन दिन चलीं शादी की रस्में
विवाह समारोह तीन दिनों तक चला. पहले दिन तिलक की रस्म निभाई गई, दूसरे दिन द्वारचार हुआ और तीसरे दिन विदाई की रस्म पूरी की गई. खास बात यह रही कि 26 फरवरी को दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से ही की गई. बैलगाड़ी में हुई यह विदाई वहां मौजूद लोगों के लिए एक यादगार पल बन गई. इस अनोखी शादी ने पुरानी परंपराओं को फिर से जीवित करने का संदेश दिया.
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