Aadhaar update
Aadhaar update
भारत में आधार पहचान का सबसे बड़ा डिजिटल सिस्टम है. करोड़ों लोगों की पहचान फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतली और चेहरे जैसे बायोमेट्रिक डेटा के जरिए सत्यापित की जाती है. इतने बड़े स्तर पर डेटा संभालना आसान नहीं है और इसी वजह से डुप्लीकेट आधार जैसी समस्या भी सामने आती रही है. 2022 में सरकार ने लोकसभा में बताया था कि मई तक करीब 6 लाख डुप्लीकेट आधार नंबर रद्द किए गए थे. अब UIDAI के रिसर्चर्स ने इस समस्या से निपटने के लिए एक नई तकनीक तैयार की है, जिसका नाम Bharat ABIS है.
क्या है Bharat ABIS तकनीक?
Bharat ABIS यानी Automated Biometric Identification System एक ओपन-सोर्स मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक प्लेटफॉर्म है. यह फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतली और चेहरे के डेटा को एक साथ इस्तेमाल करता है. इन तीनों बायोमेट्रिक जानकारियों को मिलाकर करीब 13.5 KB का एक डिजिटल टेंपलेट तैयार किया जा सकता है.
इसके बाद इस टेंपलेट को पुराने रिकॉर्ड से मिलाकर पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति की पहचान पहले से सिस्टम में मौजूद है या नहीं. इससे डुप्लीकेट आधार की पहचान करने में मदद मिलेगी.
करोड़ों रिकॉर्ड में भी तेजी से करेगा काम
Bharat ABIS में ऐसा सिस्टम भी तैयार किया गया है, जो काम का बोझ कई सर्वर्स में बांट देता है. इससे करोड़ों रिकॉर्ड एक साथ चेक करने के दौरान सिस्टम पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा और उसके हैंग होने की संभावना कम होगी. एक से ज्यादा बायोमेट्रिक का इस्तेमाल होने से पहचान की सटीकता भी बढ़ती है. यानी सिर्फ फिंगरप्रिंट के आधार पर पहचान करने के बजाय आंखों और चेहरे की जानकारी भी जांची जा सकती है.
UIDAI के रिसर्चर्स ने मिलकर बनाया
इस सिस्टम को तैयार करने वाली टीम में UIDAI के 6 रिसर्चर्स शामिल हैं. इसमें IIIT हैदराबाद के एक रिसर्चर और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के बायोमेट्रिक रिसर्चर अनिल जैन भी शामिल हैं. Bharat ABIS को 1 लाख से 2 लाख डी-आइडेंटिफाई डेटासेट पर ट्रेन किया गया है. इसके बाद 22 करोड़ आधार रिकॉर्ड वाली गैलरी पर भी इसकी टेस्टिंग की गई.
बुजुर्गों और मजदूरों को भी मिलेगा फायदा
इस तकनीक का फायदा उन लोगों को भी मिल सकता है जिनके फिंगरप्रिंट समय के साथ घिस जाते हैं. खासकर बुजुर्गों और मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों को राशन या पेंशन लेते समय अंगूठा मैच न होने की परेशानी होती है. नए सिस्टम में दूसरे बायोमेट्रिक विकल्पों की मदद से ऐसी दिक्कतों को कम किया जा सकता है.
इसके अलावा Bharat ABIS ओपन-सोर्स और मुफ्त तकनीक है. ऐसे में कम संसाधन वाले करीब 160 छोटे देश भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, भारत में बड़े स्तर पर लागू करने से पहले इसकी कुछ और टेस्टिंग होना बाकी है.
ये भी पढ़ें: