UP DGP Race Intensifies
UP DGP Race Intensifies
उत्तर प्रदेश में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अगले 15 दिनों में राज्य सरकार को टॉप-3 आईपीएस अफसरों की पैनल सूची भेज सकता है. इस सूची में कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम शामिल होने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है.
मुख्यमंत्री के करीबी अफसरों में हैं शामिल
सीनियरिटी और परिस्थितियों को देखें तो 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण इस समय रेस में सबसे आगे हैं. वे 1 जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाल रहे हैं और उनकी छवि सख्त प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर है. साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री के करीबी अफसरों में भी गिना जाता है, जो उनकी दावेदारी को और मजबूत बनाता है.
राज्य सरकार को करना होगा अंतिम फैसला
हालांकि टॉप-5 अफसरों में रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद, आलोक शर्मा, राजीव कृष्ण और पीसी मीणा शामिल हैं, लेकिन समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं. आलोक शर्मा जून 2026 में रिटायर हो रहे हैं, जिससे वे रेस से लगभग बाहर हो चुके हैं. रेणुका मिश्रा पर सिपाही भर्ती परीक्षा में लापरवाही के आरोप लगे थे. हालांकि उनके खिलाफ कोई औपचारिक दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए UPSC उनके नाम पर विचार कर सकता है. यदि UPSC की पैनल में रेणुका मिश्रा शामिल होती हैं तो उनके बाद पीयूष आनंद और फिर राजीव कृष्ण का नाम आ सकता है. यदि रेणुका मिश्रा को बाहर रखा जाता है, तो पीसी मीणा तीसरे नाम के तौर पर पैनल में जगह बना सकते हैं. अंतिम फैसला राज्य सरकार को करना होगा, जो इस पैनल में से किसी एक को स्थायी डीजीपी नियुक्त करेगी.
पिछले 4 वर्षों में यूपी में कोई स्थायी डीजीपी नहीं
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, स्थायी डीजीपी को न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल दिया जाता है. राजीव कृष्ण की रिटायरमेंट जून 2029 में है. ऐसे में अगर उन्हें नियुक्त किया जाता है तो वे लंबी अवधि तक इस पद पर बने रह सकते हैं. गौरतलब है कि पिछले 4 वर्षों में यूपी में कोई स्थायी डीजीपी नहीं रहा है और अब तक 5 कार्यवाहक डीजीपी बदले जा चुके हैं, जिससे इस नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है.