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UK Covid PPE Scam: ब्रिटेन में भारतीय मूल के दंपति दोषी करार, Covid PPE किट के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

ब्रिटेन में भारतीय मूल के दंपति समेत तीन लोग कोविड काल में PPE किट सप्लाई के नाम पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के दोषी पाए गए. अब तीनों को 21 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी.

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ब्रिटेन में भारतीय मूल के जोगेश भंडारी (59) और उनकी पत्नी मीनाक्षी (मीना) भंडारी (58) को कोविड-19 महामारी के दौरान PPE (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) सप्लाई के नाम पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया गया है. लेस्टर क्राउन कोर्ट में पांच हफ्ते तक चली सुनवाई के बाद दोनों को कई मामलों में दोषी पाया गया. इनके साथ क्रेग मॉरिस (43) को भी 2020 और 2021 में कंपनी की ओर से कई फर्जी सौदे करने और गलत दावे पेश करने का दोषी माना गया है. तीनों को 21 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी.

महामारी के दौर में लोगों की जरूरत का उठाया फायदा
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) के ऑपरेशंस मैनेजर पॉल बोनिफेस ने कहा- कोविड-19 के दौरान PPE की मांग अचानक बहुत बढ़ गई थी. इसी मौके का फायदा उठाकर भंडारी दंपति और उनके साथी ने कारोबारियों को निशाना बनाया और अपनी जेब भरी. उन्होंने कहा कि यह सब उस समय हुआ, जब PPE की मांग सबसे ज्यादा थी. CA की जांच में सामने आया कि PPE सप्लाई के नाम पर मिली रकम का इस्तेमाल घर की मरम्मत और लग्जरी कारें खरीदने में किया गया. एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने लोगों और कंपनियों की मजबूरी का फायदा उठाया. इससे सिर्फ कारोबारियों को नुकसान नहीं हुआ, बल्कि जरूरी मेडिकल सामान भी असली जरूरतमंद संस्थानों तक नहीं पहुंच पाया.

2020 में बनाई कंपनी, अमेरिका तक फैला खेल
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी. उसमें पता चला कि जोगेश भंडारी ने 2020 में नाइट्राइल ग्लव्स की खरीद-बिक्री के लिए एक कंपनी बनाई थी. इस दौरान उसने लुइसियाना स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अमेरिकी सहायक अटॉर्नी जनरल फ्रैंक लाब्रूजो के साथ मिलकर काम किया. लाब्रूजो ने एक फर्जी एस्क्रो सेवा उपलब्ध कराई. एस्क्रो ऐसा बैंक खाता होता है, जिसमें किसी डील की रकम तब तक सुरक्षित रहती है, जब तक सौदा पूरा नहीं हो जाता. लेकिन इस मामले में पैसा सीधे निकाल लिया गया.

पहले सौदे से ही शुरू हो गया फर्जीवाड़ा
NCA के मुताबिक, नवंबर 2020 में भंडारी ने 12 मिलियन बॉक्स नाइट्राइल ग्लव्स सप्लाई करने का सौदा किया. कंपनी ने एस्क्रो खाते में पैसा जमा कराया, लेकिन रकम वहीं रखने के बजाय तुरंत फ्रैंक लाब्रूजो, जोगेश भंडारी और दूसरी कंपनियों के पास पहुंचा दी गई. एक महीने बाद हुए दूसरे सौदे में एस्क्रो खाते में 2.7 मिलियन डॉलर आए. इनमें से करीब 5 लाख डॉलर निकालकर जोगेश और उसकी पत्नी का कर्ज चुकाया गया. जांच में यह भी सामने आया कि कारोबारियों को भरोसा दिलाने के लिए भंडारी ने 125 मिलियन डॉलर तक की रकम दिखाने वाले फर्जी बैंक स्टेटमेंट और लेटर्स ऑफ अटेस्टेशन भी तैयार किए.

अमेरिकी अस्पतालों के नाम पर भी लिया पैसा
2021 की शुरुआत में भंडारी ने अमेरिका के अस्पतालों में नाइट्राइल ग्लव्स भेजने के नाम पर 3.18 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम ली, लेकिन ग्लव्स कभी सप्लाई नहीं किए. इसके बाद 2021 के आखिर में उसने एक सप्लायर को भरोसा दिलाया कि वह PPE कारोबार का बड़ा नाम है और उसके पास सैकड़ों मिलियन डॉलर की क्षमता है. इसके आधार पर 1.8 बिलियन डॉलर की डील हुई. इस दौरान फ्रैंक लाब्रूजो ने एक फर्जी पत्र दिया, जिसमें लिखा गया कि पहली खेप की सुरक्षा के लिए भंडारी ने 35 मिलियन डॉलर जमा किए हैं. इस भरोसे पर कंपनी ने पहली दो खेपों के लिए 1.35 मिलियन डॉलर का भुगतान कर दिया. आखिरी डील में मिले 1.35 मिलियन डॉलर सीधे उस बिजनेस अकाउंट में पहुंचे, जिसे जोगेश भंडारी की पत्नी कंट्रोल करती थीं. इसी पैसे से दोनों ने नई Porsche खरीदी. इसके अलावा घर की किचन रेनोवेशन कराई और मकान में बड़े स्तर पर सुधार करवाए.

Rolex, लग्जरी कारें और विदेश यात्राओं पर खर्च
NCA के बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, कर्ज चुकाने के अलावा भंडारी दंपति ने Rolex समेत कई महंगी घड़ियां, ज्वेलरी, Audi A5, Land Rover Discovery और VW Golf जैसी कारें खरीदीं. इसके अलावा विदेशों में लग्जरी ट्रैवल और हॉलीडे पैकेज पर भी बड़ी रकम खर्च की गई. जांच एजेंसी ने साफ कहा कि यह पैसा उस मकसद पर बिल्कुल खर्च नहीं हुआ, जिसके लिए लिया गया था. इस पूरे घोटाले में शामिल फ्रैंक लाब्रूजो और एक अन्य आरोपी को पहले ही अमेरिका में दोषी ठहराया जा चुका है. अब ब्रिटेन की अदालत ने भी जोगेश भंडारी, मीनाक्षी भंडारी और क्रेग मॉरिस को दोषी करार दिया है. तीनों को 21 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी.
 

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