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Dhanteras 2026: उज्जैन के 2000 साल पुराने गजलक्ष्मी मंदिर में 40 लाख के नोटों से हुआ माता का अद्भुत श्रृंगार, प्रसाद में मिलीं पीली कौड़ियां

धनतेरस पर उज्जैन के नई पेठ स्थित 2000 साल पुराने गजलक्ष्मी मंदिर में श्रद्धालुओं के सहयोग से 40 लाख रुपये के नोटों से माता लक्ष्मी का भव्य श्रृंगार किया गया. ऐरावत हाथी पर विराजमान स्फटिक की प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ा और उन्हें प्रसाद में बरकत की पीली कौड़ियां दी गईं.

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राजा विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी का अनोखा रूप राजा विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी का अनोखा रूप

सनातन संस्कृति और उसके विचारों को मानने वालों के लिए धनतेरस का दिन खास महत्व रखता है. शुक्रवार को धनतेरस के मौके पर उज्जैन के प्राचीन गजलक्ष्मी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई. इस खास अवसर पर मंदिर में माता लक्ष्मी का 40 लाख रुपये के नोटों से विशेष श्रृंगार किया गया. दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे भक्तों को प्रसाद के रूप में पीली कौड़ी और चावल दिए गए, जिन्हें बरकत का प्रतीक माना जाता है.

40 लाख के नोटों से सजाया गया मंदिर
उज्जैन के नई पेठ क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध गजलक्ष्मी मंदिर में धनतेरस का पर्व भव्य तरीके से मनाया गया. श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर में 40 लाख रुपये के नोटों से माता का विशेष श्रृंगार किया गया. धनतेरस के दिन तड़के सबसे पहले माता लक्ष्मी का दूध और जल से अभिषेक किया गया. इसके बाद उन्हें सजाया गया. सुबह से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया, जो पूरे दिन जारी रहा. श्रद्धालुओं ने माता को प्रसन्न करने के लिए कमल के फूल और चुनरी भेंट की.

ऐरावत हाथी पर विराजमान हैं माता लक्ष्मी
गजलक्ष्मी मंदिर की प्रतिमा की अपनी अलग पहचान है. यहां माता लक्ष्मी ऐरावत हाथी पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देती हैं. मंदिर में स्थापित प्रतिमा स्फटिक से निर्मित है. ऐसा माना जाता है कि यह प्रतिमा दो हजार साल से भी अधिक पुरानी है. उज्जैन का यह मंदिर सम्राट विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी के रूप में भी जाना जाता है.

राजा विक्रमादित्य के तप से प्रसन्न हुई थीं माता
मान्यता है कि राजा विक्रमादित्य के तप और बल से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी स्वयं यहां विराजमान हुई थीं. बताया जाता है कि माता ने उनके राज्य में बसने का निर्णय लिया था. इसी दौरान मंदिर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई थी. तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

भक्तों को प्रसाद में दी गई पीली कौड़ी और चावल
धनतेरस पर मंदिर में पूजन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को बरकत के रूप में पीली कौड़ी और चावल का प्रसाद बांटा गया. मंदिर के पुजारी ने बताया कि दीपावली के दिन भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं. धनतेरस के अवसर पर मंदिर में उमड़ी भीड़ और विशेष श्रृंगार के बीच श्रद्धालुओं ने माता से सुख-समृद्धि की कामना की.
 

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