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Chandrapur News: पानी की बूंद से पेड़ और प्राणियों तक, हर रूप में बप्पा... दे रहे पर्यावरण संरक्षण का संदेश

इस वर्ष जहां हर जगह अनोखे गणेश पंडाल देखने को मिल रहे हैं. वहीं इस कड़ी में एक जगह गणेश जी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते भी नजर आ रहे हैं. वह पेड़ लेकर प्राणियों को बचाने की बात कर रहे हैं.

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पर्यावरण वसुंधरा एक्सप्रेस पर्यावरण वसुंधरा एक्सप्रेस

महाराष्ट्र के चंद्रपुर में गणेशोत्सव की भक्ति के बीच बप्पा का एक ऐसा अनोखा रूप देखने को मिल रहा है, जहां गणपति अपने भक्तों को सिर्फ दर्शन ही नहीं दे रहे, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संदेश भी दे रहे हैं. कहीं बप्पा पानी की बूंद बनकर जल बचाने की सीख दे रहे हैं, तो कहीं पेड़ के रूप में पर्यावरण संरक्षण का संदेश तो प्राणियों के रूप में प्राणियों की रक्षा का संदेश दे रहे हैं,और खास बात यह है कि मुशकराज खुद ट्रेन चलाकर भक्तों को बप्पा के इन अलग-अलग रूपों के दर्शन करा रहे हैं. चंद्रपुर के दत्तानगर में स्थित श्री नवयुवक बाल गणेश मंडल की अनोखी झांकी इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

खास ट्रेन का नाम ‘पर्यावरण वसुंधरा एक्सप्रेस’

ट्रेन के रूप में बनाए गए इस भव्य प्रवेश द्वार से अंदर पहुंचते ही ऐसा सीन दिखाई देता है, मानों भक्त प्रकृति की किसी अद्भुत दुनिया में प्रवेश कर गए हों. चारों ओर पहाड़, पहाड़ों के बीच छाए बादल और उन्हीं बादलों के बीच विराजमान हैं विघ्नहर्ता गणपति बप्पा. बप्पा का यह दिव्य रूप भक्तों को भक्ति और प्रकृति के बीच के गहरे संबंध का एहसास कराता है.

मूशकराज की अनोखी ट्रेन, जो देती है संदेश

इसके बाद पहाड़ों के बीच से निकलती है मुशकराज की ट्रेन. इस ट्रेन में सवार होकर बप्पा अपने अलग-अलग रूपों में भक्तों के सामने प्रकट होते हैं. कहीं बप्पा पानी की एक बूंद के रूप में नजर आते हैं, तो संदेश साफ है कि पानी बचाइए, क्योंकि जल है तो जीवन है. वहीं दूसरी ओर बप्पा पेड़ के रूप में दिखाई देते हैं और संदेश देते हैं कि पेड़ बचाइए, प्रकृति बचाइए और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखिए. इतना ही नहीं, बप्पा अलग-अलग प्राणियों के रूपों में भी दिखाई देते हैं. इन रूपों के माध्यम से जीव-जंतुओं की रक्षा और प्रकृति के हर जीव के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया जा रहा है. मुशकराज की यह अनोखी ट्रेन जब पहाड़ों के बीच से होकर भक्तों के सामने आती है, तो पूरा दृश्य भक्ति और पर्यावरण जागरूकता का अद्भुत संगम बन जाता है.

'प्रकृति को न उजाड़ें..'

झांकी में पेड़ों की कटाई और पहाड़ों की खुदाई को लेकर भी गंभीर संदेश दिया गया है. बप्पा मानो अपने भक्तों से कह रहे हों कि प्रकृति को मत उजाड़िए. पेड़ों की कटाई रोकिए, पहाड़ों की खुदाई रोकिए और पर्यावरण की रक्षा कीजिए, क्योंकि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा.

भक्ति के इस पर्व में श्री नवयुवक बाल गणेश मंडल ने बप्पा के माध्यम से एक बेहद खूबसूरत संदेश देने की कोशिश की है. गणपति बप्पा की पूजा सिर्फ फूल और प्रसाद से नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा करके भी की जा सकती है. बप्पा के अनोखे रूप, मुशकराज की वसुंधरा एक्सप्रेस और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है.